तारखेडी में स्थित वन विभाग के वन परिक्षेत्र आवासीय भवन काफी वर्ष से बंद पडे हैं, इस ओर कोई जवाबदार का ध्यान आकर्षित नही
पेटलावद (मनीष कुमट) - पेटलावद तहसील क्षेत्र के बोलासा, तारखेडी ग्राम में स्थित वन विभाग के वन परिक्षेत्र आवासीय भवन काफी वर्ष से बंद पडे हैं। ये भवन और दीवारें इतने जर्जर हो जायेंगे कि आने वाले वर्षों में खंडरो में तब्दील हो सकते हैं। हैरत की बात यह है कि अधिकारी इतने संवेदनहीन कैसे हो गए हैं कि वन प्राणियों की सुरक्षा के लिए वन परिक्षेत्र आवास बनाये जाते हैं ताकि हर समय उनको सम्पूर्ण सुरक्षा मिल सके क्षेत्र के जंगल में बारिश के समय खरमोर, मोर भी दिखाई दिये थे। वन क्षेत्र अधिक होने के कारण यहां जंगल में सागोंन,बांस के व्रक्षो कि संख्या काफ़ी है द्वारा लाखों की लागत से तीन भवन को बनवाये गये थे आसपास तार फेसिंग करवाई गई,समय पर भवनों कि देख रेख नहीं होती है अभी वहाँ पर आवारा कुत्तों ने भवनों पर जमाडा लगाकर बैठे रहते हैं रास्ते से गुजरने वाले ग्रामीणों को कुत्तों का काटने का भय बना रहता, गाय,भैंस को कई बार काट चुकें हैं अधिकारियों की संवेदनहीनता का ही परिणाम रहा कि यहां वन परिक्षेत्र अधिकारी निवास नहीं कर रहे हैं इस वन परिक्षेत्र सबसे अधिक संख्या नील गाय, लकडभ्गा, खरगोश जंगली जानवर हैं इनकी सुरक्षा के लिए यहां कोई वन अधिकार निवास नहीं कर रहे हैं शासन की योजना है जंगलों में जानवरों की संख्या बड़े ओर वे सुरक्षित रहे। विभाग द्वारा वन सुरक्षा समिति गठित की गई थी। परंतु आज तक कभी बैठके नहीं हुई। एक ओर पर्यावरण संरक्षण के लिए सरकार से लेकर निजी संगठनों द्वारा पौधरोपण पर बल दिया जाता है लेकिन वन विभाग को संरक्षित एवं सुदृढ़ करने का प्रयास नहीं कर रहा है। आज भी जंगल क्षेत्रों में पौधरोपण के लिए पौधों की आवश्यकता है
जवाबदार का कहना है -
नये दो फोरेस्ट गार्ड आ गये। अभी वह रायपुरिया रह रहे एक दौ सप्ताह में वन परिक्षेत्र आवास भवन तारखेडी में निवास हो जाएंगे।
जुलियस पीपला
वन विभाग अधिकारी पेटलावद
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