झाबुआ विधानसभा उपचुनाव में मतदाता इस बार चुनेंगे मंत्री या सिर्फ विधायक...?
झाबुआ (अली असगर बोहरा) - विधानसभा उपचुनाव को लेकर तारीखों का एलान होते ही झाबुआ-अलीरजापुर जिले में आचार संहिता लागू हो चुकी है। इस तरह से 23 से 30 सितंबर तक झाबुआ विधानसभा (193) उपचुनाव के लिए नामांकन भरने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और सोमवार को पूर्व सांसद एवं केंद्रीय मंत्री कांतिलाल भूरिया ने नगर पालिका से नोड्यूज प्रमाण पत्र ले लिया तो वहीं जेवियर मेड़ा ने भी नो-ड्यूज सर्टिफिकेट लेकर सभी को चौंकाया जरूर है। वहीं आज पूर्व राणापुर के नगर परिषद अध्यक्ष कैलाश डामोर भी नामांकन के लिए तैयार है। इसी के साथ हाल फिलहाल श्राद्ध पक्ष चल रहा है जो कि 28 तारीख को खत्म होगा, और श्राद्ध पक्ष में हिंदू मान्यता अनुसार कोई भी कार्य नहीं किया जाता है। इसलिए श्राद्ध पक्ष 28 को पूर्ण होते ही 29 एवं 30 तारीख तक भाजपा कांग्रेस के विधायक पद के दावेदार फार्म भरेंगे और 30 तारीख स्थिति क्लीयर हो जाएगी। अब यानी जिले की राजनीतिक सियासतदारों व गलियारों में उपचुनाव को लेकर अंकगणित चालू हो चुका है यानी भाजपा-कांग्रेस के राजनैतिक पंडित माथापच्ची में लग गए हैं। क्योंकि कांग्रेस यह उपचुनाव जीतती है तो वह प्रदेश में अपने एक विधायक में इजाफा सरकार बनाने पूर्ण बहुमत में होगी तो वहीं भाजपा अगर यह चुनाव जीत जाती है तो वह कांग्रेस को परेशानी में डाल सकती है। अलबत्ता मुख्यमंत्री कमलनाथ व उनका पूरी टीम चाहेगी कि वह उपचुनाव जीतकर कांग्रेस को मध्यप्रदेश में सशक्त बनाए। दूसरी ओर झाबुआ विधानसभा उपचुनाव को लेकर आम लोगों व चौराहों पर चर्चाओं होने लगी है। अब अगर विधानसभा के मतदाताओं की बात करें तो यहां के मतदाता कांग्रेस के पक्ष में दिखाई देते हैं। क्योंकि अभी तक हुए सभी चुनावों में कांग्रेस का पलड़ा भारी रहा हैं। अगर वर्ष 2018 का विधानसभा चुनाव पर नजर डाले तो चुनावी समीकरण व मतदाताओं की नब्ज आसानी से पता चल जाएगी, इस चुनाव में भाजपा के जीएस डामोर जीतकर विधायक बने थे, लेकिन वोटों के प्रतिशत की बात करे तो डॉ.विक्रांत भूरिया व कांग्रेस के बागी जेवियर मेड़ा जो कि उस समय 36 हजार के करीब वोट लाए थे वह कांग्रेस के ही वोट थे। यानी जीएस डामोर 10 हजार के ऊपर मतों से विजय रहे। वहीं फिलहाल मध्यप्रदेश में कांग्रेस की कमलनाथ सरकार है और प्रदेश सरकार के मंत्रियों ने यहां पर कई सभाएं घोषणाएं की है तथा जिलेवासियों के काम भी किए हैं। इस लिहाज से कांग्रेस अभी तो आगे हैं। वहीं मतदाताओं की बात करे तो वे अच्छी तरह से समझते हैं कि प्रदेश में कांग्रेस काबिज है और शासन-प्रशासन में कांग्रेस की चलेगी और झाबुआ विधानसभा का विकास कांग्रेस का विधायक कर सकता है। यानी की आगामी 21 अक्टूबर को झाबुआ विधानसभा क्षेत्र के मतदाता या तो अपना भविष्य का मंत्री चुनेंगे या फिर सिर्फ विधायक। यह तो भविष्य के गर्त में छिपा है जिसका राज 24 अक्टूबर को साफ हो जाएगा।
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