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| नईगढ़ी अस्पताल के लोकार्पण पत्रक से उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल का नाम गायब, मऊगंज में सियासी चर्चा |
मऊगंज। नईगढ़ी में 50 बिस्तरीय सिविल अस्पताल के लोकार्पण कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक चर्चा शुरू हो गई है। 22 अक्टूबर 2026 को आयोजित कार्यक्रम के पत्रक में मध्यप्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य विभाग के प्रभारी राजेंद्र शुक्ल का नाम और तस्वीर शामिल नहीं होने पर सवाल उठाए जा रहे हैं। जनपद पंचायत नईगढ़ी की अध्यक्ष ममता कुंज बिहारी तिवारी ने इस पर आपत्ति जताते हुए मामले को भाजपा की अंदरूनी गुटबाजी से जोड़ा है।
कार्यक्रम के पत्रक में मुख्य अतिथि के रूप में देवतालाब विधायक एवं पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम का नाम दर्ज है। विशिष्ट अतिथियों में रीवा सांसद जनार्दन मिश्र, नईगढ़ी नगर अध्यक्ष नागीता गुप्ता और भाजपा जिलाध्यक्ष मऊगंज राजेंद्र मिश्र के नाम शामिल हैं। ऐसे में उपमुख्यमंत्री का नाम और तस्वीर नहीं होने को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा हो रही है।
अस्पताल की स्वीकृति में भूमिका का हवाला
जनपद अध्यक्ष ममता कुंज बिहारी तिवारी के अनुसार, नईगढ़ी में 50 बिस्तरीय अस्पताल की मांग वर्ष 2022 से उठाई जा रही थी। उनका कहना है कि अस्पताल की स्वीकृति दिलाने में उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। ऐसे में लोकार्पण कार्यक्रम के पत्रक में उनका नाम शामिल नहीं होना सवाल खड़े करता है।
उन्होंने कहा कि अस्पताल क्षेत्र की जनता के लिए महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सुविधा है। यहां नईगढ़ी के साथ आसपास के ग्रामीण इलाकों और मऊगंज जनपद की विभिन्न ग्राम पंचायतों से भी मरीज उपचार के लिए पहुंचेंगे। उनके मुताबिक, ऐसे महत्वपूर्ण विकास कार्यों से जुड़े कार्यक्रम में संबंधित जनप्रतिनिधियों के योगदान को उचित सम्मान मिलना चाहिए।
पत्रक तैयार करने की प्रक्रिया पर सवाल
कार्यक्रम पत्रक पर मध्यप्रदेश पुलिस आवास एवं अधोसंरचना विकास निगम, भोपाल का उल्लेख है। निवेदक के रूप में सीएमएचओ रीवा सुधाकर पाण्डेय तथा संविदाकार ओम अश्वनी इंफ्रा प्रा. लि. का नाम दर्ज है। इसको लेकर सवाल उठ रहे हैं कि अतिथियों की सूची किसने तैयार की, उसका अनुमोदन किस स्तर पर हुआ और उपमुख्यमंत्री का नाम शामिल क्यों नहीं किया गया।
हालांकि, केवल कार्यक्रम पत्रक में नाम नहीं होने से जानबूझकर उपेक्षा या राजनीतिक गुटबाजी की पुष्टि नहीं होती। इस संबंध में आयोजकों और संबंधित भाजपा पदाधिकारियों का पक्ष सामने आना बाकी है। उनका पक्ष मिलने के बाद ही मामले की स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।
फिलहाल नईगढ़ी अस्पताल के लोकार्पण पत्रक को लेकर राजनीतिक चर्चाएं जारी हैं। क्षेत्र में यह सवाल उठ रहा है कि जनता की स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़े विकास कार्यों में राजनीतिक मतभेदों के बजाय जनहित और सामूहिक योगदान को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

