सरकारी अस्पताल में डॉक्टरों की मौजूदगी पर सवाल, निजी क्लीनिक में मरीजों की भीड़

सरकारी अस्पताल में डॉक्टरों की मौजूदगी पर सवाल, निजी क्लीनिक में मरीजों की भीड़

रीवा। शासकीय अस्पताल में चिकित्सकों की निर्धारित समय पर मौजूदगी को लेकर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय नागरिकों और मरीजों की ओर से डॉ. मनोज इंदुलकर और डॉ. पद्मा शुक्ला (गायनी) की कार्यप्रणाली की जांच की मांग की गई है। आरोप है कि दोनों चिकित्सक सरकारी अस्पताल में निर्धारित ड्यूटी समय के दौरान पर्याप्त समय नहीं देते, जबकि निजी क्लीनिक में मरीजों की भीड़ देखी जा रही है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि सरकारी अस्पताल में डॉक्टरों के उपलब्ध नहीं होने से उपचार के लिए आने वाले गरीब और जरूरतमंद मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। कई मरीजों को लंबे समय तक इंतजार करने के बाद वापस लौटना पड़ता है या निजी चिकित्सा सुविधा का सहारा लेना पड़ता है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

नागरिकों ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि जांच के दौरान संबंधित चिकित्सकों का ड्यूटी रोस्टर, बायोमेट्रिक उपस्थिति, अस्पताल में वास्तविक उपस्थिति और निजी क्लीनिक में मरीज देखने के समय का मिलान किया जाना चाहिए।

शिकायतकर्ताओं के अनुसार यदि जांच में सरकारी ड्यूटी के दौरान अनियमितता या नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो संबंधित अधिकारियों को नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए। वहीं, यदि आरोप सही नहीं पाए जाते हैं तो स्थिति भी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट की जानी चाहिए, ताकि चिकित्सकों और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर बनी किसी भी गलतफहमी को दूर किया जा सके। मामले में स्वास्थ्य विभाग की जांच और संबंधित चिकित्सकों का पक्ष सामने आने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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