सीएम हेल्पलाइन में शिकायत की तब पुलिस ने लिखी रिपोर्ट | CM helpline main shikayat ki tab police ne

सीएम हेल्पलाइन में शिकायत की तब पुलिस ने लिखी रिपोर्ट

सीएम हेल्पलाइन में शिकायत की तब पुलिस ने लिखी रिपोर्ट

एक साल से टाल रही थी पुलिस नही की कार्यवाई

डिडौरी(पप्पू पड़वार) - पिछले एक वर्ष में मध्यप्रदेश पुसिस के खिलाफ लगभग 1 लाख से अधिक शिकायतें दर्ज की गई हैं। ज्यादातर शिकायतें एफआईआर दर्ज न करने को लेकर की गई हैं। लोग प्रताड़ित होने पर पुलिस के पास जात हैं पर जब पुलिस ही न सुने तो वो कहां जाएं। इसी को लेकर लोग सीएम हेल्पलाइन नंबर पर पुलिस के खिलाफ शिकायत दर्ज करा रहे हैं। सीएम हेल्पलाइन में शिकायतों का ग्राफ लगातार ऊंचा उठता जा रहा है।

इसका खुलासा सीएम हेल्पलाइन में दर्ज आंकड़ों से उभरकर सामने आया है। इनमें सर्वाधिक मामले एफआईआर नहीं लिखने के हैं। अत्याधिक शिकायतें ऐेसी आई हैं जिनमें बताया गया है कि पुलिस ने पीड़ित की शिकायत पर भी एफआईआर नहीं लिखी या फिर लिखने में देरी की। कुछ शिकायतें तो एफआईआर में सही धाराएं नहीं लगाने की भी है ।

सीएम हेल्पलाइन में शिकायत की तब पुलिस ने लिखी रिपोर्ट

नौकरी का लालच दे जमा कराई राशि, मानदेय का दिया गया था झांसा

गौरतलब है की डिण्डौरी जिला के समनापुर जनपद मुख्यालय में  प्राइवेट अस्पताल खोलकर दर्जनों बेरोजगारों को नौकरी का झांसा देने के नाम पर की गई ठगी के मामले में पुलिस ने शिकायत के एक वर्ष बाद आरोपितों पर मामला दर्ज किया है। समनापुर पुलिस द्वारा शिकायत के बाद कार्रवाई न करने पर पीड़ितों द्वारा इस मामले की शिकायत सितंबर 2019 को सीएम हेल्पलाइन में की गई थी। सीएम हेल्पलाइन में शिकायत के बाद पुलिस हरकत में आई और मां नर्मदा हेल्थ केयर सर्विस के संचालक विपुल सिंह बघेल निवासी सुभाष वार्ड मंडला और राहुल पांडे निवासी बस स्टैंड भुआ बिछिया जिला मंडला के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया है। बताया गया कि समनापुर थाना में पीड़ितों ने 21 अगस्त 2018 को शिकायत की थी, लेकिन आरोप लगाया गया कि उस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई थी।

इन्होंने दर्ज कराई थी शिकायत

शिकायतकर्ता विनोद कुमार उइके (38) पिता स्व. गणेश लाल उईके निवासी अंबिका चौक समनापुर, सतीश उद्दे, सतेंद्र पूषाम, अंगद सिंह मरावी, ममता खैरवार, ज्योति मानिकपुरी, मनीषा उइके मदन मोहन राय, दिनेश ठाकुर, विक्की खैरवार द्वारा सामूहिक आवेदन दिया गया था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि मां नर्मदा हेल्थ केयर संस्था मंडला के जिम्मेदारों द्वारा क्षेत्रीय लोगों के साथ ठगी कर रातों रात भाग गए। पुलिस ने बताया कि इस मामले में विनोद उइके, मनीषा उइके, शत्रुहन सोनवानी, लोकेश खैरवार, मदन मोहन व अनावेदक राहुल पांडे से पूछताछ की गई। जांच में सामने आया कि एक नवंबर 2017 को समनापुर में अस्पताल मां नर्मदा हेल्थ केयर संस्था संचालित थी। संस्था के संचालक विपुल बघेल व राहुल पांडे थे।

भर्ती के नाम पर वसूली गई थी राशि

संस्था संचालन के लिए स्टाफ भर्ती के लिए आवेदक विनोद उइके को मैनेजर पद में 50 हजार रुपए अमानत राशि जमा करने बताकर 30 हजार रुपए नगद व बाकी मासिक पेमेंट से दो हजार प्रतिमाह जमा करना बताकर लिए गए थे। मनीषा उइके से 10 हजार रुपए, सतीश उद्दे से 40 हजार, सतेंद्र से 20 हजार रुपए, अंगद सिंह मरावी से 45 सौ रुपए, ममता खैरवार से 10 हजार रुपए, ज्योति मानिकपुरी से 30 हजार रुपए और अन्य लोगों से इसी तरह पैसा लेकर अलग-अलग पद मैनेजर, फील्ड आफीसर, एएनएम, रिसेप्शन, भृत्य, एंबुलेंस चालक आदि की भर्ती कर संस्था का संचालन किया गया था। बताया गया कि एक नवंबर 2017 से 18 फरवरी 2018 तक संस्था संचालित रही। युवाओं को संस्था में पद के हिसाब से दो हजार, चार हजार, पांच हजार व दस हजार रुपए प्रतिमाह मानदेय देना कहकर रखा गया था।

बिना सूचना के बंद कर दी संस्था

बताया गया कि संस्था ने मेडिकल दुकान से दवाइयां भी ली थीं। अचानक संस्था संचालक विपुल बघेल व राहुल पांडे द्वारा बिना किसी सूचना के संस्था बंद कर बिना कर्मचारियों की डिपाजिट राशि वापस किए भाग गए। शिकायत जांच के बाद दोनों के खिलाफ धारा 420, 34 के तहत अपराध दर्ज कर विवेचना में लिया गया है। पीड़ितों ने बताया कि मां नर्मदा हेल्थ केयर मेक्सी फाउंडेशन मंडला द्वारा संचालित नवंबर 2017 में ग्राम देवलपुर में अपनी संस्था का संचालन शुरू किया गया था। नवंबर 2017 से फरवरी 2018 समनापुर में लोगों के साथ ठगी करते रहे और रातोंरात संस्था बंद कर भाग गए।

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