वरिष्ठ साहित्यकार एमएल फुलपगारे के द्वितीय काव्य संग्रह ‘‘सप्तरंगी रसधारा’’ का हुआ विमोचन | Varishth sahityakar ml foolpagare ke dvitiy kavy sangrah saptrangi rasdhara ka hua vimochan

वरिष्ठ साहित्यकार एमएल फुलपगारे के द्वितीय काव्य संग्रह ‘‘सप्तरंगी रसधारा’’ का हुआ विमोचन

साहित्यकारों एवं कवियों ने अपनी रचनाओं से बांधा समां

वरिष्ठ साहित्यकार एमएल फुलपगारे के द्वितीय काव्य संग्रह ‘‘सप्तरंगी रसधारा’’ का हुआ विमोचन

झाबुआ (अली असगर बोहरा) - जिला आजाद साहित्य परिषद् के तत्वावधान में वरिष्ठ साहित्यकार एमएल फुलपगारे ‘गुलशन’ के द्वितीय काव्य संग्रह ‘‘सप्तरंगी रसधारा’’ कृति का विमोचन समारोह संपन्न हुआ। समारोह परिषद् के जिला सचिव शरत शास्त्री के निवास पर रखा गया। विमोचन अवसर पर उपस्थित जिले के साहित्यकारगणों एवं कवियों ने अपनी-अपनी काव्य रचनाओं का पाठ भी किया। 

परिषद् जिलाध्यक्ष डाॅ. केके त्रिवेदी ने स्वागत उद्बोधन देते हुए साहित्य की समृद्धता एवं परपंरा पर प्रकाश डाला। दीप प्रज्जवलन के साथ प्रकाष त्रिवेदी ने वंदना प्रस्तुत की। वरिष्ठ साहित्यकार यषवंत भंडारी ‘यष’ ने व्यक्ति सदा शब्दों पर कायम रहता है, बताया। काव्य संग्रह की समीक्षा प्रवीण सोनी ने की। पश्चात् सभी ने मिलकर पुस्तक का विमोचन किया। इस अवसर पर कु. भूमिका डोषी एवं तुषार राठौर का अभिनंदन प्रतीक चिन्ह देकर किया गया। रचनाओं और काव्य पाठ से बांधा समां

इस अवसर पर पं. गणेषप्रसाद उपाध्याय ने वीर रस, डाॅ. गीता दुबे ने आध्यात्म, निसार पठान एवं प्रदीप अरोरा ने वीर रस, लोकेन्द्रसिंह चैहान ने राष्ट्रीय, भेरूसिंह चैहान ‘तरंग’ ने हास्य रस, अरविन्द व्यास ने गीत, श्रीमती अर्चना राठौर ने श्रृंगार रस, भूमिका डोषी ने राष्ट्रीय, तुषार राठौर ने भक्ति रस, सुषीमकुमार जायसवाल ने आध्यात्म एवं शरत शास्त्री ने देषभक्ति, प्रवीण सोनी ने श्रृंगार रस पर अपना काव्य पाठ एवं रचना प्रस्तुत की। 
यह रहे उपस्थित

समारोह करीब एक घंटे तक चला। इस अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार सुरेष समीर, एजाज नाजी धारवी, गौरी कटारा, बाबुसिंह कटारा, कुलदीपसिंह पंवार, मप्र कर्मचारी कांग्रेस के जिलाध्यक्ष भेरूसिंह सोलंकी, शषि त्रिवेदी, रोटरेक्ट क्लब सचिव दौलत गोलानी, अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत के जिलाध्यक्ष अखिलेष बाल्यान, विनोद चैहान, हरिष यादव, आषीष डोषी आदि उपस्थित थे। संचालन पीडी रायपुरिया ने किया एवं अंत में आभार जयेन्द्र बैरागी ने माना।

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