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| रीवा-मऊगंज में खनिज संपदा के दोहन पर सवाल, नदियों और पहाड़ों के संरक्षण की चुनौती |
रीवा/मऊगंज। विंध्य क्षेत्र अपनी प्राकृतिक सुंदरता, नदियों, पहाड़ों और खनिज संपदा के लिए जाना जाता है। यहां के प्राकृतिक संसाधन क्षेत्र की अर्थव्यवस्था और रोजगार के महत्वपूर्ण आधार हैं, लेकिन इनके दोहन को लेकर पर्यावरण संरक्षण और सरकारी निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। रीवा और मऊगंज जिले में बालू, गिट्टी, पत्थर और पटिया के उत्खनन के साथ-साथ खनिज परिवहन की व्यवस्था को लेकर स्थानीय स्तर पर चिंता जताई जा रही है। मांग उठ रही है कि खनन गतिविधियों की वास्तविक स्थिति का आकलन कर नियमों के पालन की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
खनिज संसाधनों का उपयोग विकास कार्यों और निर्माण गतिविधियों के लिए आवश्यक है, लेकिन यह उपयोग निर्धारित नियमों और पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप होना चाहिए। यदि कहीं स्वीकृत सीमा से बाहर उत्खनन, बिना अनुमति खनन या परिवहन संबंधी नियमों का उल्लंघन हो रहा है, तो इसकी पहचान कर संबंधित जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कार्रवाई की जानी चाहिए।
टमस नदी के प्राकृतिक स्वरूप को लेकर चिंता
मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश की सीमा के निकट चाकघाट क्षेत्र से होकर बहने वाली टमस नदी को लेकर भी स्थानीय स्तर पर सवाल उठाए जा रहे हैं। शिकायतों में नदी से बालू और पत्थरों के उत्खनन के कारण उसके प्राकृतिक स्वरूप पर संभावित प्रभाव की बात कही गई है। स्थानीय लोगों के अनुसार, नदी के कुछ हिस्सों में पहले और अब की स्थिति में अंतर दिखाई देता है।
हालांकि, नदी के स्वरूप में बदलाव के कारणों की पुष्टि वैज्ञानिक अध्ययन और संबंधित विभागों के अभिलेखों से ही की जा सकती है। नदी की प्राकृतिक संरचना, जल प्रवाह, तलछट और आसपास के पर्यावरण पर खनन के प्रभावों का आकलन जरूरी है। इसके लिए संबंधित विभागों को नदी क्षेत्र का निरीक्षण कराना चाहिए तथा यह देखना चाहिए कि उत्खनन स्वीकृत सीमा और निर्धारित शर्तों के अनुरूप हो रहा है या नहीं।
भूजल स्तर में गिरावट के कारणों की जांच जरूरी
क्षेत्र में भूजल स्तर को लेकर भी चिंता व्यक्त की जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ स्थानों पर पानी प्राप्त करने के लिए पहले की तुलना में अधिक गहराई तक बोरिंग करानी पड़ रही है। कुछ शिकायतों में लगभग 27 फीट या उससे अधिक गहराई पर पानी मिलने का उल्लेख किया गया है।
लेकिन भूजल स्तर में बदलाव के लिए केवल खनन को जिम्मेदार मानना उचित नहीं होगा। वर्षा की मात्रा, भूगर्भीय संरचना, जल निकासी, कृषि एवं घरेलू उपयोग के लिए भूजल का दोहन और अन्य पर्यावरणीय कारक भी इसमें भूमिका निभा सकते हैं। इसलिए टमस नदी और आसपास के क्षेत्रों में भूजल संबंधी आंकड़ों का अध्ययन कर वास्तविक स्थिति सामने लाने की आवश्यकता है।
रीवा-मऊगंज में खनन गतिविधियों की निगरानी पर सवाल
रीवा संभाग में बालू, गिट्टी, पत्थर और पटिया का कारोबार निर्माण क्षेत्र से जुड़ी महत्वपूर्ण गतिविधि है। रीवा जिले की हुजूर, गुढ़, चोरहटा, मनगवां और सिरमौर क्षेत्र सहित मऊगंज जिले के विभिन्न इलाकों में खनिज उत्खनन को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं।
यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि प्रत्येक खनन स्थल पर स्वीकृत क्षेत्र, मात्रा और अनुमति की शर्तों का पालन हो। खनन स्थलों का नियमित निरीक्षण, सीमाओं का सत्यापन और पर्यावरणीय नियमों की जांच से अनियमितताओं की पहचान की जा सकती है। जहां उल्लंघन प्रमाणित हो, वहां नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
