त्योहार पर जागा खाद्य विभाग, कार्रवाई के बाद भी सवाल बाकी

 

त्योहार पर जागा खाद्य विभाग, कार्रवाई के बाद भी सवाल बाकी

रीवा - रक्षाबंधन के दौरान खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई अब खुद सवालों के घेरे में आ गई है। सिरमौर चौराहा स्थित बृजवासी मिष्ठान भंडार के निरीक्षण के दौरान पनीर और रसगुल्लों में कथित तौर पर कीड़े मिलने का मामला सामने आया। खाद्य विभाग ने प्रतिष्ठान का लाइसेंस निलंबित कर दिया, लेकिन इसके बाद प्रतिष्ठान को सील क्यों नहीं किया गया और कार्रवाई के बाद संचालन कैसे जारी रहा, इसे लेकर सवाल उठ रहे हैं। खाद्य सुरक्षा अधिकारी अमरीश द्विवेदी और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने मिष्ठान भंडार का निरीक्षण किया था। जांच के दौरान खाद्य सामग्री में कथित रूप से कीड़े पाए जाने के बाद विभाग ने लाइसेंस निलंबन की कार्रवाई की। हालांकि, इसी कार्रवाई को लेकर अब प्रक्रिया और निगरानी पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

लाइसेंस निलंबित, फिर सील क्यों नहीं?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि जांच में खाद्य सामग्री उपभोग के लिए अनुपयुक्त पाई गई थी, तो कार्रवाई केवल लाइसेंस निलंबन तक ही क्यों सीमित रही? क्या ऐसी स्थिति में प्रतिष्ठान को तत्काल बंद या सील करने की आवश्यकता थी? यदि सील करना नियमों के तहत आवश्यक नहीं था, तो इसकी स्पष्ट स्थिति क्या है? कार्रवाई के बाद प्रतिष्ठान के संचालन और खाद्य सुरक्षा मानकों की निगरानी किस स्तर पर की गई, यह भी जांच का महत्वपूर्ण बिंदु बन गया है।

फोन पर प्रभावशाली व्यक्ति से बातचीत की चर्चा

इसी बीच सूत्रों के हवाले से किसी प्रभावशाली व्यक्ति अथवा मंत्री से फोन पर बातचीत कराए जाने की चर्चा भी सामने आई है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही संभव होगी। यदि ऐसी कोई बातचीत हुई थी, तो उसकी भूमिका और कार्रवाई पर उसके प्रभाव की भी पड़ताल जरूरी होगी।

त्योहारों पर ही क्यों बढ़ती है सक्रियता?

यह मामला खाद्य विभाग की नियमित निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़ा करता है। त्योहारों के दौरान मिठाइयों और खाद्य पदार्थों की जांच तेज होती है, लेकिन सवाल यह है कि क्या मिलावट और दूषित खाद्य सामग्री पर निगरानी पूरे साल समान रूप से होती है? कार्रवाई के बाद संबंधित प्रतिष्ठान की दोबारा जांच कौन करता है और यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किसकी है कि निलंबित लाइसेंस के बावजूद नियमों का उल्लंघन न हो—इन सवालों के जवाब भी महत्वपूर्ण हैं।

अब कलेक्टर की जांच पर टिकी निगाह

मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी ने पूरे प्रकरण की जांच के निर्देश दिए हैं। जांच में कार्रवाई की प्रक्रिया, प्रतिष्ठान के संचालन और सामने आए आरोपों से जुड़े तथ्यों की पड़ताल की जाएगी। अब सबसे बड़ा सवाल यही है—जांच में गलती प्रतिष्ठान की सामने आती है, कार्रवाई में चूक की या फिर निगरानी व्यवस्था की? इसका जवाब जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

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