सपेरों में खोफ अब टोकरी में नहीं दिख रहे नागराज
धामनोद (मुकेश सोडानी) - पिछले सालों की तरह इस साल शहर में हर कहीं टोकरी में सांप लेकर सपेरे घुमते हुए दिखाई नहीं दे रहे हैं। वजह इन सपेरों की धरपकड़ के लिए वन अमला शहर में चौकसी कर रहा है। वन विभाग का अमला अब इनकी धरपकड़ के लिए सक्रिय हैं।
लोगों को गुमराह भी कर रहे है
कुछ शातिर सपेरे शहर में घुमकर लोगों को बेवकूफ भी बना रहे हैं। कुछ ने टोकरी के अंदर सांप की जगह मूर्ति रखकर गुमराह कर रहे हैं नगर में एक टोकरी में घूमते हुए युवक को जब रोका और देखा तो सभी चोक गए जब टोकरी में सात की जगह भगवान की मूरत थी हालांकि। कुछ सपेरे शहर में चोरी छिपे कुछ गलियों और कॉलोनियों में ही लोगों को सांप के दर्शन करवाकर जैसे-तैसे निकलने की सोच रहे हैं।
हर गली और बाजार में होते थे सपेरे
पिछले सालों में हर गली और मोहल्ले में सपेरों की संख्या आसानी से देखी जा सकती थी। बाजारों में भी दुकानों पर तो वहां रहने वाले परिवारों के सामने सांपों को दूध पिलाने की बात कहकर राशि ऐंठते रहते थे। पिछले कुछ महीनों से विभाग ने जब से सख्ती की है तब से सपेरों का शहर में आना बंद हो गया है। अलबत्ता ग्रामीण अंचल में आज भी ये सपेरे बेखौफ टोकरियों में सांप लेकर घुम रहे हैं। इन्हें रोकने वाला कोई नहीं है।
लगातार कर रहे हैं चौकसी
वन विभाग के अधिकारी धर्मेंद्र राठौर ने बताया कि शहर में सपेरों को देखते ही हमें उन्हें पकडऩे के निर्देश है। लगातार शहर में भ्रमण करके इन्हें कई बार ढूंढा भी गया है। जहां-कहीं से भी सपेरे होने की सूचना मिलती है तो हम उन्हें पकड़ेंगे। सांपों को कैद करके रखना वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के खिलाफ है। कोई भी इन्हें कैद करके नहीं रख सकता है। नगर में सपेरे के होने की जानकारी मिली थी किंतु उनकी टोकरी में भगवान की मूर्ति मिली
आस्था के पीछे अत्याचार
सपेरों द्वारा धर्म के नाम पर किया जाने वाला अत्याचार भी नागों की दुर्दशा की वजह है। सर्प को बंदी बनाकर घरघर जाकर बीन बजाकर दर्शन कराने के पीछे नागों पर कई तरह के अत्याचार किए जाते है। दांत तोड़ने से होने वाले संक्रमण तथा घावों से कई बार सांपों की असमय मौत हो जाती है।
Tags
dhar-nimad
