| डेढ़ साल से फरार कुख्यात बाघ शिकारी शेरु पारधी शहडोल से गिरफ्तार, पांच राज्यों में फैले वन्यजीव तस्करी नेटवर्क का खुलासा |
शहडोल - मध्यप्रदेश में बाघों के शिकार और उनके अवयवों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तस्करी करने वाले संगठित गिरोह के खिलाफ स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स (MPSTSF) को बड़ी सफलता मिली है। वन्यजीव मुख्यालय के निर्देश पर कार्रवाई करते हुए MPSTSF की क्षेत्रीय इकाई जबलपुर ने करीब डेढ़ वर्ष से फरार चल रहे कुख्यात शिकारी शेरु पारधी उर्फ शेरु सिंह, निवासी जिला कटनी, को शहडोल जिले के ब्यौहारी क्षेत्र से गिरफ्तार किया है। उसके साथ सह-आरोपी बिनौरी बाई पत्नी शेरु पारधी को भी गिरफ्तार किया गया है।
वन विभाग के अनुसार दोनों आरोपियों को 4 सितंबर 2026 को उस समय पकड़ा गया, जब वे कथित रूप से किसी वन्यजीव के शिकार की फिराक में थे। कार्रवाई के दौरान आरोपियों के कब्जे से छुरी, चाकू, कुल्हाड़ी और पक्षी पकड़ने का जाल बरामद किया गया। गिरफ्तारी के बाद दोनों को 5 सितंबर को विशेष न्यायालय जबलपुर के समक्ष पेश किया गया, जहां से दोनों को पांच दिन की फॉरेस्ट रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है।
पांच राज्यों तक फैला नेटवर्क
MPSTSF द्वारा इस मामले में वन अपराध प्रकरण क्रमांक 237/17, दिनांक 18 फरवरी 2025 दर्ज कर जांच की जा रही है। विवेचना के दौरान बाघों के शिकार और उनके अवयवों की तस्करी से जुड़े एक संगठित नेटवर्क के सक्रिय होने की जानकारी सामने आई है। अब तक इस मामले में मध्यप्रदेश, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, मिजोरम और मेघालय सहित पांच राज्यों से कुल आठ आरोपियों की गिरफ्तारी की जा चुकी है।
जांच में सामने आया है कि इस नेटवर्क में होशियारपुर (पंजाब), सोनीपत (हरियाणा), बद्दी (हिमाचल प्रदेश) और कटनी (मध्यप्रदेश) से जुड़े ऐसे लोग शामिल बताए गए हैं, जो वन्यजीवों, विशेष रूप से बाघों के शिकार में सक्रिय रहे हैं। एजेंसियां अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर नेटवर्क की अन्य कड़ियों और इससे जुड़े लोगों की जानकारी जुटाने में लगी हैं।
बाघ के अवयवों की तस्करी की आशंका
विवेचना के अनुसार वर्ष 2024-25 के दौरान इस गिरोह द्वारा महाराष्ट्र, तेलंगाना, उत्तराखंड, मध्यप्रदेश सहित देश के अलग-अलग राज्यों में बाघों का शिकार किए जाने और उनकी हड्डियों सहित अन्य अवयवों को मेघालय, असम और मिजोरम के कुछ तस्करों तक पहुंचाए जाने की जानकारी सामने आई है।
जांच एजेंसियों के अनुसार इन अवयवों का अवैध कारोबार आगे म्यांमार स्थित एक कथित सरगना के माध्यम से किए जाने की जानकारी मिली है। आशंका जताई जा रही है कि वन्यजीवों के इन अवैध अवयवों को आगे चीन और अन्य देशों में मौजूद अवैध वन्यजीव बाजार की मांग पूरी करने के लिए भेजा जाता रहा हो। हालांकि अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़े इन पहलुओं की पुष्टि के लिए जांच अभी जारी है।
मुखबिर तंत्र से मिली अहम सूचना
फरार आरोपी शेरु पारधी की गिरफ्तारी MPSTSF के लिए चुनौती बनी हुई थी। उसकी तलाश के लिए विभाग ने अपना मुखबिर तंत्र सक्रिय किया। सूचना मिलने के बाद विशेष टीम गठित कर शहडोल और आसपास के क्षेत्रों में भेजी गई। टीम ने कई दिनों तक योजनाबद्ध तरीके से निगरानी रखी और संभावित ठिकानों की जानकारी जुटाई।
इसके बाद ब्यौहारी क्षेत्र में घेराबंदी कर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। कार्रवाई के दौरान उनके पास से मिले सामान को भी जांच में शामिल किया गया है। अधिकारियों द्वारा आरोपियों से पूछताछ कर यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि वे किस उद्देश्य से क्षेत्र में मौजूद थे और उनके संपर्क किन लोगों से थे।
कुख्यात शिकारी अजीत पारधी का भाई
गिरफ्तार शेरु पारधी को कुख्यात बाघ शिकारी अजीत पारधी का भाई बताया गया है। वन विभाग के अनुसार अजीत पारधी भी अपने गिरोह के साथ वन्यजीवों के शिकार से जुड़े मामलों में सक्रिय रहा है। शेरु पारधी की तलाश लंबे समय से विभिन्न एजेंसियों द्वारा की जा रही थी।
जानकारी के अनुसार शेरु पारधी के खिलाफ कर्नाटक में वर्ष 2002 और महाराष्ट्र में वर्ष 2013 में वन अपराध के मामले दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। इनमें से एक मामले की जांच सीबीआई द्वारा किए जाने का भी उल्लेख है। महाराष्ट्र वन विभाग द्वारा शेरु पारधी को फरार घोषित किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
नेटवर्क की आगे की कड़ियां खंगाल रही टीम
फिलहाल पांच दिन की फॉरेस्ट रिमांड के दौरान जांच एजेंसी आरोपियों से पूछताछ कर रही है। पूछताछ में बाघ शिकार से जुड़े पुराने मामलों, संभावित सहयोगियों, अवयवों की खरीद-फरोख्त, तस्करी के रास्तों और अंतरराज्यीय एवं अंतरराष्ट्रीय संपर्कों की जानकारी जुटाने पर जोर दिया जा रहा है।
शेरु पारधी की गिरफ्तारी को वन्यजीव अपराध के खिलाफ चल रही कार्रवाई में महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है। अब जांच एजेंसियों की नजर इस नेटवर्क से जुड़े अन्य संभावित आरोपियों और उन लोगों तक पहुंचने पर है, जो कथित रूप से बाघों के अवयवों की अवैध खरीद-फरोख्त और तस्करी में शामिल हो सकते हैं।