भूख हड़ताल शुरू होते ही उखाड़ा टेंट, NSUI जिलाध्यक्ष समेत कार्यकर्ता हिरासत में

 

भूख हड़ताल शुरू होते ही उखाड़ा टेंट, NSUI जिलाध्यक्ष समेत कार्यकर्ता हिरासत में

रीवा। अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय में कथित भ्रष्टाचार, वित्तीय एवं नियुक्ति अनियमितताओं सहित छात्रों से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर NSUI का आंदोलन तेज हो गया है। सोमवार को विश्वविद्यालय गेट के बाहर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल, धरना और सत्याग्रह शुरू करने पहुंचे NSUI जिलाध्यक्ष पंकज उपाध्याय सहित कार्यकर्ताओं को पुलिस ने मौके से हटा दिया। आंदोलन के लिए लगाया गया टेंट भी प्रशासन ने हटवा दिया। बाद में पंकज उपाध्याय और उनके साथियों को हिरासत में लेकर बिछिया थाने ले जाया गया।

NSUI की ओर से विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली की जांच और कथित अनियमितताओं के दोषियों पर कार्रवाई की मांग को लेकर पिछले कई दिनों से आंदोलन किया जा रहा है। संगठन ने विजिटिंग फैकल्टी में कथित अनियमितता, परीक्षा एवं परिणामों में देरी तथा छात्रों के साथ कथित दोहरे मापदंड सहित कई मुद्दे उठाए हैं।

गांधी प्रतिमा लेकर अकेले बैठे जिलाध्यक्ष

पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार NSUI कार्यकर्ता विश्वविद्यालय गेट के बाहर पहुंचे और टेंट लगाकर भूख हड़ताल शुरू करने की तैयारी की। इसी दौरान पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंच गए और टेंट हटाकर आंदोलनकारियों को वहां से जाने के लिए कहा।

इसके बाद NSUI जिलाध्यक्ष पंकज उपाध्याय गांधीजी की प्रतिमा लेकर अकेले शांतिपूर्वक बैठ गए। NSUI के मुताबिक पुलिस ने उन्हें भी वहां बैठने से रोक दिया। उपाध्याय का दावा है कि अधिकारियों ने कहा कि ‘ऊपर से दबाव है, यहां बैठने नहीं दिया जाएगा।’

इसके बाद पुलिस ने पंकज उपाध्याय और उनके साथियों को हिरासत में लेकर बिछिया थाने पहुंचाया, जहां उन्हें कई घंटे तक बैठाए रखा गया।

तीन दिन में निराकरण नहीं तो आंदोलन तेज करने की चेतावनी

NSUI जिलाध्यक्ष पंकज उपाध्याय ने कहा कि यह लड़ाई अब रुकने वाली नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रशासन को तीन दिनों के भीतर विश्वविद्यालय में लगाए गए आरोपों और संगठन की मांगों की जांच कर ठोस निराकरण करना होगा। मांगों पर कार्रवाई नहीं होने पर भूख हड़ताल के साथ जल सत्याग्रह सहित बड़े आंदोलन किए जाएंगे।

NSUI ने स्पष्ट किया है कि जब तक छात्रों से जुड़े मुद्दों का समाधान नहीं होता और विश्वविद्यालय की कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

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