मेडिकल नशे की सप्लाई चेन पर कब कसेगा शिकंजा? थोक दवा विक्रेताओं के रिकॉर्ड की जांच की मांग

मेडिकल नशे की सप्लाई चेन पर कब कसेगा शिकंजा? थोक दवा विक्रेताओं के रिकॉर्ड की जांच की मांग

रीवा/मऊगंज। मेडिकल नशे के अवैध कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस और प्रशासन की ओर से लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं। समय-समय पर नशीली दवाइयों की बरामदगी और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई भी सामने आती है। इसके बावजूद दवाओं के अवैध इस्तेमाल और उनकी उपलब्धता को लेकर चिंता बनी हुई है। ऐसे में अब सवाल दवाइयों की सप्लाई चेन और थोक दवा विक्रेताओं की निगरानी को लेकर उठने लगे हैं। मांग की जा रही है कि औषधि प्रशासन केवल फुटकर मेडिकल स्टोरों तक सीमित न रहे, बल्कि थोक विक्रेताओं की खरीद-बिक्री और वितरण व्यवस्था की भी विस्तृत जांच कराए।

सबसे अहम सवाल यह है कि थोक दवा विक्रेता किन-किन मेडिकल स्टोरों को नियंत्रित या प्रतिबंधित श्रेणी की दवाइयां उपलब्ध करा रहे हैं? किस दुकान को कितनी मात्रा में दवाइयां बेची गईं? किस कंपनी से कौन-सी दवा कितनी खरीदी गई और उसका वितरण कहां किया गया? इन सवालों का जवाब खरीद-बिक्री के बिल, स्टॉक रजिस्टर और वितरण संबंधी अभिलेखों के सत्यापन से सामने आ सकता है।

थोक विक्रेताओं से शुरू हो जांच

दवाओं की आपूर्ति व्यवस्था में थोक विक्रेता महत्वपूर्ण कड़ी होते हैं। ऐसे में मेडिकल नशे पर प्रभावी नियंत्रण के लिए उनकी भूमिका और रिकॉर्ड की जांच जरूरी मानी जा रही है। औषधि प्रशासन को यह देखना चाहिए कि संबंधित विक्रेताओं ने निर्धारित नियमों के अनुसार खरीद और बिक्री का रिकॉर्ड रखा है या नहीं। विशेष रूप से नियंत्रित श्रेणी की दवाओं के मामले में वैध चिकित्सकीय पर्चे, बिक्री अभिलेख और स्टॉक का मिलान किया जाना चाहिए।

यदि किसी मेडिकल स्टोर को सामान्य जरूरत की तुलना में असामान्य मात्रा में दवाइयों की आपूर्ति हुई है, तो उसका कारण भी जांच के दायरे में आना चाहिए। संबंधित दवाओं की वास्तविक बिक्री, उपलब्ध स्टॉक और वितरण के रिकॉर्ड का मिलान कर यह पता लगाया जा सकता है कि कहीं नियमों का उल्लंघन तो नहीं हो रहा है।

औषधि विभाग की निगरानी पर सवाल

रीवा और मऊगंज में मेडिकल नशे को लेकर औषधि प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। यदि थोक विक्रेताओं से लेकर फुटकर मेडिकल स्टोरों तक दवाइयों की आपूर्ति का रिकॉर्ड उपलब्ध है, तो उसकी नियमित जांच कितनी प्रभावी ढंग से की जा रही है? अनियमितताएं सामने आने पर अब तक क्या कार्रवाई हुई? इन बिंदुओं पर विभाग को स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए।

इसके साथ ही अवैध कारोबार के नाम पर कथित मासिक वसूली और अवैध लेन-देन को लेकर भी चर्चाएं सामने आती रही हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए संबंधित एजेंसियों को तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर निष्पक्ष जांच करनी चाहिए, ताकि यदि कहीं अनियमितता या भ्रष्टाचार है तो उसकी वास्तविकता सामने आ सके।

सप्लाई चेन का रिकॉर्ड सार्वजनिक जांच के दायरे में आए

विशेषज्ञता और तकनीकी जानकारी रखने वाले औषधि निरीक्षकों की निगरानी में थोक दवा विक्रेताओं के पिछले कुछ महीनों के खरीद-बिक्री रिकॉर्ड की जांच कराई जा सकती है। कंपनियों से हुई खरीद, मेडिकल स्टोरों को किए गए वितरण, उपलब्ध स्टॉक और बिक्री के आंकड़ों का मिलान किया जाना चाहिए। जहां नियमों का उल्लंघन मिले, वहां संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई होनी चाहिए।

पुलिस, औषधि प्रशासन और जिला प्रशासन के बीच समन्वय भी जरूरी है। पुलिस को जहां अवैध बिक्री या दवाओं के दुरुपयोग की जानकारी मिलती है, उसे औषधि प्रशासन के साथ साझा किया जाना चाहिए, ताकि दवा के स्रोत और आपूर्ति के रास्ते की पहचान की जा सके।

सिर्फ फुटकर दुकानों पर कार्रवाई से कैसे टूटेगी कड़ी?

मेडिकल नशे पर रोक लगाने के लिए केवल छिटपुट कार्रवाई पर्याप्त नहीं होगी। दवाओं की खरीद से लेकर अंतिम बिक्री तक पूरी सप्लाई चेन की निगरानी जरूरी है। अब सवाल यह है कि रीवा और मऊगंज में थोक दवा विक्रेताओं के रिकॉर्ड का व्यापक सत्यापन कब कराया जाएगा? औषधि प्रशासन की जांच में क्या अनियमितताएं सामने आई हैं और दोषी पाए जाने वालों पर क्या कार्रवाई हुई है?

युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाने के लिए नशामुक्ति अभियान के साथ दवाओं की अवैध आपूर्ति पर भी प्रभावी नियंत्रण जरूरी है। इसके लिए पारदर्शी जांच, नियमित निरीक्षण और जिम्मेदारों की जवाबदेही तय करना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए।

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