रीवा-मऊगंज में अवैध शराब, नशा और जुआ-सट्टा: निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल

रीवा-मऊगंज में अवैध शराब, नशा और जुआ-सट्टा: निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल

रीवा/मऊगंज। रीवा एवं मऊगंज जिले में कथित अवैध शराब बिक्री, गांजा, नशीली कफ सिरप, प्रतिबंधित दवाओं और जुआ-सट्टे की गतिविधियों को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर इन गतिविधियों का दायरा ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहरी इलाकों तक होने के आरोप लगाए जा रहे हैं। ऐसे में आबकारी विभाग, पुलिस और जिला प्रशासन की निगरानी व्यवस्था तथा शिकायतों पर कार्रवाई की स्थिति को लेकर चर्चा तेज हो रही है।

हालांकि, इन गतिविधियों के व्यापक स्तर पर संचालन और इनसे जुड़े आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। ऐसे में जरूरी है कि संबंधित विभाग शिकायतों, दर्ज मामलों, जब्ती और की गई कार्रवाई के आधिकारिक आंकड़े सामने रखें, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।

3500 अवैध शराब बिक्री केंद्रों का दावा, सत्यापन जरूरी

रीवा एवं मऊगंज जिले में लगभग 3500 अवैध शराब बिक्री केंद्र संचालित होने का दावा किया जा रहा है। इस संख्या की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। यदि शिकायतों में बताए गए स्थानों पर अवैध बिक्री की गतिविधियां पाई जाती हैं, तो यह आबकारी विभाग के लिए गंभीर चुनौती हो सकती है।

आरोप हैं कि कुछ क्षेत्रों में छोटी दुकानों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के आसपास अवैध रूप से शराब बेचे जाने की आशंका है। इसके साथ ही लाइसेंस प्राप्त शराब दुकानों से जुड़े परिसरों और वहां संचालित कथित अहातों की स्थिति की भी नियमों के अनुरूप जांच की मांग उठ रही है।

सवाल यह है कि विभाग के पास अवैध बिक्री की शिकायतों का कितना रिकॉर्ड है और उन पर अब तक क्या कार्रवाई की गई है? क्षेत्रवार निरीक्षण और सत्यापन से ही दावों तथा वास्तविक स्थिति के बीच अंतर स्पष्ट हो सकता है।

नशीली दवाओं की आपूर्ति शृंखला की जांच की जरूरत

शराब के अलावा गांजा, नशीली कफ सिरप, प्रतिबंधित गोलियों और इंजेक्शन के कथित अवैध कारोबार को लेकर भी चिंता जताई जा रही है। खासकर युवाओं तक नशीले पदार्थों की पहुंच रोकना सामाजिक और कानून-व्यवस्था से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है।

ऐसे मामलों में पुलिस और औषधि नियंत्रण विभाग को अपने अधिकार क्षेत्र के अनुसार जांच करनी चाहिए। यदि अवैध भंडारण, परिवहन या बिक्री के प्रमाण मिलते हैं, तो केवल मौके पर पकड़े गए व्यक्तियों तक कार्रवाई सीमित रखने के बजाय आपूर्ति के स्रोत और वितरण नेटवर्क की भी जांच जरूरी है।

साथ ही, किसी दवा को प्रतिबंधित या अवैध बताने से पहले उसकी श्रेणी और लागू नियमों की पुष्टि की जानी चाहिए। कार्रवाई ठोस साक्ष्यों के आधार पर होनी चाहिए, ताकि वास्तविक दोषियों की पहचान की जा सके।

जुआ-सट्टे के संभावित नेटवर्क पर नजर

रीवा और मऊगंज में जुआ-सट्टे की गतिविधियों को लेकर भी शिकायतों की जांच की मांग की जा रही है। स्थानीय स्तर पर कुछ स्थानों और मोबाइल के माध्यम से सट्टा संचालित होने की आशंकाएं जताई जा रही हैं, लेकिन इनके व्यापक संचालन की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

