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| एनएच-30 पर पांच गौवंश हादसे का शिकार, चार की मौत; पुलिस ने कराया सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार |
रीवा। रीवा जिले के मनगवां विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत गंगेव विकासखंड में राष्ट्रीय राजमार्ग-30 पर गुरुवार, 1 अक्टूबर 2026 की सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसे में पांच गौवंश अज्ञात वाहन की चपेट में आ गए। हादसा तेंदुआ-देवतालाब मोड़ से कुछ दूरी पर स्थित मुरुम खदान के पास हुआ। दुर्घटना में चार गौवंश की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक गौवंश घायल हो गया।
घटना की जानकारी मिलने के बाद घायल गौवंश के उपचार की व्यवस्था की गई। पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. विवेक मिश्रा ने घायल पशु का उपचार किया। वहीं सड़क पर मृत पड़े गौवंशों के कारण यातायात प्रभावित होने की स्थिति बनी। सूचना मिलने पर गढ़ थाना प्रभारी अवनीश पांडेय पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने मृत गौवंशों को सड़क से हटवाकर सम्मानपूर्वक दफन कराया।
हादसे के बाद हाईवे व्यवस्था पर सवाल
घटना के बाद स्थानीय स्तर पर राष्ट्रीय राजमार्ग पर गौवंशों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि यदि हाईवे के आसपास निराश्रित और आवारा गौवंशों को रोकने की प्रभावी व्यवस्था नहीं होगी तो इस तरह की दुर्घटनाओं का खतरा बना रहेगा। इससे पहले भी विभिन्न राष्ट्रीय राजमार्गों पर गौवंशों के सड़क हादसों में घायल और मृत होने की घटनाएं सामने आती रही हैं। हाल के वर्षों में अन्य क्षेत्रों में भी प्रशासन द्वारा हाईवे से गौवंशों को हटाकर गौशालाओं में रखने जैसे प्रयास किए गए हैं।
स्थानीय लोगों का सवाल है कि दुर्घटना संभावित स्थानों की पहचान कर वहां नियमित निगरानी, चेतावनी संकेत, प्रकाश व्यवस्था और गौवंशों को सड़क पर आने से रोकने के लिए स्थायी इंतजाम क्यों नहीं किए जा रहे हैं।
गौशाला व्यवस्था पर भी उठ रहे सवाल
स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठाया जा रहा है कि क्षेत्र में गौवंशों के संरक्षण के लिए उपलब्ध भूमि और गौशाला व्यवस्था का प्रभाव जमीन पर कितना दिखाई दे रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, यदि गौशालाओं में पर्याप्त क्षमता, चारा-पानी और देखरेख की व्यवस्था हो तथा निराश्रित गौवंशों को सुरक्षित रूप से वहां पहुंचाया जाए तो हाईवे पर होने वाली दुर्घटनाओं को कम किया जा सकता है।
हालांकि किसी विशेष गौशाला में व्यवस्था की कमी या सरकारी राशि के दुरुपयोग संबंधी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। ऐसे मामलों में संबंधित विभाग के रिकॉर्ड और स्थल निरीक्षण के आधार पर ही स्थिति स्पष्ट हो सकती है। विधानसभा के पुराने रिकॉर्ड में भी रीवा जिले में पंचायत स्तर पर गौशाला निर्माण और निराश्रित गौवंशों की देखरेख को लेकर सरकारी योजनाओं का उल्लेख मिलता है।
राजनीतिक दावों से अलग जमीन पर व्यवस्था की जरूरत
गौवंश संरक्षण को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर लगातार चर्चा होती रही है। लेकिन सड़क पर लगातार हो रही दुर्घटनाएं यह सवाल जरूर खड़ा करती हैं कि संरक्षण की योजनाओं और दावों का वास्तविक असर हाईवे पर कितना दिखाई दे रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल हादसे के बाद मृत गौवंशों को हटाना पर्याप्त नहीं है। दुर्घटना की पुनरावृत्ति रोकने के लिए हाईवे किनारे गौवंशों की आवाजाही रोकने, निराश्रित पशुओं को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और दुर्घटना संभावित स्थानों पर नियमित निगरानी की व्यवस्था जरूरी है।
