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| मऊगंज में पत्रकारों का सांकेतिक धरना, पुलिस प्रेस नोट की भाषा पर जताई आपत्ति |
मऊगंज। पुलिस द्वारा जारी प्रेस नोट में पत्रकारों और मीडिया से संबंधित कथित आपत्तिजनक एवं अमर्यादित शब्दावली के इस्तेमाल तथा पत्रकारों से जुड़े मामलों की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर मऊगंज प्रेस क्लब के पत्रकारों ने रविवार को भाजपा जिला कार्यालय के सामने सांकेतिक धरना दिया। पत्रकारों का आरोप है कि मऊगंज थाना प्रभारी राम सिंह की ओर से जारी एक प्रेस नोट में पत्रकारों के लिए “अमान्य पत्रकार” तथा “असामाजिक तत्वों द्वारा खबरें चलाए जाने” जैसी शब्दावली का इस्तेमाल किया गया। साथ ही प्रेस नोट में थाने से जुड़े मामलों को लेकर पुलिस से सवाल-जवाब करने वाले पत्रकारों के खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा का प्रकरण दर्ज किए जाने की बात कही गई। इसके बाद से पत्रकारों और पुलिस के बीच विवाद की स्थिति बनी हुई है।
पत्रकारों का कहना है कि इस मामले को लेकर वे पिछले करीब 15 दिनों से शिकायतों और ज्ञापनों के माध्यम से अपनी आपत्ति दर्ज करा रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। इसी के विरोध में रविवार को सांकेतिक धरना दिया गया। इस दौरान पत्रकारों ने “रघुपति राघव राजा राम... एसपी को सद्बुद्धि दे भगवान” जैसे नारे भी लगाए। धरने को समर्थन देने के लिए रीवा से भी करीब एक दर्जन पत्रकार मऊगंज पहुंचे।
प्रेस नोट की भाषा की निष्पक्ष समीक्षा की मांग
मऊगंज प्रेस क्लब की ओर से भाजपा जिलाध्यक्ष राजेंद्र मिश्रा को सौंपे गए ज्ञापन में 24 और 27 सितंबर को मऊगंज थाना पुलिस द्वारा जारी किए गए प्रेस नोटों की निष्पक्ष प्रशासनिक समीक्षा कराने की मांग की गई। विशेष रूप से 27 सितंबर के प्रेस नोट में “अमान्य पत्रकार” सहित पत्रकार और मीडिया समुदाय के संदर्भ में इस्तेमाल की गई शब्दावली के औचित्य की जांच की मांग उठाई गई है।
प्रेस क्लब का कहना है कि किसी व्यक्ति की पत्रकारिता संबंधी पहचान या वैधता का निर्धारण पुलिस की ओर से जारी प्रेस नोट की भाषा के आधार पर नहीं, बल्कि सक्षम विभागीय अभिलेखों और निर्धारित नियमों के आधार पर होना चाहिए। इसी को देखते हुए संबंधित पत्रकार के PRO लेटर सहित पत्रकारिता से जुड़े दस्तावेजों की सक्षम विभाग से जांच कराने और वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की मांग की गई है।
पत्रकारों ने यह भी कहा कि पुलिस की ओर से जारी होने वाले प्रेस नोट जनसंचार का महत्वपूर्ण माध्यम होते हैं। इसलिए उनमें पत्रकारों अथवा मीडिया संस्थानों के संबंध में इस्तेमाल की जाने वाली भाषा तथ्यात्मक, निष्पक्ष और मर्यादित होनी चाहिए। प्रेस क्लब ने भविष्य में ऐसी शब्दावली के इस्तेमाल को रोकने के लिए पुलिस विभाग को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने की मांग भी ज्ञापन में रखी है।
पूर्व विवाद और पुलिस कार्रवाई की जांच की मांग
ज्ञापन में संबंधित पत्रकार से जुड़े पूर्व विवाद, दर्ज एफआईआर और लंबित न्यायिक प्रकरणों की भी स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई है। प्रेस क्लब की ओर से स्पष्ट किया गया कि इस मांग का उद्देश्य किसी भी वैधानिक पुलिस कार्रवाई में हस्तक्षेप करना नहीं है, बल्कि पूरे मामले की निष्पक्षता सुनिश्चित करना है।
