मीडिया के लिए व्यक्त किये गये कंगना रनौत के विचार अक्षम्य, बहिष्कार उचित : शोभा ओझा
भोपाल - मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी, मीडिया विभाग की अध्यक्ष श्रीमती शोभा ओझा ने आज जारी एक बयान में कहा है कि बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनौत द्वारा भारत के मीडिया कर्मियों और पत्रकारों के खिलाफ असभ्य, असांस्कृतिक, भद्दी और गाली-गलौज वाली भाषा के इस्तेमाल और मान्य परंपरा के ख़िलाफ़ अमर्यादित टिप्पणी से हम सब अचंभित हैं। श्रीमती ओझा ने कहा हम कड़े शब्दों में इसकी निंदा करते हैं। कंगना का ऐसा व्यवहार और पत्रकारों के साथ गाली-गलौज करना पूरी तरह से अस्वीकार्य है, यह देश के मीडिया जगत पर एक सोची समझी रणनीति के तहत किया गया हमला है। अपने अक्षम्य कृत्य के लिए कंगना रनौत को पत्रकार बिरादरी से बिना शर्त, अविलंब माफ़ी मांगना चाहिए, मीडिया जगत द्वारा उनके बहिष्कार का फैसला लिया जाना पूरी तरह से जायज है ।
श्रीमती ओझा ने इस संबंध में आगे कहा कि जिस वीडियो में रनौत मीडिया के लिए अभद्र भाषा का प्रयोग कर रही हैं, उसी वीडियो में वह स्वयं यह कह रही हैं कि मेरी तरक्की में मीडिया का बहुत बड़ा योगदान है। वैसे भी भारत का संविधान मीडिया को अभिव्यक्ति की की पूरी आजादी देता है।
श्रीमती ओझा ने कहा कि यह भी अजीब संयोग है कंगना रनौत की बातें उसी राजनैतिक दल की विचारधारा से मेल खाती हैं, जो दल, केंद्र की सत्ता से सवाल पूछे जाने पर जवाब देने की बजाय पत्रकारों की राष्ट्रभक्ति पर ही प्रश्नचिह्न खड़े कर देता है। असहमति दर्शाने के अन्य तरीके भी हैं लेकिन इस प्रकार की बातें सभ्य समाज और स्वस्थ लोकतंत्र के लिए किसी भी दृष्टि से उचित नहीं कही जा सकतीं।
क्या अब एक नचनिया पढ़ाएगी भारतीय मीडिया को चरित्र का पाठ
जर्नलिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन (JWA)के अध्यक्ष श्री महेश दीक्षित ने फिल्म एक्ट्रेस कंगना रानावत के मीडिया को लेकर घटिया सोच और घटिया बयानवाजी पर तीखा आक्रोश जताया है। उन्होंने कहा कि मीडिया की बदौलत कंगना को सिने दुनिया में जो प्रसिद्धि मिली है, उससे उनका दिमाग खराब हो गया है। श्री दीक्षित ने कहा कि कुछ मीडिया की वजह से ( जिनसे कंगना परेशान हैं) पूरी मीडिया जगत पर आक्षेप और पत्रकारों को देशद्रदोही कहना कंगना का गंभीर अपराध है। श्री दीक्षित ने कंगना से पूछा है कि, क्या कुछ सस्ती प्रसिद्धि और पैसों की खातिर जब वे रूपहले पर नंगी होती हैं और पूरी दुनिया के सामने अपने नंगेपन से भारतीय सभ्यता का मजाक उड़वाती हैं, क्या यह देशद्रोह नहीं हैं? कोठों-कोठियो और धन पशुओं के दरबारों में नाचने वाली नाचनिया कंगना क्या भारतीय संविधान के उस चौथे स्तम्भ को चरित्र का सर्टिफिकेट देगी, जिसने बड़े-बड़े महलों, अच्छे-अच्छे राजघरानों, राजनेताओं और नौकरशाहों को चाल,चरित्र और चेहरों को साफ रखने और उठने-बैठने की तमीज सिखाई है। अहंकार में ऊंचे उठे सिरों को समाज और आमजन में रहने और चलने का संस्कार सिखाया है। श्री दीक्षित ने कहा है कि कंगना, मीडिया का अपमान करने की अपराधी हैं। यदि उन्होंने क्षमा याचना नहीं की, तो उनके खिलाफ JWA द्वारा मानहानि का मुकदमा किया जाएगा।
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