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| स्वच्छता पर खर्च के बावजूद कचरे का अंबार, खरीदी और कमीशनखोरी के आरोपों के बीच व्यवस्था पर सवाल |
रीवा। स्वच्छता अभियान के नाम पर सरकारी स्तर पर लाखों-करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के दावों के बीच रीवा संभाग में जमीनी हालात को लेकर सवाल उठ रहे हैं। डस्टबिन, सफाई उपकरण और अन्य संसाधनों की खरीदी के बावजूद यदि गांवों, सड़कों और सार्वजनिक स्थलों पर कचरे के ढेर दिखाई दे रहे हैं, तो खर्च और उसके परिणामों की समीक्षा जरूरी हो जाती है। सवाल यह है कि स्वच्छता के नाम पर खरीदे गए संसाधनों का उपयोग कहां हो रहा है और सफाई व्यवस्था नियमित क्यों नहीं चल पा रही है?
गढ़ पंचायत की तस्वीरों ने खोली व्यवस्था की हकीकत
जनता की ओर से भेजे गए वीडियो और तस्वीरें ग्राम पंचायत गढ़, जनपद पंचायत गंगेव, तहसील मनगवां, जिला रीवा की बताई जा रही हैं। इनमें विभिन्न स्थानों पर कचरे के ढेर दिखाई दे रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, कुछ समय तक सफाई वाहन गांव में नियमित रूप से घूमते रहे और एक-दो सप्ताह तक सफाई व्यवस्था सक्रिय भी नजर आई, लेकिन बाद में स्थिति फिर पहले जैसी हो गई।
यदि तस्वीरों में दिखाई दे रही स्थिति वर्तमान है, तो यह संबंधित पंचायत और निगरानी व्यवस्था के लिए गंभीर सवाल है। स्वच्छता अभियान का उद्देश्य केवल कुछ दिनों तक सफाई कराना नहीं, बल्कि नियमित रूप से साफ-सफाई बनाए रखना है।
खरीदे गए डस्टबिन और संसाधन कहां उपयोग हो रहे?
स्वच्छता अभियान के तहत डस्टबिन, सफाई उपकरण और अन्य सामग्री की खरीदी की गई। इसके बावजूद कई स्थानों पर कचरा जमा होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि खरीदी गई सामग्री किन स्थानों पर उपलब्ध कराई गई, उसका उपयोग कौन कर रहा है और सफाई वाहनों का संचालन कितनी नियमितता से हो रहा है।
खरीदी और बिलों को लेकर उठ रहे सवालों के बीच कमीशनखोरी के आरोपों की भी निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है। हालांकि, बिना दस्तावेजी प्रमाण किसी प्रकार की अनियमितता या कमीशनखोरी को तथ्य नहीं माना जा सकता। संबंधित विभाग को खरीदी प्रक्रिया, भुगतान और सामग्री के उपयोग का रिकॉर्ड सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
राष्ट्रीय राजमार्गों से सार्वजनिक स्थलों तक गंदगी
रीवा संभाग में कई स्थानों पर सड़कों, बाजारों, चौराहों और सार्वजनिक स्थलों पर कचरा जमा होने की शिकायतें सामने आती रहती हैं। स्वच्छता व्यवस्था की सफलता का आकलन केवल सरकारी रिपोर्टों से नहीं, बल्कि गांवों और शहरों की वास्तविक स्थिति से होना चाहिए।
इसके लिए सफाई वाहनों के संचालन, कचरा संग्रहण, उसके परिवहन और निर्धारित स्थान पर निस्तारण की नियमित निगरानी आवश्यक है। जहां सफाई व्यवस्था में लापरवाही सामने आए, वहां जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
पंचायत से लेकर जनपद तक जवाबदेही जरूरी
स्वच्छता अभियान को सफल बनाने में ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत और संबंधित विभागों की महत्वपूर्ण भूमिका है। यदि संसाधन उपलब्ध होने के बावजूद सफाई नहीं हो रही है, तो इसकी समीक्षा होनी चाहिए। यह भी जांचना जरूरी है कि सफाई कर्मचारियों की तैनाती, वाहनों के संचालन और सामग्री वितरण से जुड़े रिकॉर्ड वास्तविक कार्यों से मेल खाते हैं या नहीं।
साथ ही नागरिकों की जिम्मेदारी भी कम नहीं है। सार्वजनिक स्थानों पर कचरा न फेंकना और निर्धारित स्थानों पर ही कचरा डालना स्वच्छता बनाए रखने के लिए जरूरी है। लेकिन नागरिकों की सहभागिता के साथ प्रशासनिक व्यवस्था की जवाबदेही भी सुनिश्चित होनी चाहिए।
खर्च नहीं, धरातल पर दिखना चाहिए परिणाम
अब सवाल यह है कि स्वच्छता के नाम पर खरीदी गई सामग्री, खर्च किए गए बजट और सफाई व्यवस्था का वास्तविक हिसाब कौन देगा? क्या संबंधित अधिकारी गढ़ पंचायत सहित अन्य क्षेत्रों का निरीक्षण कर संसाधनों के उपयोग और सफाई व्यवस्था की स्थिति की जांच करेंगे?
स्वच्छता अभियान की सफलता सरकारी फाइलों, बिलों और खरीदी के आंकड़ों से नहीं, बल्कि साफ गलियों, सड़कों, बाजारों और सार्वजनिक स्थलों से साबित होती है। जब तक नियमित सफाई और जवाबदेही सुनिश्चित नहीं होगी, तब तक स्वच्छ संभाग का लक्ष्य केवल सरकारी दावों तक सीमित रहने का खतरा बना रहेगा।
