17.51 लाख की आय, 92 लाख की संपत्ति! सहकारी समिति के तत्कालीन प्रबंधक पर EOW ने दर्ज की दो FIR

17.51 लाख की आय, 92 लाख की संपत्ति! सहकारी समिति के तत्कालीन प्रबंधक पर EOW ने दर्ज की दो FIR

रीवा/सतना। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने सतना जिले की सेवा सहकारी समिति अमकुई के तत्कालीन प्रभारी प्रबंधक सुरेंद्र प्रताप सिंह बघेल के खिलाफ कार्रवाई करते हुए दो अलग-अलग FIR दर्ज की हैं। जांच में कथित तौर पर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने और खाद वितरण में अनियमितताओं के मामले सामने आए हैं। EOW के अनुसार, आरोपी की ज्ञात वैध आय करीब 17.51 लाख रुपये आंकी गई, जबकि संपत्ति और व्यय का कुल मूल्यांकन लगभग 92.16 लाख रुपये किया गया है।

जांच के मुताबिक, यह राशि वैध आय से करीब 426 प्रतिशत अधिक बताई गई है। कार्रवाई के दौरान लगभग 22.50 लाख रुपये की जमीन से संबंधित दस्तावेज, करीब 12 लाख रुपये के सोने के आभूषण, छह बैंक खातों और छह बीमा पॉलिसियों की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा महंगी गाड़ियों और नागौद में आलीशान मकान पर किए गए खर्च का भी उल्लेख किया गया है।

खाद वितरण में भी अनियमितताओं के आरोप

मामले की दूसरी जांच खाद वितरण से संबंधित है। EOW के मुताबिक, POS मशीन में 122 किसानों के नाम पर कथित फर्जी एंट्री किए जाने और यूरिया निर्धारित दर 593 रुपये प्रति क्विंटल के बजाय 600 रुपये प्रति क्विंटल में बेचने के आरोप सामने आए हैं। यदि जांच में ये आरोप प्रमाणित होते हैं, तो इससे खाद वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता और किसानों के हितों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं।

EOW ने आय से अधिक संपत्ति और खाद वितरण में कथित धोखाधड़ी के संबंध में अलग-अलग FIR दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है। फिलहाल मामले में आरोपों की जांच जारी है। आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।

भ्रष्टाचार पर कार्रवाई के बावजूद व्यवस्था पर सवाल

भ्रष्टाचार और सरकारी व्यवस्थाओं में अनियमितताओं के मामले लगातार सार्वजनिक चर्चा का विषय बने हुए हैं। सहकारी समितियां किसानों तक खाद और अन्य सुविधाएं पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ऐसे में खाद वितरण में कथित गड़बड़ी और आय से अधिक संपत्ति के आरोपों की निष्पक्ष जांच जरूरी है, ताकि जिम्मेदारी तय हो सके और किसानों का भरोसा कायम रहे।

दैनिक आज तक 24 भ्रष्टाचार से जुड़े मुद्दों को लगातार प्रमुखता से उठाते हुए सत्ता और प्रशासन का ध्यान आकर्षित करता रहा है। इसके बावजूद सामने आ रहे मामलों ने निगरानी व्यवस्था और जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े किए हैं। EOW की यह कार्रवाई भी इस बात को रेखांकित करती है कि शिकायतों और अनियमितताओं की जांच समयबद्ध तथा निष्पक्ष तरीके से होना आवश्यक है, ताकि दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई हो सके।

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