पत्रकारों का कहना है कि जांच के दौरान यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि कहीं व्यक्तिगत रंजिश, पूर्व विवाद या किसी प्रकार के पक्षपात का प्रभाव तो नहीं है। उनका कहना है कि पुलिस और पत्रकारों के बीच मतभेद हो सकते हैं, लेकिन किसी भी स्थिति में संवाद और संस्थागत प्रक्रिया का रास्ता बंद नहीं होना चाहिए।
पुलिस और मीडिया के बीच संवाद की मांग
प्रेस क्लब ने जिला स्तर पर पुलिस और मीडिया के बीच स्वस्थ एवं नियमित संवाद के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग भी की। पत्रकारों के अनुसार, पुलिस और मीडिया दोनों की अपनी-अपनी जिम्मेदारियां हैं। पुलिस कानून व्यवस्था और जांच से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराती है, जबकि पत्रकार उस जानकारी को जनता तक पहुंचाने का काम करते हैं। ऐसे में दोनों पक्षों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है।
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि यदि किसी प्रेस नोट में इस्तेमाल की गई आपत्तिजनक शब्दावली से किसी व्यक्ति या पत्रकार समुदाय की प्रतिष्ठा प्रभावित हुई है तो सक्षम स्तर पर आवश्यक कार्रवाई और स्थिति स्पष्ट करने के लिए स्पष्टीकरण जारी किया जाना चाहिए।
भाजपा जिलाध्यक्ष ने सुनी पत्रकारों की मांगें
धरने की जानकारी मिलने पर भाजपा जिलाध्यक्ष राजेंद्र मिश्रा पत्रकारों के बीच पहुंचे और उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने कहा कि पत्रकार लोकतंत्र के चौथे स्तंभ हैं और मऊगंज के पत्रकार लगातार जनसमस्याओं, भ्रष्टाचार तथा अन्य स्थानीय मुद्दों को सामने लाते रहे हैं।
उन्होंने कहा कि भाजपा संगठन के पास थाना प्रभारी या पुलिस अधीक्षक को हटाने का अधिकार नहीं है, लेकिन पत्रकारों द्वारा उठाई गई मांगों और पूरे मामले को प्रदेश भाजपा अध्यक्ष तथा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तक पहुंचाया जाएगा। उन्होंने पुलिस प्रेस नोट में पत्रकारों के लिए कथित अपमानजनक शब्दों के इस्तेमाल पर खेद जताते हुए कहा कि पत्रकारों के सम्मान के लिए वे उनके साथ खड़े रहेंगे।
भाजपा जिलाध्यक्ष के आश्वासन के बाद प्रेस क्लब ने फिलहाल सांकेतिक धरना समाप्त कर दिया। हालांकि पत्रकारों ने स्पष्ट किया कि वे मामले में आगे की कार्रवाई और उच्च स्तर पर होने वाली चर्चा का इंतजार करेंगे।
5 अक्टूबर को प्रदेश अध्यक्ष के दौरे पर रहेगी नजर
प्रेस क्लब अध्यक्ष टीएन मिश्रा ने कहा कि भाजपा जिलाध्यक्ष ने प्रदेश अध्यक्ष से चर्चा कर मामले में न्याय दिलाने का भरोसा दिया है। उन्होंने कहा कि पत्रकारों की मुख्य मांग पुलिस कार्रवाई को रोकना नहीं, बल्कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और पुलिस-प्रेस संबंधों में मर्यादा बनाए रखना है।
अब पत्रकारों की नजर 5 अक्टूबर को प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के मऊगंज दौरे पर है। प्रेस क्लब की ओर से इस दौरान प्रदेश नेतृत्व के सामने पुलिस प्रेस नोट की भाषा, पत्रकारों से जुड़े मामलों की जांच और पुलिस-मीडिया संवाद को लेकर अपनी मांगें रखने की तैयारी की जा रही है।
