गौतमपुरा मैं परंपरागत खूनी खेल हिंगोट युद्ध
देपालपुर/गौतमपुरा (दीपक सेन) - बात करते हैं देपालपुर के गौतमपुरा कि जहां खूनी खेल हुआ भगवान देवनारायण मंदिर के पास योद्धा आपस में जमकर भिड़े दोनों और से अग्निबाण फेंकने का सिलसिला बहुत देर तक चला पारंपरिक हिंगोट युद्ध में 10 लोग जख्मी हुए जिन्हें इलाज के लिए सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया आपको बता दें कि इस युद्ध में योद्धा पेड़ से इंगोरिया नामक फल तोड़ कर लाते हैं और उसका गूदा निकालकर उसमें बारूद भरकर हिंगोट नाम का अग्निबाण तैयार करते हैं इस परंपरागत युद्ध में ना किसी की हार होती है और ना ही किसी की जीत बस यह युद्ध भाईचारे का युद्ध होता है तुर्रा और कलंगी नाम के दो दल अपने पूर्वजों की इस पारंपरिक धरोहर को जीवित रखने का प्रयास करते हैं पूरे देश सदियों से चली आ रही है सिर्फ गौतमपुरा में ही देखने को मिलती हैं
हिंगोट युद्ध के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए, थ्री लेयर में बेरीकेटिंग कराई गई, 8 फिट ऊंची बेरीकेटिंग लगाई गई, पिछले साल के मुकाबले ढाई गुना लगाया गया पुलिस बल, एंबुलेस की संख्या और फायर ब्रिगेड की बढाई संख्या, पहली बार इंदौर से बुलाया गया वज्र वाहन,एसडीओपी राजकुमार राय ने कहा आम आदमी कोई घायल न हो ये पुलिस प्रशासन की प्राथमिकता है
वर्षों पुरानी है परंपरा देपालपुर के गौतमपुरा में हर साल दिवाली के दूसरे दिन अग्नि युद्ध यानी हिंगोट युद्ध होता है। गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि ये बताना मुश्किल है कि यह परंपरा कब से शुरू हुई। लोग कहते हैं कि इसका चलन मुगलों के शासन के दौरान यानी लगभग दो सौ साल पहले हुआ था। तब से अब तक यह परंपरा इसी तरह चली आ रही है।