जो मां-बाप को निवृत्ति दिलाएं, यात्रा करवाएं, सेवा करवाएं एवं बुढ़ापे में पाले और आज्ञा माने वह सुपुत्र कहलाता है - प्रन्यास प्रवर जिनेन्द्र विजयजी मसा
झाबुआ (मनीष कुमट) - जैन तीर्थ श्री ऋ़षभदेव बावन जिनालय में 25 सितंबर, मंगलवार को सुबह 9 बजे से धर्मसभा में समाजजनों को प्रवचन देते हुए प्रन्यास प्रवर जिनेन्द्र विजयजी मसा ने कहा कि सुपुत्र होने के पांच लक्षण होते है, जो मां-बाप को निवृत्ति दिलाएं, यात्रा करवाएं, सेवा करवाएं एवं बुढ़ापे में पाले और आज्ञा माने।
मंगलवार को प्रन्यास प्रवर ने अपने प्रवचन में बच्चों को विषेष रूप से संस्कारित बनाने के लिए महापुरूषों के जीवन पर आधारित कहानियों और उनके जीवन चरित्र को सुनाने के लिए कहा। उन्होंने स्थूली भद्र एवं श्रीयक के दृष्टांत से अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि स्थूली भ्रद ने राग के रंग के रूप के वातावरण में रहकर भी संयम धर्म का एवं चरित्र धर्म का पालन किया। ठीक उसी प्रकार हमे भी अपने कर्तव्य पंथ से नहीं ढिगना चाहिए। पूर्व में संस्कार और अभ्यास से की गई क्रिया इस जन्म में परिणाम दे सकती है, परन्तु धर्म शासन और चरित्र का पालन मनुष्य को पुण्य अनुबंध एवं पुण्य के भाव से प्राप्त होता है।
गुरू देवेन्द विजयजी की मांगलिक श्रवण करवाई
मंगलवार को अष्ट प्रभावक नरेन्द्र सूरीजी ने विषेष रूप से आगम ज्ञाता गुरूदेव श्री देवेन्द्र विजयजी मसा के जीवन परिचय और उनके जीवन की महामांगलिक सुनाई एवं कहा कि नैतिक जीवन, पारमार्थिक जीवन एवं आध्यात्मिक जीवन गुरूदेव देवेन्द्र विजयजी मसा का था। उन्होंने अल्प आयु में गुरू का दिल जीता। समाज में अनेक प्रकार की कुरूतियों को समाप्त करके अनेक धर्म की आराधना, उपधान, अंजन श्लाका और चातुर्मास करके अपने जीवन को धन्य बनाया। समाज को भी आगे बढ़ाने में विषेष सहयोग प्रदान किया। मंगलवार को धर्मसभा में विषेष रूप से पेटलावद श्री संघ एवं लिमड़ी श्री संघ के सदस्यो ने पधारकर अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई। जिनका श्री नवल स्वर्ण जयंती चातुर्मास समिति ने आभार माना।
Tags
jhabua
