पिछले दिनों हुई भारी बारिश के चलते खेतों में पानी भरने के कारण अधिकांश फसलों को काफी नुकसान
पेटलावद (मनीष कुमट) - बोलासा पिछले दिनों हुई भारी बारिश के चलते खेतों में पानी भरने के कारण अधिकांश फसलों को काफी नुकसान हुआ है। एक एकड़ में इसका खर्च 23 से 25 हजार के लगभग है, लेकिन फसल बर्बाद होने से आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ेगा, क्षेत्र में कहीं-कहीं बारिश और चली तेज हवा के कारण सोयाबीन, कपास सहित मक्का की फसलें झुक गये हैं । कृषि विभाग के अधिकारी लगातार किसानो को सलाह दे रहे हैं कि जो बची फसल है, उसे बचाने के लिए जुट जाएं। किसानों ने बताया कि अतिवर्षा से सोयाबीन की फसल तो पहले ही नष्ट हो गई थी, लेकिन मक्का की फसल से जो थोड़ी बहुत आस थी वह तेज हवाओं के चलने से मक्का के पौधे खेत में टूटकर जमीन में बिछ जाने से वह भी नहीं रही। किसानों का काफी नुकसान हुआ है।
जानकारी के मुताबिक खरीफ की फसलों में सोयाबीन, मक्का, कपास, आदि फसले पूर्व से ही खराब हो चुकी है, वहीं लगातार हो रही बारिश से अन्य फसलों सहित सब्जियों को भी नुकसान हो चुका है। फसलों में किसानों को लागत तो दूर बीज वापस होने की उम्मीद भी नहीं है। किसानो ने बताया कि क्षेत्र में इस वर्ष सभ प्रकार की खरीफ फसलें बहुत अच्छी बनी हुई थी, लेकिन भारी बारिश से फसलों को काफी नुकसान हुआ है। कुछ किसानों की तो धान की फसल भी पूरी तरह से डूब में आने से खराब हो गई है।
वहीं दूसरी ओर कृषि विभाग के अधिकारी लगातार किसानों को खेत में बची फसलों को बचाने की सलाह दे रहे है। कृषि विस्तार अधिकारी एलसी खपेड़ ने बताया यदि खेतों में जलभराव की समस्या है तो बिना देरी किए जल निकासी का इंतजाम कर ले। पानी को खेत में अधिक समय तक भरा न रहने दे। खेतों में जरूरत से ज्यादा नमीं हो जाने से पौधे पौषक तत्व नहीं ले पाते। इससे पत्ते पीले पड़ने लगते है। हाल फिलहाल किसान जो बची फसले है, जिनमें पत्ते पीले पड़ रहे हो, उनमें पोटाश के घोल का छिड़काव करें।
कृषि विस्तार अधिकारी (पेटलावद) खपेड़ ने बताया अब तक सिर्फ अफलन से खराब हुई फसल के कारण किसानों को बीमा क्लेम मिलने में दुविधा थी। लगातार बारिश के कारण अगर किसानो की 25 प्र्रतिशत से अधिक फसले खराब हुई है तो वह क्लेम के पात्र रहेंगे। फसलो के खराब होने की वजह से पूरा नुकसान का मुख्य कारण अतिवृष्टि ही माना जाएगा। बीमा कंपनी के नियमानुसार अतिवृष्टि से नुकसान होने पर क्लेम का प्रावधान भी है। ऐसे में फसल बीमा कराने वाले किसान अब बीमा लेने के पूरे हकदार हो गए है।
तीन सालों से किसान लगातार घाटे में जा रहा है। हर साल हाईब्रिड टमाटर की फसल धोखा दे जाती है। इस बार मानसून सही समय से आया, लेकिन टमाटर के पौधे रोपने और कीटनाशक का छिड़काव होने के बाद फसल के अनुकूल बारिश होती रही। इसे देखकर यह लगता था कि इस बार किसान पिछले वर्षों में हुए नुकसान की पूर्ति कर लेगा। सब अनुकूल चल रहा था, लेकिन पिछले एक महीने से लगातार शुरू हुई बारिश ने रुकने का नाम ही नहीं लिया।
लगातार हो रही बारिश से खेत जलमग्न हो गए है। इसका असर टमाटर की फसल पर साफ देखा जा सकता है। टमाटर के पौधे पर से फूल गिरने लगे हैं। इससे किसानों की मुसीबत और बढ़ गई है। क्षेत्र में सबसे ज्यादा टमाटर की फसल को नुकसान हो रहा है। लगातार बारिश से टमाटर की फसल को नुकसान हुआ है। आसपास के क्षेत्र में बोलासा, पिठडी, आबापाडा, बखतपुरा, तारखेडी, गरवाखेडी, मोहकपुरा, कुम्भाखेडी, सेमरोड, बीजोरी, में बारिश के कारण फल नहीं लगे हैं, इसलिए उनके हाथ रुक गए हैं। पिछले एक माह से लगातार बारिश ने क्षेत्र के किसानों के सपनो पर पानी फेर दिया है। कुछ दिन पहले हाईब्रिड टमाटर का बंपर उत्पादन देने वाले उन्नात किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ दिख रही है। उन्नात किसानों का कहना है कि 15 सितंबर तक टमाटर का उत्पादन प्रारंभ हो जाता था, लेकिन बारिश ने एक माह ओर टमाटर की लालिमा को देखने के लिए इंतजार करने पर मजबूर कर दिया है। लगातार बारिश के कारण फूल गिर रहे हैं और टमाटर की हाईट भी ज्यादा हो गई है। इस कारण उत्पादन पर खासा प्रभाव पड़ने की उम्मीद है।
