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| अंगूठे से हस्ताक्षर तक का सफर, डभौरा के वैभव केसरवानी जगा रहे शिक्षा की अलख |
डभौरा/रीवा। शिक्षा केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मनिर्भरता और सम्मान के साथ जीवन जीने का रास्ता भी खोलती है। इसी सोच के साथ रीवा जिले की डभौरा तहसील के ग्राम गोंता में उल्लास नवभारत साक्षरता मिशन के तहत प्रौढ़ शिक्षा अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान में स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता एवं अक्षर साथी वैभव कुमार केसरवानी ग्रामीणों को पढ़ना-लिखना सिखाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं।
घर-घर पहुंचकर शिक्षा का महत्व समझा रहे वैभव
ग्राम गोंता में वैभव कुमार केसरवानी उन लोगों तक शिक्षा पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं, जो किसी कारणवश बचपन में पढ़ाई नहीं कर सके। वे घर-घर जाकर ग्रामीणों को साक्षरता का महत्व समझाते हैं और उन्हें सीखने के लिए प्रेरित करते हैं।
अभियान के तहत शाम के समय खेत-खलिहानों से काम करके लौटने वाले ग्रामीणों के लिए खुले आंगन और चौपाल में पढ़ाई की व्यवस्था की जाती है। यहां महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं को अक्षर ज्ञान के साथ पढ़ने, लिखने तथा बुनियादी हिसाब-किताब की जानकारी दी जाती है।
अपने खर्च पर उपलब्ध करा रहे पढ़ाई की सामग्री
इस पहल की खास बात यह है कि वैभव केसरवानी ग्रामीणों को निःशुल्क शिक्षा देने के साथ कॉपी, किताब, पेंसिल और स्लेट जैसी आवश्यक सामग्री भी अपने निजी खर्च से उपलब्ध करा रहे हैं। इससे उन लोगों को पढ़ाई शुरू करने में मदद मिलती है, जिन्हें संसाधनों की कमी के कारण सीखने में कठिनाई होती है।
उनका प्रयास है कि आर्थिक या सामाजिक परिस्थितियां किसी व्यक्ति की सीखने की इच्छा के रास्ते में बाधा न बनें। ग्रामीण परिवेश में इस तरह की पहल प्रौढ़ शिक्षा के प्रति लोगों की झिझक कम करने और उन्हें नियमित रूप से सीखने के लिए प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
महिलाओं में दिखने लगा बदलाव
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, इस अभियान से जुड़ी कुछ महिलाएं अब अपना नाम लिखना सीख रही हैं और बैंक संबंधी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। बुनियादी साक्षरता उन्हें रोजमर्रा के कामों में अधिक आत्मविश्वास के साथ भाग लेने में मदद कर सकती है।
पढ़ना-लिखना सीखने से बैंक के कागजात समझने, जरूरी सूचनाएं पढ़ने और दैनिक हिसाब-किताब रखने जैसी गतिविधियों में भी आसानी होती है। यही वजह है कि प्रौढ़ शिक्षा को केवल अक्षर ज्ञान नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जाता है।
‘शिक्षा ही सशक्तिकरण की कुंजी’
अक्षर साथी वैभव कुमार केसरवानी का कहना है, “शिक्षा ही सशक्तिकरण की कुंजी है। जब तक हमारा गांव और समाज पूरी तरह साक्षर नहीं होगा, तब तक आत्मनिर्भर भारत का सपना अधूरा रहेगा। मेरा लक्ष्य है कि ग्राम गोंता और पूरे डभौरा क्षेत्र में कोई भी व्यक्ति निरक्षर न रहे। यह मेरे लिए नौकरी नहीं, बल्कि समाज सेवा है।”
उनकी इस पहल को स्थानीय स्तर पर सराहना मिल रही है। ग्रामीणों का मानना है कि समाज के युवाओं की भागीदारी से सरकारी योजनाओं का लाभ जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाने और शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
शत-प्रतिशत साक्षरता की दिशा में प्रयास
उल्लास नवभारत साक्षरता मिशन का उद्देश्य 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के ऐसे लोगों को बुनियादी साक्षरता एवं आवश्यक जीवन कौशल से जोड़ना है, जो औपचारिक शिक्षा से वंचित रह गए। ग्राम गोंता में चल रही यह पहल इसी उद्देश्य को जमीनी स्तर पर आगे बढ़ाने का प्रयास है।
शिक्षा की इस मुहिम की सफलता इस बात में है कि अधिक से अधिक ग्रामीण इससे जुड़ें और सीखी गई बातों का उपयोग अपने दैनिक जीवन में कर सकें। वैभव कुमार केसरवानी का प्रयास यह संदेश देता है कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए बड़े संसाधनों से अधिक जरूरी है सेवा भावना, निरंतरता और दूसरों को आगे बढ़ाने का संकल्प।