पुलिस को प्राप्त शिकायतों का सत्यापन कर आवश्यकतानुसार कार्रवाई करनी चाहिए। जहां डिजिटल लेनदेन, मोबाइल रिकॉर्ड या अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य प्रासंगिक हों, वहां कानून के अनुरूप जांच की जानी चाहिए। यदि किसी संगठित नेटवर्क के प्रमाण मिलते हैं, तो उससे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी स्पष्ट की जानी चाहिए।

आबकारी विभाग और पुलिस की जवाबदेही पर सवाल

अवैध शराब और नशीले पदार्थों की बिक्री पर नियंत्रण के लिए आबकारी विभाग, पुलिस और जिला प्रशासन के बीच समन्वय आवश्यक है। ग्रामीण क्षेत्रों में नियमित गश्त, संदिग्ध स्थानों का सत्यापन और शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई से निगरानी व्यवस्था मजबूत हो सकती है।

प्रशासन को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि संबंधित क्षेत्रों में कितने निरीक्षण किए गए, कितने मामले दर्ज हुए, कितनी सामग्री जब्त की गई और कितने आरोपियों के विरुद्ध कार्रवाई हुई। आधिकारिक आंकड़ों के सामने आने से यह आकलन करने में मदद मिलेगी कि कार्रवाई कितनी प्रभावी रही है।

यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की मिलीभगत अथवा भ्रष्टाचार की शिकायत सामने आती है, तो उसकी निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए। बिना प्रमाण किसी व्यक्ति या विभाग को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा।

जनप्रतिनिधि भी उठाएं स्थानीय समस्याएं

अवैध शराब, नशीले पदार्थों और जुआ-सट्टे से संबंधित शिकायतों को उचित मंच तक पहुंचाने में स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। वे संबंधित अधिकारियों से क्षेत्रवार कार्रवाई का विवरण मांग सकते हैं और प्रभावित क्षेत्रों की समस्याओं को प्रशासन के समक्ष उठा सकते हैं।

जनता की अपेक्षा है कि सामाजिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था से जुड़े इन मुद्दों पर संबंधित पक्ष गंभीरता से काम करें। शिकायतकर्ताओं की पहचान और सुरक्षा का ध्यान रखते हुए ऐसी व्यवस्था भी होनी चाहिए, जिसमें लोग बिना भय के जानकारी दे सकें।

प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग

रीवा एवं मऊगंज जिले में कथित अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए निम्न बिंदुओं पर कार्रवाई की जरूरत है—

  1. अवैध शराब बिक्री के बताए जा रहे ठिकानों का क्षेत्रवार सत्यापन।

  2. खाद्य एवं औषधि नहीं, बल्कि संबंधित औषधि नियंत्रण और पुलिस एजेंसियों द्वारा नशीली दवाओं के मामलों की जांच।

  3. जुआ-सट्टे से जुड़ी शिकायतों और संभावित नेटवर्क की साक्ष्य-आधारित जांच।

  4. आबकारी विभाग और पुलिस की निरीक्षण व्यवस्था की समीक्षा।

  5. मिलीभगत या भ्रष्टाचार की शिकायतों की निष्पक्ष जांच।

  6. कार्रवाई, जब्ती और दर्ज मामलों के आधिकारिक आंकड़ों को सार्वजनिक करना।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि अवैध कारोबार से जुड़ी शिकायतों पर जमीनी स्तर पर कितनी प्रभावी कार्रवाई हो रही है? रीवा और मऊगंज के नागरिकों को पारदर्शी जांच, कानून के अनुसार कार्रवाई और उसके परिणामों की स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए।

अवैध कारोबार पर नियंत्रण और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है। अब आवश्यकता है कि दावों का सत्यापन हो, विभाग अपना पक्ष रखें और कार्रवाई के तथ्य सार्वजनिक किए जाएं।

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