रबी बोवनी से पहले खाद-बीज की गुणवत्ता पर सवाल, किसानों ने मांगी निगरानी

रबी बोवनी से पहले खाद-बीज की गुणवत्ता पर सवाल, किसानों ने मांगी निगरानी

रीवा/मऊगंज। रबी सीजन की बोवनी का समय नजदीक आते ही रीवा और मऊगंज जिले के किसान खेतों को तैयार करने में जुट गए हैं। अलसी, राय, चना और मसूर की बोवनी के साथ गेहूं की खेती की तैयारियां भी शुरू हो रही हैं। इस बीच खाद-बीज की गुणवत्ता, कीटनाशक दवाओं की कीमतों और कृषि सामग्री की उपलब्धता को लेकर किसानों की चिंताएं सामने आ रही हैं। किसानों की मांग है कि बोवनी के महत्वपूर्ण समय में संबंधित विभाग बाजार की निगरानी बढ़ाएं, ताकि उन्हें गुणवत्तापूर्ण सामग्री उचित दरों पर मिल सके।

खाद-बीज की गुणवत्ता सबसे बड़ी चिंता

खेती में बीज की गुणवत्ता का सीधा असर अंकुरण, पौधों की वृद्धि और संभावित उत्पादन पर पड़ता है। किसानों का कहना है कि बोवनी के समय यदि गुणवत्ताविहीन बीज या प्रभावहीन कीटनाशक मिलते हैं, तो उनकी मेहनत और लागत दोनों प्रभावित हो सकते हैं।

अलसी, चना, मसूर, राय और गेहूं जैसी फसलों के लिए किसानों को प्रमाणित एवं उपयुक्त बीज उपलब्ध कराना जरूरी है। कृषि विभाग को दुकानों पर उपलब्ध बीजों के रिकॉर्ड, पैकेट पर दर्ज विवरण, बैच नंबर और वैधता संबंधी जानकारी की जांच करनी चाहिए। गुणवत्ता को लेकर संदेह होने पर नियमानुसार नमूने लेकर परीक्षण भी कराया जाना चाहिए।

कीटनाशकों की कीमतों में पारदर्शिता जरूरी

कीटनाशक दवाओं की बिक्री को लेकर भी किसानों के बीच सवाल उठ रहे हैं। किसानों का कहना है कि उन्हें उत्पाद की वास्तविक कीमत, उपलब्ध छूट और गुणवत्ता के बारे में स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए।

अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) से अधिक कीमत पर बिक्री नहीं की जा सकती, जबकि उससे कम कीमत पर उत्पाद बेचा जा सकता है। ऐसे में दुकानदारों को उत्पाद की कीमत स्पष्ट रखनी चाहिए और किसानों को खरीद का पक्का बिल देना चाहिए। इससे कीमतों को लेकर विवाद की स्थिति कम होगी और शिकायत होने पर कार्रवाई के लिए प्रमाण उपलब्ध रहेगा।

जमाखोरी और कालाबाजारी पर लगे रोक

रबी सीजन में खाद और बीज की मांग बढ़ने के साथ इनकी उपलब्धता सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण है। किसानों को आशंका है कि यदि आवश्यक कृषि सामग्री की आपूर्ति प्रभावित हुई, तो बोवनी के समय परेशानी बढ़ सकती है।

प्रशासन और कृषि विभाग को खाद-बीज की उपलब्धता, दुकानों के स्टॉक रजिस्टर और बिक्री अभिलेखों की जांच करनी चाहिए। जहां जमाखोरी, कालाबाजारी, निर्धारित नियमों के उल्लंघन या गुणवत्ताविहीन उत्पादों की बिक्री की शिकायत मिले, वहां जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

ग्रामीण दुकानों तक पहुंचे जांच दल

किसानों की समस्याओं का समाधान केवल कार्यालयों में बैठकर नहीं हो सकता। इसके लिए ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित खाद, बीज और कीटनाशक दुकानों का नियमित निरीक्षण जरूरी है। कृषि विभाग को किसानों की शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई करने के साथ जांच के निष्कर्ष भी स्पष्ट करने चाहिए।

बोवनी के समय प्रमाणित बीज, आवश्यक खाद और गुणवत्तापूर्ण कीटनाशकों की उपलब्धता किसानों के लिए बेहद अहम है। समय पर सामग्री नहीं मिलने या खराब गुणवत्ता का उत्पाद खरीदने से फसल की पूरी योजना प्रभावित हो सकती है।

आश्वासन नहीं, जमीन पर कार्रवाई की जरूरत

किसान बीज, खाद, डीजल, सिंचाई और मजदूरी पर बड़ी रकम खर्च करके फसल तैयार करते हैं। ऐसे में शुरुआती चरण में ही कृषि सामग्री की गुणवत्ता या कीमत को लेकर परेशानी उनकी आर्थिक स्थिति पर अतिरिक्त बोझ डाल सकती है।

रीवा और मऊगंज जिला प्रशासन तथा कृषि विभाग के सामने चुनौती है कि रबी सीजन के दौरान किसानों को गुणवत्तापूर्ण सामग्री उपलब्ध कराने के लिए प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करें। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग ग्रामीण क्षेत्रों में निरीक्षण और शिकायतों के निराकरण को कितनी प्राथमिकता देते हैं।

बड़ा सवाल यह है कि क्या बोवनी के इस महत्वपूर्ण समय में कृषि विभाग खाद-बीज की गुणवत्ता, उपलब्धता और बिक्री व्यवस्था की नियमित जांच करेगा? किसानों को ऐसी व्यवस्था की जरूरत है, जिसमें उनकी लागत सुरक्षित रहे और उन्हें फसल की शुरुआत से ही गुणवत्तापूर्ण कृषि सामग्री मिल सके।

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