रीवा-मऊगंज में राजस्व रिकॉर्ड पर सवाल: खसरा-नक्शों में जमीन की वास्तविक तस्वीर अस्पष्ट, सुधार कब?

रीवा-मऊगंज में राजस्व रिकॉर्ड पर सवाल: खसरा-नक्शों में जमीन की वास्तविक तस्वीर अस्पष्ट, सुधार कब?

रीवा/मऊगंज। मध्य प्रदेश सरकार डिजिटल व्यवस्था और पारदर्शी प्रशासन को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है, लेकिन रीवा एवं मऊगंज जिले में ऑनलाइन राजस्व अभिलेखों की स्थिति को लेकर सवाल उठने लगे हैं। खसरा और भू-नक्शों में भूमि की वास्तविक स्थिति स्पष्ट नहीं होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। इससे आम नागरिकों को अपनी जमीन की पहचान, सीमांकन और भूमि संबंधी जानकारी प्राप्त करने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

बताया जा रहा है कि ऑनलाइन भू-नक्शों में कई स्थानों पर यह स्पष्ट रूप से पहचानना मुश्किल होता है कि किस खसरा नंबर में मकान स्थित है, कहां पेड़ हैं, कहां तालाब और नदी हैं तथा सार्वजनिक रास्तों की वास्तविक स्थिति क्या है। यदि सरकारी रिकॉर्ड और धरातल की स्थिति में अंतर है, तो भूमि संबंधी विवादों के निराकरण और विकास कार्यों की योजना बनाने में भी कठिनाइयां आ सकती हैं।

सड़क निर्माण और भूमि अधिग्रहण में रिकॉर्ड की भूमिका

राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य राजमार्ग, जिला मार्ग और ग्रामीण सड़कों के निर्माण एवं विस्तार के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया अपनाई जाती है। ऐसे में संबंधित खसरा नंबर, अधिग्रहित भूमि और सड़क की वास्तविक सीमाओं का राजस्व अभिलेखों में स्पष्ट उल्लेख होना जरूरी है। सवाल यह है कि यदि ऑनलाइन नक्शों में मार्गों की स्थिति स्पष्ट नहीं है, तो भूमि की पहचान और अधिग्रहण से संबंधित जानकारी का सत्यापन किस आधार पर किया जा रहा है?

तालाब, नदी और शासकीय भूमि के संरक्षण का सवाल

तालाब, नदी, नाले, शासकीय भूमि, वन भूमि, धार्मिक स्थल, गौशाला और अन्य सार्वजनिक उपयोग की जमीनों का सही विवरण राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज होना आवश्यक है। अभिलेखों में विसंगतियां होने पर अतिक्रमण की पहचान, सार्वजनिक संपत्तियों के संरक्षण और भूमि विवादों के निराकरण में समस्या उत्पन्न हो सकती है। इसलिए इन अभिलेखों का वास्तविक भौतिक स्थिति से मिलान कराया जाना जरूरी है।

जनप्रतिनिधि और प्रशासन कब लेंगे संज्ञान?

रीवा और मऊगंज जिले में राजस्व अभिलेखों से जुड़ा यह विषय केवल विभागीय तकनीकी प्रक्रिया तक सीमित नहीं है, बल्कि आम नागरिकों के भूमि अधिकार और सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा से भी जुड़ा है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों, जिला प्रशासन और राजस्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को इस दिशा में पहल करने की आवश्यकता है।

व्यापक जांच और सुधार की जरूरत

जरूरत है कि दोनों जिलों के ऑनलाइन खसरा एवं भू-नक्शों का चरणबद्ध तरीके से परीक्षण कराया जाए। राजस्व अभिलेखों का मौके की वास्तविक स्थिति से मिलान हो और जहां भी विसंगतियां पाई जाएं, वहां नियमानुसार सुधार की प्रक्रिया अपनाई जाए। साथ ही आम नागरिकों को अभिलेखों में त्रुटि सुधार के लिए सरल और पारदर्शी व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए।

दैनिक आज तक 24 का सवाल: जब सरकार डिजिटल रिकॉर्ड और पारदर्शी प्रशासन की बात कर रही है, तो रीवा एवं मऊगंज के राजस्व अभिलेखों की विसंगतियों को दूर करने के लिए ठोस कार्रवाई कब होगी? क्या जिला प्रशासन ऑनलाइन खसरा और भू-नक्शों का धरातलीय सत्यापन कराकर आम जनता को सही और अद्यतन रिकॉर्ड उपलब्ध कराने की पहल करेगा?

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