“गौशाला में जितना पैसा है, उतना कलेक्टर को भी नहीं मिलता!” डिप्टी डायरेक्टर जेएल साकेत से जुड़े कथित वीडियो ने उठाए सवाल

“गौशाला में जितना पैसा है, उतना कलेक्टर को भी नहीं मिलता!” डिप्टी डायरेक्टर जेएल साकेत से जुड़े कथित वीडियो ने उठाए सवाल

मऊगंज। पशुपालन विभाग के प्रभारी डिप्टी डायरेक्टर जेएल साकेत से जुड़ा करीब साढ़े छह मिनट का एक कथित स्टिंग वीडियो सामने आने के बाद गौशालाओं के संचालन, भुगतान व्यवस्था और विभागीय कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठने लगे हैं। गौशाला संचालक की ओर से उपलब्ध कराए गए वीडियो के कुछ अंशों में कथित तौर पर रकम की मांग, भुगतान और हिसाब-किताब से संबंधित बातचीत होने का दावा किया गया है। हालांकि, वीडियो की प्रामाणिकता और उसमें कही गई बातों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए मामले की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

14.70 लाख रुपये को लेकर क्या हैं आरोप?

गौशाला संचालक ने मामले में 14.70 लाख रुपये से जुड़े आरोप लगाए हैं। संचालक का दावा है कि उसके पास शिकायतों के समर्थन में बैंक स्टेटमेंट और कथित स्टिंग वीडियो मौजूद हैं। इसके अलावा, कथित बातचीत में 50 हजार रुपये के लेन-देन का भी उल्लेख होने की बात कही गई है।

संचालक के अनुसार, वीडियो के एक अंश में गौशाला को मिलने वाली राशि की तुलना करते हुए कथित तौर पर कहा गया कि गौशाला में जितना पैसा है, उतना क्लास-वन अधिकारी कलेक्टर को भी नहीं मिलता। यदि बातचीत की प्रामाणिकता और संदर्भ की पुष्टि होती है, तो यह गौशाला के लिए आवंटित राशि और उसके उपयोग की पारदर्शिता से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय हो सकता है।

हालांकि, केवल वीडियो के कुछ अंशों या शिकायतकर्ता के दावों के आधार पर किसी प्रकार की अनियमितता अथवा व्यक्ति की दोषसिद्धि का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

गौशाला संचालन और भुगतान व्यवस्था पर सवाल

गौशाला संचालक ने कथित बातचीत के संबंध में यह आरोप भी लगाया है कि गौशाला के संचालन की जिम्मेदारी संचालक पर छोड़ते हुए रकम की मांग पर जोर दिया गया। संचालक के मुताबिक, बातचीत में कथित तौर पर कहा गया कि गौशाला कैसे चलानी है, यह संचालक जाने, लेकिन संबंधित अधिकारी को पैसा चाहिए।

इस कथित बयान की सत्यता, पूरी बातचीत का संदर्भ और संबंधित परिस्थितियां जांच का विषय हैं। गौशालाओं के संचालन के लिए मिलने वाली राशि, भुगतान की प्रक्रिया और संबंधित वित्तीय रिकॉर्ड का परीक्षण किए जाने से स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

बैंक स्टेटमेंट और वीडियो का सत्यापन जरूरी

संचालक का कहना है कि उसने शिकायतों के समर्थन में बैंक स्टेटमेंट और वीडियो उपलब्ध कराए हैं। उसके अनुसार, फिलहाल वीडियो के कुछ सेकंड और बैंक विवरण सार्वजनिक किए गए हैं तथा आगे पूरी जानकारी साझा की जाएगी।

ऐसे में जरूरी है कि संबंधित बैंक रिकॉर्ड का सत्यापन किया जाए, वीडियो की प्रामाणिकता की जांच हो और बातचीत को पूरे संदर्भ में देखा जाए। साथ ही, 14.70 लाख रुपये से जुड़े दावों तथा कथित 50 हजार रुपये के लेन-देन की स्थिति भी दस्तावेजों के आधार पर स्पष्ट की जाए।

प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी निगाहें

मामले में यह जानना महत्वपूर्ण होगा कि संचालक की शिकायतों पर संबंधित विभाग या जिला प्रशासन ने क्या कार्रवाई की है। क्या शिकायत की जांच शुरू हुई है? क्या संबंधित अधिकारी से जवाब मांगा गया है? क्या वित्तीय दस्तावेजों का परीक्षण कराया गया है? इन सवालों के जवाब आधिकारिक प्रतिक्रिया और जांच के निष्कर्षों से ही सामने आ सकेंगे।

फिलहाल, वायरल या उपलब्ध कराए गए कथित वीडियो को अपने आप में आरोपों का प्रमाण नहीं माना जा सकता। संबंधित अधिकारी का पक्ष और दस्तावेजों का स्वतंत्र सत्यापन भी जरूरी है। निष्पक्ष जांच के बाद ही यह तय हो सकेगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और किसी प्रकार की अनियमितता हुई है या नहीं।



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