झड़ी ने सपनों पर पानी फेरा
बोलासा के उन्नात कृषक मनोहर पाटीदार ने बताया कि एक माह पहले टमाटर को देखकर किसानों के चेहरे पर जो खुशी नजर आ रही थी। इस माह में बारिश की झड़ी ने उन खुशियों पर पानी फेर दिया है। बारिश की झड़ी के कारण टमाटर के फूल गिर गए हैं। नए फूल आने के एक माह बाद टमाटर लगना प्रारंभ होंगे। तब तक किसानों को दवाई खाद का अतिरिक्त भार झेलना पड़ेगा।
गरवाखेडी के किसान भंवरलाल भिलोतिया के अनुसार बारिश के कारण फूल गिर गए हैं। अगर बारिश नहीं होती तो टमाटर का उत्पादन प्रारंभ हो जाता। शुरुआत में टमाटर के भाव भी अच्छे मिल जाते और किसानों के हाथ भी चालू हो जाते। बारिश ने किसानों के मुंह में आया निवाला छीन लिया।
क्षेत्रिय क्रषि विस्तार अधिकारी विजय सिगांड
सोयाबीन : खेतों में पानी भरने से अधिक नुकसान सोयाबीन को हुआ है। सोयाबीन पूरी तरह बर्बाद हो गई है, और जो बची है उसमें कीड़े लगने का खतरा है। पत्ते पीले पड़ गए हैं। उल्लैखनीय है कि इस बार पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 9 हजार हेक्टेयर में सोयाबीन की बुआई हुई थी, जिसमें से 56 प्रतिशत सोयाबीन पूरी तरह गल चुकी है।
सेमरोड अम्मबालाल मेहता मक्का : फसल में इल्लियां लग गई है। मौजूदा समय में फलों (भुट्टे आ गए हैं) को इल्लियां चट रही है। इल्लियां आने के कारण फल खोखला हो गया है। इस वर्ष लगभग 5 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि पर मक्का की बोवनी हुई थी।
सब्जी : मूसलाधार बारिश का तत्काल असर सब्जियों पर देखने को मिलता है। यह नाजुक होने के कारण इसके फल बारिश की वजह से गिर गए है। पानी भरने से सड़न का खतरा बना है। मिर्ची की फसल पूरी तरह सड़ गई है और पत्ते और मिर्चियां नीचे गिर गई है।
आबापाडा किसान बाबु निनामा कपास : पौधा खाली है। ज्यादा बारिश होने से सड की स्थिति निर्मित हो रही है। जहां गर्मी या इसके बाद कपास लगाई है, वहां पर डेंडू नहीं लग रहे हैं। पौधा सडे लगी है।
धान : बारिश को धान की फसल के लिए अमृत माना जाता है लेकिन अब उस पर खतरा मंडराने लगा है। ज्यादा बारिश होने से फसल में बीमारियों का अटैक आ गया है।
तारखेडी के उन्नात किसान किसन साजोदिया का कहना था कि एक जुलाई को टमाटर के रोप लगा देते हैं। पौधे की हाइट साढ़े तीन फीट की होती है, तब उसमें फ्लावरिंग प्रारंभ हो जाती है। पंद्रह सितंबर तक फल लगना प्रारंभ हो जाते है। लगातार बारिश के कारण फूल गिर रहे हैं, जिसके कारण फल नहीं आ रहा है और हाईट भी तीन फीट के करीब हो गई है। इससे टमाटर के पौधे की उम्र भी कम हो रही है।
बारिश के कारण बीमारी जड़ों में पहुंची
जानकारी व किसान मित्र आनंदीलाल मंगरोलिया ने बताया कि लगातार बारिश से खेतों में जल भराव जैसी स्थिति बनी हुई है। इससे जड़ों में बीमारी लगना प्रारंभ हो गई है। बीमारी के लक्षण का पता नीचे के पत्तों से मालूम होता है। पत्ते पीले पड़ने लगते हैं और फूल झड़ने लगते है। इस बीमारी से बचने के लिए किसानों को महंगे कीटनाशक का प्रयोग करना पड़ेगा।
कपास पोधे खड़े खड़े- सुख रहे हैं
दागी हो गए टमाटर
कुम्भाखेडी के किसान आयदन चांदगाया ने बताया कि जिन किसानों के टमाटर प्रारंभ हो गए हैं। बारिश से क्वालिटी में नहीं निकल पा रहे हैं। टमाटर में दाग हो गए। इतना ही नहीं, बाजार में आवक कम होने के बाद भी सही दाम नहीं मिल पा रहे हैं। अभी टमाटर का जो उत्पादन निकल रहा है, उनमें दाग ओर स्करेज वाले हो रहे हैं। वहीं हरे होने के बाद काले भी पड़ रहे हैं।
पिठडी के प्रकाश पाटीदार के मुताबिक पिछले एक माह से लगातार ओर जोरदार बारिश का हाईब्रिड फसल टमाटर पर विशेष प्रभाव पड़ा है। जिन उन्नात किसानों ने पुराने पानी से टमाटर लगाए थे, उन किसानों का उत्पादन 15 सितंबर से प्रारंभ हो जाता है। बारिश से टमाटर की ग्रोथ बड़ी है, लेकिन टमाटर के फूल गिर गए हैं। नए फूल आएंगे एक महीना लगेगा टमाटर उत्पादन में। ऐसे में किसानों को खाद कीटनाशक दवाई का छिड़काव का अतिरिक्त भार पड़ेगा।
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