खनिज संपदा से राजस्व और रोजगार प्राप्त होना महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके साथ प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है। पहाड़ों की संरचना, प्राकृतिक जल निकासी और आसपास की भूमि पर पड़ने वाले प्रभावों की अनदेखी लंबे समय में गंभीर समस्याएं पैदा कर सकती है।
बालू परिवहन और ओवरलोडिंग की जांच की मांग
खनिज कारोबार में केवल उत्खनन ही नहीं, बल्कि परिवहन व्यवस्था की निगरानी भी महत्वपूर्ण है। स्थानीय स्तर पर सीधी, शहडोल और अन्य क्षेत्रों से रीवा तक बालू की आपूर्ति को लेकर चर्चा होती रही है। ऐसे में खनिज सामग्री के स्रोत, परिवहन दस्तावेज, रॉयल्टी और वाहनों में लोड की गई मात्रा की जांच आवश्यक है।
यदि किसी वाहन में निर्धारित क्षमता से अधिक खनिज लोड पाया जाता है या आवश्यक दस्तावेजों के बिना परिवहन किया जाता है, तो संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई होनी चाहिए। इससे सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ सरकारी राजस्व के नुकसान को रोकने में भी मदद मिल सकती है।
बेला चौराहा, विश्वविद्यालय क्षेत्र और अन्य खनिज परिवहन मार्गों पर वाहनों की आवाजाही तथा नियमों के पालन की जांच किए जाने की मांग भी उठाई जा रही है। संबंधित विभागों के संयुक्त निरीक्षण से परिवहन व्यवस्था की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
कथित अवैध वसूली के आरोपों की स्वतंत्र जांच हो
खनिज परिवहन से जुड़े कुछ लोगों की ओर से पुलिसकर्मियों द्वारा कथित रूप से नियमित रकम वसूले जाने के आरोप भी लगाए गए हैं। शिकायतकर्ता का दावा है कि कुछ स्थानों पर खनिज वाहनों से अवैध वसूली की जाती है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जाना चाहिए।
यदि संबंधित वाहन चालकों के बयान, दस्तावेज या अन्य साक्ष्य इन आरोपों की पुष्टि करते हैं, तो सक्षम अधिकारियों को निष्पक्ष जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए। किसी व्यक्ति या पुलिसकर्मी के विरुद्ध आरोप मात्र के आधार पर दोषी ठहराना उचित नहीं है।
इसी तरह, खनिज कारोबार से जुड़े कुछ लोगों की संपत्ति में कथित रूप से तेजी से वृद्धि होने के दावों की जांच भी केवल ठोस शिकायत और उपलब्ध वित्तीय अभिलेखों के आधार पर की जानी चाहिए। संपत्ति में वृद्धि अपने आप में किसी अवैध गतिविधि का प्रमाण नहीं है।
विभागों के बीच समन्वय से हो सकती है प्रभावी कार्रवाई
खनिज संपदा के संरक्षण और अवैध उत्खनन पर नियंत्रण के लिए खनिज विभाग तथा संबंधित खनन प्राधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण है। वहीं, पुलिस अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले अपराधों और कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में कार्रवाई करती है, जबकि परिवहन विभाग वाहनों की भार क्षमता और मोटर वाहन नियमों के पालन की जांच करता है।
यदि तीनों स्तरों पर समन्वित निगरानी की जाए, तो अवैध उत्खनन, बिना वैध दस्तावेज खनिज परिवहन और ओवरलोडिंग जैसी संभावित अनियमितताओं पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकता है। नियमित निरीक्षण और कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक किए जाने से जवाबदेही भी बढ़ सकती है।
प्राकृतिक संपदा का संरक्षण भविष्य की जिम्मेदारी
रीवा और मऊगंज में खनिज संपदा से जुड़े सवाल केवल कारोबार और राजस्व तक सीमित नहीं हैं। इनका संबंध नदियों, पहाड़ों, भूजल, कृषि और स्थानीय जनजीवन से भी है। इसलिए खनन गतिविधियों का वैज्ञानिक आकलन, नियमों का पालन और शिकायतों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
अब जरूरत है कि संबंधित विभाग शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए खनन स्थलों और परिवहन मार्गों का निरीक्षण करें। टमस नदी के प्राकृतिक स्वरूप और भूजल स्तर को लेकर उपलब्ध आंकड़ों का अध्ययन किया जाए तथा जहां नियमों का उल्लंघन प्रमाणित हो, वहां कार्रवाई की जाए।
