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| जांच कमेटी की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल, छात्रों के बयान लिए बिना कैसे पूरी हुई जांच? |
मनगवां - शासकीय नवीन महाविद्यालय मनगवां में छात्रों से कथित रूप से राशि लिए जाने की शिकायत की जांच के लिए उच्च शिक्षा विभाग के अतिरिक्त संचालक द्वारा गठित तीन सदस्यीय जांच समिति की कार्यप्रणाली पर अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं। शिकायतकर्ता ने जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए उच्च शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से निष्पक्ष एवं स्वतंत्र रूप से पुनः जांच कराने की मांग की है। शिकायतकर्ता का कहना है कि जब पूरे मामले की शिकायत छात्रों से राशि लिए जाने को लेकर की गई थी, तो जांच समिति ने संबंधित छात्रों को बुलाकर उनके बयान क्यों नहीं लिए? आरोप यह भी है कि समिति द्वारा मुख्य रूप से महाविद्यालय के शिक्षकों एवं स्टाफ से ही प्रतिवेदन लिया गया। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जिस पक्ष से कथित राशि लिए जाने की शिकायत है, उसी पक्ष यानी छात्रों की बात जाने बिना जांच किस आधार पर पूरी की गई? जांच समिति के गठन को लेकर भी सवाल खड़े किए गए हैं। शिकायतकर्ता के अनुसार तीन सदस्यीय जांच समिति के साथ अतिरिक्त संचालक स्वयं महाविद्यालय पहुंचे। ऐसे में यह प्रश्न उठाया जा रहा है कि यदि समिति को स्वतंत्र रूप से जांच करनी थी तो उसे स्वतंत्र रूप से कार्य करने का अवसर क्यों नहीं दिया गया?
आधे घंटे में गंभीर मामले की जांच पर सवाल
शिकायतकर्ता का आरोप है कि जांच समिति ने महाविद्यालय का निरीक्षण शाम करीब 4 बजे किया और लगभग आधे घंटे के आसपास की कार्रवाई के बाद महाविद्यालय से रवाना हो गई। सवाल यह है कि छात्रों से कथित राशि लेने जैसे गंभीर मामले में छात्रों के बयान, दस्तावेज, भुगतान संबंधी रिकॉर्ड, वीडियो एवं अन्य साक्ष्यों की जांच इतने कम समय में कैसे पूरी हो सकती है?
सबसे महत्वपूर्ण सवाल शिकायतकर्ता को जांच की सूचना नहीं दिए जाने को लेकर भी है।
शिकायतकर्ता का कहना है कि उसे न तो जांच के दौरान बुलाया गया और न ही अपना पक्ष एवं उपलब्ध साक्ष्य प्रस्तुत करने का पर्याप्त अवसर दिया गया।
पहले से दिए आवेदन फिर स्टाफ से क्यों लिखवाए गए?
शिकायतकर्ता ने यह भी सवाल उठाया है कि उसके द्वारा पहले से लिखित आवेदन में लगाए गए आरोप एवं बिंदु उपलब्ध होने के बावजूद उन्हीं विषयों से संबंधित आवेदन स्टाफ से दोबारा लिखवाए जाने की आवश्यकता क्यों पड़ी? इससे जांच की निष्पक्षता और प्रक्रिया को लेकर संदेह उत्पन्न होना स्वाभाविक बताया जा रहा है।
फोन-पे और वीडियो की जांच क्यों नहीं?
मामले में यदि फोन-पे लेनदेन एवं वीडियो जैसे डिजिटल साक्ष्य उपलब्ध कराए गए थे, तो उनकी तकनीकी जांच क्यों नहीं कराई गई यह भी बड़ा सवाल है। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि संबंधित फोन-पे लेनदेन की जांच, संबंधित खातों एवं मोबाइल नंबरों का सत्यापन तथा वीडियो की वास्तविकता की तकनीकी जांच कराई जाए, ताकि मामले की सच्चाई सामने आ सके। शिकायतकर्ता ने उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों से मांग की है कि पूर्व जांच की पूरी प्रक्रिया की समीक्षा कर स्वतंत्र एवं उच्च स्तरीय जांच समिति से पुनः जांच कराई जाए। साथ ही संबंधित छात्रों के बयान दर्ज कराए जाएं, शिकायतकर्ता को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाए तथा उपलब्ध डिजिटल एवं दस्तावेजी साक्ष्यों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। अब देखना यह है कि उच्च शिक्षा विभाग इन गंभीर सवालों पर क्या जवाब देता है और क्या मामले की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए दोबारा जांच कराई जाती है।
