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| 15 दिन से परमिट के लिए परेशान होने का दावा; संदीप यादव ने मारपीट और सोने की चेन छीनने का लगाया आरोप, परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी उठाए सवाल |
परमिट के लिए 15 दिन से आवेदन लंबित होने का दावा
संदीप यादव के अनुसार, वह अपनी बस का परमिट प्राप्त करने के लिए करीब 15 दिन पहले आवेदन कर चुके थे। परमिट जारी नहीं होने के कारण उनकी बस खड़ी थी, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान होने की बात कही जा रही है। सोमवार को वह इसी संबंध में परिवहन कार्यालय पहुंचे और कर्मचारी अनिल शर्मा से परमिट जारी करने की मांग की।
बस मालिक का आरोप है कि परमिट देने के बदले उनसे मोटी रकम मांगी गई। विरोध करने पर कार्यालय के भीतर अनिल शर्मा और कुछ अन्य कर्मचारियों ने उनके साथ मारपीट की तथा गले में पहनी सोने की चेन छीन ली। संदीप यादव के शरीर पर चोट के निशान होने की बात भी सामने आई है। हालांकि, घटना के सभी पहलुओं की पुष्टि पुलिस जांच और संबंधित साक्ष्यों के आधार पर ही हो सकेगी।
परिवहन कार्यालय की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
इस घटना के बाद परिवहन कार्यालय में परमिट प्रक्रिया, आवेदनों के निपटारे और कथित अवैध वसूली को लेकर सवाल उठ रहे हैं। शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है, ताकि स्पष्ट हो सके कि परमिट जारी करने में देरी क्यों हुई और विवाद किन परिस्थितियों में हुआ।
परिवहन अधिकारी आशुतोष सिंह भदौरिया की कार्यालय में मौजूदगी और विभागीय कामकाज को लेकर भी आरोप लगाए गए हैं। कुछ लोगों की ओर से कार्यालय में बिचौलियों के प्रभाव और काम कराने के बदले कथित रूप से रकम मांगे जाने की शिकायतें सामने आने की बात कही जा रही है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित विभाग और अधिकारियों का पक्ष सामने आना भी जरूरी है।
उड़नदस्ता दल की कार्रवाई पर भी जांच की मांग
परिवहन विभाग के उड़नदस्ता दल की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप हैं कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर वाहनों की जांच के दौरान कुछ कर्मचारियों और उनके साथ मौजूद लोगों द्वारा वाहन मालिकों के साथ दुर्व्यवहार तथा जबरन वसूली की जाती है। इन आरोपों की पुष्टि के लिए जांच, कार्रवाई के रिकॉर्ड और संबंधित वाहन चालकों के बयान महत्वपूर्ण होंगे।
नियमों के अनुसार वाहनों की जांच और बकाया कर सहित परिवहन संबंधी उल्लंघनों पर कार्रवाई पारदर्शी तरीके से की जानी चाहिए। यदि जांच में किसी कर्मचारी द्वारा अवैध वसूली, मारपीट या पद के दुरुपयोग की पुष्टि होती है, तो संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए।
कलेक्टर और वरिष्ठ अधिकारियों से निष्पक्ष जांच की अपेक्षा
परिवहन कार्यालय में कथित मारपीट और वसूली के आरोपों के बाद अब पुलिस, जिला प्रशासन और परिवहन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। मामले में शिकायत की निष्पक्ष जांच, पीड़ित के बयान, चोटों से संबंधित चिकित्सकीय दस्तावेज, कार्यालय में उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज और परमिट आवेदन की स्थिति की जांच से वास्तविकता स्पष्ट हो सकती है।
अब प्रमुख सवाल यह हैं कि संदीप यादव की शिकायत पर पुलिस ने क्या कार्रवाई की, परमिट आवेदन लंबित रहने का कारण क्या था और क्या विभागीय स्तर पर लगाए गए अन्य आरोपों की जांच कराई जाएगी? फिलहाल, आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।
