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| नशे पर पुलिस का प्रहार तेज, बीट प्रभारियों पर कार्रवाई का आईजी का निर्देश कहां गया? |
रीवा। रीवा और मऊगंज जिले में नशीली कफ सिरप, प्रतिबंधित टैबलेट, गांजा और अवैध शराब के कारोबार को लेकर पुलिस की कार्रवाई एक बार फिर तेज होती दिखाई दे रही है। नशे के अवैध कारोबार और इससे प्रभावित हो रहे परिवारों की पीड़ा को दैनिक आज तक 24 द्वारा लगातार प्रमुखता से उठाया जाता रहा है। इसके बाद प्रशासनिक स्तर पर सक्रियता बढ़ने के बीच अब सवाल यह है कि क्या कार्रवाई केवल छोटे कारोबारियों की गिरफ्तारी तक सीमित रहेगी या पूरे नेटवर्क पर प्रभावी शिकंजा कसा जाएगा?
रीवा संभाग के शहरी क्षेत्रों से लेकर ग्रामीण अंचलों तक नशीले पदार्थों की अवैध बिक्री को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं। नशीली कफ सिरप, प्रतिबंधित गोलियों, गांजा और अवैध शराब का कारोबार युवाओं के भविष्य और परिवारों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति को प्रभावित कर रहा है। पुलिस द्वारा अलग-अलग स्थानों पर दबिश देकर कार्रवाई करना सकारात्मक कदम है, लेकिन स्थायी समाधान के लिए आपूर्ति से लेकर बिक्री तक जुड़े पूरे नेटवर्क की पहचान जरूरी है।
आईजी के निर्देश पर अमल कितना हुआ?
इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल रीवा जोन के पुलिस महानिरीक्षक के उस पूर्व निर्देश को लेकर है, जिसमें नशे का अवैध कारोबार मिलने और पुलिस बीट क्षेत्र में नशीले पदार्थों की खाली शीशियां पाए जाने की स्थिति में संबंधित बीट प्रभारी के विरुद्ध कार्रवाई की बात कही गई थी।
इस निर्देश का उद्देश्य बीट स्तर पर पुलिस की जिम्मेदारी और निगरानी व्यवस्था को मजबूत करना था। लेकिन अब सवाल उठ रहा है कि इस निर्देश के बाद कितने मामलों में संबंधित बीट प्रभारियों की भूमिका की समीक्षा हुई और कितनों के विरुद्ध कार्रवाई की गई? यदि किसी क्षेत्र में लगातार नशे के कारोबार की शिकायतें मिल रही हैं तो वहां की निगरानी व्यवस्था की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।
छोटे विक्रेताओं से आगे बड़े सप्लायर तक पहुंचे जांच
नशे के अवैध कारोबार पर प्रभावी रोक लगाने के लिए केवल स्थानीय स्तर पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। पुलिस को यह पता लगाना होगा कि प्रतिबंधित पदार्थों की आपूर्ति कहां से हो रही है, बड़े सप्लायर कौन हैं, परिवहन का माध्यम क्या है और स्थानीय स्तर पर इस नेटवर्क को कौन संचालित कर रहा है। वित्तीय लेन-देन और आपूर्ति श्रृंखला की जांच भी महत्वपूर्ण है।
कार्रवाई के साथ निगरानी और जवाबदेही भी जरूरी
किसी भी क्षेत्र में लगातार अवैध कारोबार की शिकायतें मिलने पर बीट प्रभारी और संबंधित थाना स्तर की निगरानी व्यवस्था की समीक्षा होनी चाहिए। हालांकि किसी क्षेत्र में अपराध मिलने मात्र से संबंधित पुलिसकर्मी की मिलीभगत साबित नहीं होती, लेकिन लापरवाही या निर्देशों की अनदेखी सामने आने पर नियमानुसार जवाबदेही तय करना जरूरी है।
जनता को स्थायी समाधान का इंतजार
नशे की समस्या का असर केवल किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरा परिवार इसकी चपेट में आता है। युवाओं को नशे से बचाने के लिए पुलिस कार्रवाई के साथ जागरूकता और सामाजिक सहभागिता भी जरूरी है।
अब सवाल रीवा जोन के आईजी, रीवा एवं मऊगंज के पुलिस अधीक्षकों से है कि बीट प्रभारियों की जवाबदेही तय करने संबंधी पूर्व निर्देश पर अब तक कितनी कार्रवाई हुई? क्या इसकी समीक्षा की जाएगी? क्या बड़े सप्लायर और पूरे आपूर्ति नेटवर्क तक पुलिस पहुंचेगी?
दैनिक आज तक 24 जनता की समस्याओं और सामाजिक सरोकारों को प्रमुखता से उठाता रहेगा। नशे के खिलाफ कार्रवाई स्वागत योग्य है, लेकिन इसकी असली सफलता तभी होगी जब अवैध कारोबार पर स्थायी रोक लगेगी और निगरानी व्यवस्था में लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही भी तय होगी।
