जब बच्चों से पूछा की वाद्ययंत्र में क्या बजाते हो, अनभिज्ञ होकर बच्चे पूछने लगे यह क्या होता है | Jab bachcho se pucha ki waghyantr main kya bajate ho

जब बच्चों से पूछा की वाद्ययंत्र में क्या बजाते हो, अनभिज्ञ होकर बच्चे पूछने लगे यह क्या होता है

जब बच्चों से पूछा की वाद्ययंत्र में क्या बजाते हो, अनभिज्ञ होकर बच्चे पूछने लगे यह क्या होता है

धामनोद (मुकेश सोडानी) - परंपरा और संस्कृति के संरक्षण व संवर्धन को लेकर बातें भले ही तमाम होती हों, लेकिन इन बातों को धरातल पर उतारने की ठोस पहल शायद ही कभी की गई हो। नतीजा, युवा पीढ़ी और पढ़ने वाले बच्चे आज भी  संगीत की कला और परंपराओं से अनभिज्ञ है। परंपराओं से जुड़े पारंपरिक वाद्य यंत्रों से आज की पीढ़ी को जोड़ने के लिए सरकार ने पहल की लेकिन यह पहल कहीं से कहीं तक धरातल पर कारागार सिद्ध नहीं हो पाई नगर की शासकीय बालक प्राथमिक  विद्यालय  में यह सब यंत्र वर्षों से धूल की चपेट में लिप्त है लेकिन जवाबदारो ने  इनमें  कभी रुचि नहीं दिखाई दिलचस्प तथ्य यह है कि इन वाद्य यंत्रों को बजाने का जिम्मा भी बच्चों को ही दिया गया था लेकिन वर्षों से धूल खा रहे यह यंत्र अपनी अलग ही गाथा निर्जीव होकर गा रहे हैं

क्या है मामला कहां है जवाबदार

प्राप्त जानकारी के अनुसार शासकीय बालक प्राथमिक विद्यालय में सैकड़ों बच्चे पढ़ते हैं लेकिन कहीं से कहीं तक उन्हें वाद्य यंत्रों की  बजाने की शिक्षा नहीं दी जा रही जिससे शासकीय पैसे का तो दुरुपयोग हो ही रहा है साथ साथ जो जवाबदार समय-समय पर शिक्षा को उत्कृष्ट बनाने का दावा करते हैं वह धरातल पर विफल साबित हो रहा है क्योंकि हजारों रुपए बर्बाद करने के बाद भी वाद्य यंत्रों की अवस्था जस की तस है जबकि यदि शिक्षा का एक महत्वपूर्ण पहलू है

बच्चों से पूछा क्या तबला ढोलक बजाते हो तो बोले यह क्या होता है

अपर्याप्त जानकारी का खामियाजा पढ़ने वाले बच्चे भुगत रहे हैं नाम न छापने की शर्त पर स्कूल में ही पढ़ने वाले बच्चों से जब बाहर पूछा गया कि स्कूल में शिक्षा के साथ-साथ संगीत की शिक्षा भी दी जाती है क्या तुम ढोलक तबला और वाद्य यंत्र बजाते हो तो कुछ बच्चों ने तो यहां तक कह डाला कि यह सब क्या होता है हमें आज तक किसी ने इसके बारे में जानकारी दी ही नहीं इसके बारे में बताया क्या शासकीय स्कूल में यह सब भी होता है

शिक्षा का अंग  है संगीत 

बच्चों को संगीत की निशुल्क शिक्षा देने के लिए सरकार ने कवायद तो शुरू की जिसमे  बच्चों को ढोलक, तबला व हारमोनियम की सुविधा मिली। लेकिन तमाम कोशिशों के बाद भी शासकीय स्कूलों में यह सब सुविधा बच्चों को मुहैया नहीं हो पा रही जबकि नगर की निजी स्कूल स्कूलों में इस पर पुरजोर देकर कार्य किया जा रहा है कहीं ना कहीं अनदेखी के कारण लोग निजी स्कूलों का रुख करते हैं तथा सरकारी स्कूले अपेक्षा का शिकार हो रही है ऐसे कई तमाम और भी तथ्य है जो बच्चों तक नहीं पहुंच पा रहे अनिवार्य शिक्षा के नाम पर सिर्फ लीपापोती का कार्य किया जा रहा है

स्कूल में संगीत शिक्षक की नियुक्ति

बताया गया कि उपरोक्त स्कूल में  संगीत शिक्षक की नियुक्ति भी है उपरोक्त मामलों में स्कूल के जवाब दारो ने बताया कि विगत कई माह से वाद्य यंत्र खराब अवस्था में है ऐसा कोई फंड भी नहीं जिनसे इनका दुरस्त करने  का कार्य हो सके इसी कारण पिछले कई महीनों से वाद्ययंत्र जीर्ण शीर्ण अवस्था में है गौरतलब है कि उपरोक्त स्कूल में कक्षा 1 से लेकर 5 तक के बच्चों को संगीत सिखाया जाना चाहिए था जो अभी फिलहाल में नहीं हो पा रहा है

संगीत जीवन का अहम पहलू है यदि स्कूल में वाद्य यंत्र खराब है तो जवाब दारो को अवगत कराया जाएगा

ओमेंद्र सिंह चौहान 
बीआरसी धरमपुरी

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