जिस मां का बेटा राम जैसा है वह मां जरुर कौशल्या जैसी रही होगी - विश्वदीप मिश्र | Jis maa ka beta raam jesa hai vah maa jarur koshalya jesi rhi hogi

जिस मां का बेटा राम जैसा है वह मां जरुर कौशल्या जैसी रही होगी - विश्वदीप मिश्र

ब्रह्मलीन देवकुंवर शर्मा की पुण्यतिथि पर गीत-संगीत के साथ काव्य गोष्ठी

जिस मां का बेटा राम जैसा है वह मां जरुर कौशल्या जैसी रही होगी - विश्वदीप मिश्र

मनावर (पवन प्रजापत) - क्षेत्र के साहित्यकार कवि राम शर्मा परिंदा की माताजी ब्रह्मलीन देवकुंवर शर्मा की प्रथम पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित संगीत मय काव्य गोष्ठी में काव्यपाठ और संगीत की जुगलबंदी का आयोजन कर माताजी को श्रद्धांजलि अर्पित की गई । अतिथियों द्वारा मां सरस्वती और माताजी के चित्र पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम की शुरूआत की । कार्यक्रम में शामिल मुख्य अतिथि इंजिनियर बी डी शर्मा ने कहा कि श्रेष्ठ संस्कारों से ही श्रेष्ठ पीढ़ी पैदा होती है और आज के भौतिक युग में श्रेष्ठ संस्कारों की नितांत आवश्यकता है । विशेष अतिथि बीआरसीसी अजय मुवेल ने अपने उद्बोधन में कहा कि माता पिता का बच्चों के संपूर्ण विकास में अहम योगदान रहता है अतः समय समय पर उनका यशगान कर उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त की जानी चाहिए । कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे साहित्यकार गोविंद सेन ने कहा कि पढ़ने की आदत ही साहित्य को जिंदा रखती है । श्री सेन ने सम-सामयिक निमाड़ी रचना सुनाकर ठंड में ठिठुरते किसानों की वेदना को व्यक्त किया । साहित्यकार संजय वर्मा दृष्टि ने मां शब्द की महत्ता बताते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि गाय जब अपने बछड़े से मिलकर रंभाती है उन्हीं शब्दों से मां शब्द की उत्पत्ति हुई है । स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर साहित्यकार विश्वदीप मिश्र ने माताजी के प्रति कृतज्ञता जाहिर करते हुए कहा कि हालांकि मैं कभी माताजी से मिला नहीं पर इतना जरूर कह सकता हूं कि जिस मां का पुत्र राम जैसा है वह मां जरुर कौशल्या जैसी रही होगी । वर्तमान परिपेक्ष्य हाइकु सुनाकर उन्होंने सदन को जीवंत कर दिया । कवि सतीश कुमार ने निमाड़ की महत्ता दर्शाते हुए कहा कि गो माता ने बछड़े को चूमा तो याद आई लाड़ की , मैं चाहे जहां भी रहूं यादे सदा साथ रहती है निमाड़ की । कवि और शायर कुलदीप पंड्या ने वर्तमान भटकती युवा पीढ़ी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि मुल्क में रहने के लिए मुल्क जलाने निकले हैं , और वे अपने ही है जो युवाओं को बरगलाने निकले हैं । कवियित्री रोशनी पिपलोदिया ने बेटी पर मुक्तक सुनाकर माहौल को गमगीन कर दिया । हास्यकवि हितेंद्र सिंह चौहान बंटी बम ने हास्य चुटकियों से माहौल को पुनः रंगीन किया । वीर रस के कवि युवा कवि पंकज राठौर ने भारत के सैनिकों को अपनी कविताओं में याद किया । साहित्यकार कवि राम शर्मा परिंदा ने अपनी माताजी को याद करते हुए कविता के माध्यम से कहा कि कोशिशें बहुत की पर भुलाया नहीं गया , हे ! मां अपने घर से तेरा साया नहीं गया । कार्यक्रम में स्थानीय गायकों ने सुमधुर गीत भी पेश किए जिसमें सर्वप्रथम अथर्व पंड्या ने मैं हूं झूम झूम झूमरु गीत अपनी मधुर आवाज में पेश कर किशोर दा की याद दिला दी । कार्यक्रम संयोजक राजा पाठक ने मधुर वाणी में तू मेरा है सनम तू ही मेरा हमदम सुनाकर माहौल को आशिकाना किया । दिव्या पंड्या ने माहौल को देखते हुए फंजा भी है जवां जवां हवा भी है रवा रवा सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया । अपनी चिर-परिचित शैली में हेमराज पिपलाद ने चंदन सा बदन चंचल चितवन गीत सुनाया । प्रफुल्ल सोनी ने आ के तेरी बाहों में हर शाम लगे सिंदूरी गीत सुनाकर सभी का मन मोह लिया । गायक गणेश शिंदे ने मधुर आवाज और लय के साथ तुम मिले दिल खिले और जीने को क्या चाहिए सुनाया । तूने ओ रंगीले कैसा जादू किया पिया पिया बोले मतवाला जिया अपने समय का यह प्रसिद्ध गीत नन्हीं सी गायिका अनीता राठौर ने बहुत ही मीठी वाणी में सुनाकर महफ़िल को मंत्रमुग्ध कर दिया । अपनी अनूठी आवाज और अदाओं से पहचाने जाने वाले गायक सुखदेव राठौर ने वक्त का ये परिंदा रुका है कहां गीत सुनाकर माहौल को जीवंत कर दिया । एक और नन्हीं सी गायिका आहूति राठौर ने पंछी स्वर में गाते हैं भंवरे गुनगुनाते हैं गीत सुनाया । कार्यक्रम में समस्त कवियों और गायकों को स्मृति चिन्ह कैलाश शर्मा , लक्ष्मी शर्मा , आलोक शर्मा , सुनीता शर्मा , विकास शर्मा , तुकाराम पाटीदार , शंकर गेहलोत , शंकरलाल काग , भवानी शंकर शर्मा , आशिष शर्मा , सुखदेव पाटीदार , प्रकाश वर्मा , भारत शिंदे ने भेंट किए । कार्यक्रम का सफल संचालन मुकेश मेहता ने किया और आभार डॉ कविता शर्मा ने व्यक्त किया ।

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