वीतराग वाणी सुनने वाले को आत्मिक सुख का अनुभव होता है - पूज्य जिनेंद्रमुनिजी म.सा. | Vitrag vani sunne wale ko atmik sukh ka anubhav hota hai

वीतराग वाणी सुनने वाले को आत्मिक सुख का अनुभव होता है - पूज्य जिनेंद्रमुनिजी म.सा.


मेघनगर (जुजर अली बोहरा) - आचार्य पूज्य उमेशमुनिजी म.सा. के सुशिष्य प्रवर्तक पूज्य जिनेंद्रमुनिजी म.सा. ने अणु स्वाध्याय भवन पर धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि धर्मकथा सम्यक पुरुषार्थ है।इसके तीन लाभ हैं यथा आत्मनिर्जरा, जिनशासन की प्रभावना तथा पुण्यनुबंधी पुण्य का बंध। उपयोग सहित अर्थात आत्मलक्ष्य से करें तो सात या आठ कर्म की निर्जरा अर्थात आंशिक कर्म क्षय होता है।सामान्य रूप से प्रत्येक जीव आठ कर्म का बंध और निर्जरा करते हैं लेकिन धर्मकथा से विशेष निर्जरा होती है।जो धर्म के विमुख होते हैं वे पुण्य,पाप,नरक,स्वर्ग व मोक्ष का वर्णन सुनकर धर्म के सम्मुख बनते हैं।धर्म के प्रति उनको अहोभाव पैदा होता है। वैसे वीतरागदेव की वाणी सुनने की सब की ताकत नहीं होती वे जीव कर्म से भारी है इसलिए उनको यह नहीं सुहाता। वीतराग वाणी सुनने वाले को आत्मिक सुख का अनुभव होता है।

संदीपमुनिजी ने अपने उद्बोधन में कहा कि जिनवाणी के आधार से उपदेश सुनाना और सुनना दोनों ही यदि आत्मलक्ष्य से हो तो जन्म मरण का चक्र समाप्त हो जाता है।जब तक मोक्ष नहीं है तब तक यह चक्र चलता ही रहता है। हेय अर्थात छोड़ने योग्य और ज्ञेय अर्थात जानने योग्य,उपादेय अर्थात ग्रहण करने योग्य।इनको समझ कर जीवन में उतारने से आत्म विकास होता है।जो जिस रूप में है उसको उसी रूप में मानना और तद्नुरूप ही जीवन में उतारना चाहिए यदि छोड़ने को ग्रहण कर लिया जाए और ग्रहण करने योग्य को छोड़ दिया जाए तो और अविधि हो जाएगी और आत्म लक्ष्य छूट जाएगा।
विदुषी पूज्या धैर्यप्रभाजी म.सा. आदि ठाना का भी श्रीसंघ को सान्निध्य प्राप्त हुआ।संचालन मनीष नाहटा ने किया।

आगामी वर्षावास हेतु विनती की गई

मेघनगर में किसी भी संत सती  के आगामी वर्षावास के लिए श्रीसंघ की ओर से प्रवर्तकश्री को विनती की गई साथ ही कल्याणपुरा होली चातुर्मास के पश्चात  अणु स्मृति दिवस पर प्रवर्तकश्री को सानिध्य प्रदान करने हेतु भी विनती की गई
इस अवसर पर कई आराधकों ने एकासन और उपवास के प्रत्याख्यान लिए। आतिथ्य सत्कार का लाभ जिनेंद्रकुमार बाफना ने लिया तथा प्रभावना स्व. कंचनबाई मोतीलाल भंडारी परिवार की ओर से वितरित की गई।स्व.सुजानमल बाफना की पुण्य स्मृति में अणु सौभाग्य पाठशाला एवं जीवदया मंडल को दानराशि भी प्रदान की गई।

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