डालमिया सीमेंट कंपनी पर ग्रामीणों का गंभीर आरोप, भूमि उपयोग और रोजगार को लेकर बढ़ा विवाद

डालमिया सीमेंट कंपनी पर ग्रामीणों का गंभीर आरोप, भूमि उपयोग और रोजगार को लेकर बढ़ा विवाद

रीवा - जिले के कचूर, गढ़वा और नौबस्ता क्षेत्र के ग्रामीणों ने डालमिया भारत सीमेंट कंपनी के प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कंपनी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ग्रामीणों का आरोप है कि कंपनी प्रबंधन द्वारा खनिज पत्थरों का विधि-विरुद्ध उत्खनन एवं परिवहन किया जा रहा है तथा किसानों की निजी भूमि का उपयोग उनकी अनुमति के बिना करने का प्रयास किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि जब भूमि स्वामी अपनी जमीन से कंपनी को निस्तार एवं अन्य उपयोग की अनुमति देने से मना करते हैं तो कंपनी के सुरक्षा कर्मियों द्वारा दबाव बनाया जाता है। किसानों ने आरोप लगाया कि विरोध करने पर उनके साथ मारपीट की गई और बाद में पुलिस में उनके खिलाफ झूठी शिकायतें दर्ज कराई गईं।

स्थानीय ग्रामीणों में कोमल सिंह, राघव सिंह, भोला साकेत, मनोज तिवारी, पुष्पेंद्र शुक्ला, अश्वनी द्विवेदी सहित अन्य लोगों ने बताया कि पूर्व में जेपी सीमेंट कंपनी की खदानों के लिए उन्होंने अपनी भूमि दी थी, जिसके बदले प्रभावित परिवारों को रोजगार भी दिया गया था। लेकिन अब डालमिया भारत सीमेंट द्वारा संचालन संभालने के बाद कई स्थानीय लोगों को नौकरी से हटा दिया गया है। इससे क्षेत्र में असंतोष बढ़ गया है।

ग्रामीणों का आरोप है कि कंपनी जेपी सीमेंट के समय हुए समझौते की शर्तों का पालन नहीं कर रही है। उनका कहना है कि यदि प्रभावित परिवारों को रोजगार नहीं दिया जाता तो वे अपनी भूमि से किसी भी प्रकार का निस्तार या उपयोग नहीं करने देंगे। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि खदान क्षेत्र में भरे पानी को पंप के माध्यम से उनकी भूमि से पाइपलाइन बिछाकर नहर तक छोड़ा जा रहा है, जिसका उन्होंने विरोध किया है। उनका कहना है कि बिना सहमति निजी भूमि का उपयोग स्वीकार नहीं किया जाएगा।

कचूर निवासी सुनील सिंह ने दावा किया कि उनकी भूमि खसरा क्रमांक 501/1/1, रकबा 0.117 हेक्टेयर, कभी भी जेपी सीमेंट कंपनी को नहीं दी गई थी। इसके बावजूद कंपनी प्रबंधन द्वारा उनकी भूमि का उपयोग और कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा है, जिसका वे पुरजोर विरोध करेंगे। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया और कथित तौर पर भूमि उपयोग एवं रोजगार संबंधी विवाद का समाधान नहीं हुआ तो क्षेत्र के किसान एकजुट होकर आंदोलन और प्रदर्शन शुरू करेंगे।

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