रीवा में मिलावटखोरी की शिकायतों से उठे सवाल, खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और जांच व्यवस्था पर नजर

रीवा में मिलावटखोरी की शिकायतों से उठे सवाल, खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और जांच व्यवस्था पर नजर

रीवा। जिले में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और सरकारी जांच व्यवस्था को लेकर शिकायतें सामने आई हैं। शहर से लेकर ग्रामीण अंचलों तक खाद्य सामग्री में कथित मिलावट, दुकानों से बिल नहीं मिलने और विभिन्न विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जा रहे हैं। शिकायतकर्ता बृजलाल द्विवेदी ने इन मामलों की निष्पक्ष जांच कराने तथा उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।

चने के आटे, तेल, मसालों और अन्य खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर शिकायतकर्ता ने चिंता जताई है। वहीं, शक्कर के नाम पर सल्फर जैसे पदार्थ की बिक्री किए जाने संबंधी आरोपों की भी जांच की मांग की गई है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए खाद्य पदार्थों के नमूने लेकर मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला में जांच कराना आवश्यक है।

खाद्य पदार्थों की शुद्धता सुनिश्चित करना जरूरी

खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सीधे आम लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ी होती है। उपभोक्ता रोजाना बाजार से आटा, तेल, मसाले, शक्कर और अन्य जरूरी सामग्री खरीदते हैं। ऐसे में उत्पादों की गुणवत्ता पर संदेह होने पर संबंधित विभागों को शिकायतों की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करनी चाहिए।

शिकायतकर्ता ने दुकानदारों द्वारा ग्राहकों को बिल या रसीद नहीं दिए जाने तथा कुछ मामलों में बिलों में दर्ज विवरण को लेकर भी सवाल उठाए हैं। यदि किसी दुकान पर वास्तविक खरीद और बिल में अंतर पाया जाता है, तो संबंधित दस्तावेजों की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। इससे उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा के साथ कारोबार में पारदर्शिता बढ़ाने में मदद मिलेगी।

विभागीय जांच और कार्रवाई की पारदर्शिता पर सवाल

बृजलाल द्विवेदी ने खाद्य विभाग, आबकारी विभाग, खनिज विभाग और जीएसटी से संबंधित जांच व्यवस्थाओं की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि विभिन्न क्षेत्रों में कथित अनियमितताओं की शिकायतों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाती।

शिकायतकर्ता ने मांग की है कि संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली और शिकायतों पर हुई कार्रवाई की समीक्षा की जाए। अधिकारियों की जिम्मेदारी, निरीक्षण से जुड़े अभिलेखों और जांच रिपोर्ट का परीक्षण कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जानी चाहिए। हालांकि, किसी अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका पर अंतिम निष्कर्ष ठोस साक्ष्यों और निष्पक्ष जांच के आधार पर ही निकाला जा सकता है।

सहकारिता व्यवस्था को लेकर भी शिकायत

शिकायतकर्ता ने जिले में सहकारिता विभाग के अंतर्गत संचालित व्यवस्थाओं पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि कुछ मामलों में संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा निर्धारित दायित्वों के निर्वहन तथा वितरण व्यवस्था की निगरानी में अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई जाती। उन्होंने जिम्मेदारियों के निर्वहन और पात्रता से जुड़े मामलों की जांच कराने की मांग की है।

द्विवेदी के अनुसार, उन्होंने कथित अनियमितताओं के संबंध में शिकायत क्रमांक 1781 सहित विभिन्न स्तरों पर शिकायतें भेजी हैं। उनका कहना है कि अब तक उन्हें संतोषजनक निराकरण नहीं मिला है। हालांकि, शिकायत क्रमांक 1781 की विषयवस्तु, संबंधित विभाग और उस पर हुई कार्रवाई की आधिकारिक स्थिति का सत्यापन किया जाना आवश्यक है।

शिकायत सही या गलत, जांच से सामने आए तथ्य

बृजलाल द्विवेदी का कहना है कि शिकायतों का निपटारा केवल औपचारिक प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उनके अनुसार, कुछ मामलों में शिकायतों की जांच के दौरान मूल आरोपों का स्पष्ट निराकरण नहीं हो पाता। उन्होंने मांग की है कि प्रत्येक शिकायत की बिंदुवार जांच कर निष्कर्ष से शिकायतकर्ता को अवगत कराया जाए।

शिकायतकर्ता ने कहा है कि यदि उनके आरोप गलत पाए जाते हैं, तो नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। उनका जोर इस बात पर है कि जांच में यह स्पष्ट होना चाहिए कि शिकायतों में कितनी सच्चाई है और कहीं कोई अनियमितता हुई है या नहीं।

उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा के लिए जवाबदेही जरूरी

खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता, दुकानों से बिल मिलने, सरकारी विभागों की जांच प्रक्रिया और सहकारिता व्यवस्था से जुड़ी शिकायतों का समयबद्ध निराकरण आवश्यक है। संबंधित विभागों को खाद्य सामग्री के नमूने लेकर प्रयोगशाला में जांच कराने, व्यापारिक अभिलेखों का नियमानुसार परीक्षण करने और प्राप्त शिकायतों पर की गई कार्रवाई की जानकारी स्पष्ट करने की जरूरत है।

यदि किसी मामले में अनियमितता प्रमाणित होती है, तो जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं, आरोप प्रमाणित नहीं होने पर जांच के निष्कर्ष भी स्पष्ट किए जाने चाहिए।

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