चार्तुमास और पर्यूषण महापर्व में श्री ऋषभदेव बावन जिनालय में बह रहीं धर्म की गंगा, विभिन्न धार्मिक क्रियाओं में समाजजन लीन, आज निकाला जाएगा 14 स्वपनाजी का जुलूस
झाबुआ (अली असगर बोहरा) - श्री ऋषभदेव बावन जिनालय में श्री नवल स्वर्ण जयंती चार्तुमास एवं पर्यूषण महापर्व के चलते धर्म की गंगा प्रवाहित हो रहीं है। मंदिर में दिनभर विभिन्न धार्मिक आयोजन हो रहे है। जिसमें समाजजन उत्साह के साथ शामिल होकर लाभ प्राप्त कर रहे है। जप-तप एवं आराधनाओं का दौर जारी है। श्रावक-श्राविकाएं बढ़-चढ़कर जप-तप एवं आराधना कर प्रभु भक्ति में लीन है। उधर प्रतिदिन अष्ट प्रभावक आचार्य देवेष श्रीमद् विजय नरेन्द्र सूरीष्वरजी मसा ‘नवल’ एवं प्रन्यास प्रवर जिनेन्द्र विजयजी मसा ‘जलज’ द्वारा समाजजनों को धर्मसभा में अपने प्रवचनों में चातुर्मास एवं पर्यूषण महापर्व के महत्व के बारे में बताया जा रहा है। प्रतिदिन मंदिर में भगवान एवं दादा गुरूदेव की सुंदर अंगरचना भी हो रहीं है।
पर्यूषण महापर्व के तीसरे दिन अष्ट प्रभावक आचार्य देवेष नरेन्द्र सूरीष्वरजी मसा ने श्रावकों के पांच कर्तव्यों के बारे में बताया कि अमारी प्रवर्तन, साधर्मिक वात्सल्य, क्षमापना, अट्ठम एवं चैत्य परिपाटी। जीवन के गुणाें में सद्गुणों का बाग लगाने के लिए यह पांच कर्तव्य अत्यंत जरूरी है। आचार्य श्रीजी ने कुमारपाल एवं अकबर का दृष्टांत देते हुए जीवन में अहिंसा अमारी परिवर्तन का महत्व बताया। जिन वाणी का महत्व बताते हुए कहा कि जीवन में अच्छाई, सच्चाई और भलाई को अपनाना चाहिए। यह जिनवाणी दिल को साफ करती है, जीवों को माफ करने का महत्व बताती है। रोहिणी चोर जिन वाणी के प्रभाव से बच गया।
अट्ठम से आत्मा को लाभ मिलता है
नरेन्द्र सूरीजी ने आगे कहा कि साधर्मिक वात्सल्य से स्वार्थ की प्यास बुझती है। परस्पर क्षमापना से वैर की आग बुझती है। अट्ठम से आत्मा को लाभ मिलता है। चैत्य परिपाटी से अहंकार की आग बुझती है। आचार्य ने बताया आरीषा भवन के अंदर भरतजी केवल ज्ञानी बने। 8 पीढि़यों तक उनके कुल के अंदर यह पावन परंपरा अनवरत रूप से चली। पोषण का महत्व बताया कि पोषध आत्मा का औषध है। कल्प सूत्र ग्रंथ के विविध चढ़ाते हुए ज्ञान की भक्ति हुई। पर्यूषण पर्व के तीसरे दिन श्रावकों ने तप व्रत के पच्चखान लिए। धर्मसभा बाद दादा गुरूदेव श्रीमद् विजय राजेन्द्र सूरीष्वरजी मसा की आरती का लाभ अभयकुमार धारीवाल परिवार ने लिया। धर्मसभा का संचालन श्री नवल स्वर्ण जयंती चातुर्मास समिति के अध्यक्ष कमलेष कोठारी ने लिया।
चौवीसी का हुआ आयोजन
दोपहर में तपस्वी दिलीप सागरमल संघवी की तपस्या निमित्त चौवीसी का आयोजन हुआ। जिसमें श्री संघ के श्रावक-श्राविकाएं, हेमेन्द्र सूरी महिला मंडल, नवकार ग्रुप एवं महिला परिषद् की श्राविकाएं शामिल हुई। प्रातः मूलनायक आदिनाथ भगवान, पुंडरिक स्वामीजी, गणधर भगवान, जिनदत्त सूरीजी, गुरूदेव राजेन्द्र सूरीष्वरजी मसा की सुंदर अंगरचना की गई। इससे एक दिन पूर्व मंगलवार रात को 11 तपस्वियां की तपस्या निमित्त जैन सोष्यल ग्रुप मैत्री की ओर से भी चौवीसी का आयोजन रखा गया। चातुर्मास एवं पर्यूषण महापर्व के चलते 100 से अधिक तपस्वियों द्वारा विभिन्न तपस्याएं की जा रहीं है। पयूर्षण महापर्व में पोषध व्रत करने वाले सभी तपस्वियों के प्रभावाना का लाभ यषवंत, निखिल, शार्दुल, जिनांष भंडारी परिवार ने लिया है।
कल्पसूत्र को बैंड-बाजों के साथ बावन जिनालय लाया जाएगा
29 अगस्त, गुरूवार को सुबह 7.30 बजे से कल्पसूत्र व्होराने के लाभार्थी श्रीमती लीलाबेन शांतिलाल भंडारी के निवास से कल्प सूत्र को बैंड-बाजों के साथ बधाते हुए बावन जिनालय तक लाया जाएगा। बाद मंदिर की तीन पदक्षिणा देकर कल्प सूत्र ग्रंथ को भंडारी परिवार द्वारा आचार्य को प्रदान किया जाएगा। वाक्षेप पूजन के लाभार्थी श्वेतांबर श्री जैन संघ के सुजानमल कटारिया, यषवंत भंडारी, सोहनलाल कोठारी, मनोहरलाल छाजेड़ एवं अषोककुमार सकलेचा द्वारा कल्प सूत्र ग्रंथ की वाक्षेप पूजन की जाएगी। पश्चात् संजय जगावत परिवार की ओर से अष्टप्रकारी पूजन रखी गई है। डॉ. प्रदीप संघवी परिवार द्वारा कल्पसूत्र को स्वर्ण, चांदी, अक्षत एवं मोती से बधाया जाएगा। श्रीमती मांगूबेन सकलेचा परिवार द्वारा आरती उतारी जाएगी।
आज निकाला जाएगा 14 स्वपनाजी का जुलूस
बाद आचार्य श्रीजी द्वारा पर्यूषण महापर्व के चौथे एवं पांचवे दिन धर्मसभा में कल्प सूत्र का वाचन किया जाएगा। दोपहर 3 बजे चुंदड़ी का उपवास कर रहीं श्राविकाओं द्वारा माता त्रिषलाजी द्वारा देखे गए 14 स्वपनाजी का जुलूस बावन जिनालय से निकाला जाएगा, जो शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए पुनः मंदिर पर पहुंचेगा। शाम को प्रतिक्रमण होगा। 30 अगस्त को भगवान महावीर स्वामीजी का जन्मोत्सव मनाते हुए जन्म कल्याण वाचन बाद दोपहर में प्रभु महावीर स्वामी की भव्य रथ यात्रा निकाली जाएगी। इसके साथ ही महावीर बाग में भी धर्म-आराधनाओं का दौर जारी है। प्रतिदिन महावीर स्वामी, पार्ष्वनाथ भगवान एवं श्री गोतम स्वामीजी की सुंदर अंगरचना की जा रहीं है।
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