![]() |
| नशे के खिलाफ कार्रवाई के बीच नई तरकीब! नाबालिगों से कराया जा रहा सामान ढोने और अन्य काम, पुलिस की निगरानी पर उठे सवाल |
रीवा/मऊगंज - नशे के खिलाफ शासन और पुलिस प्रशासन की लगातार कार्रवाई के बावजूद रीवा एवं मऊगंज जिले में नशे के अवैध कारोबार को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। मौजूदा हालात को देखकर “तू डाल-डाल, मैं पात-पात” वाली कहावत चरितार्थ होती नजर आ रही है। एक ओर देश के प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री, प्रदेश के मुख्यमंत्री से लेकर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी और थाना स्तर तक नशे के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कथित नशा कारोबारी पुलिस की कार्रवाई से बचने के लिए नए-नए तरीके अपनाने में जुटे बताए जा रहे हैं।
सबसे गंभीर बात यह सामने आ रही है कि कुछ स्थानों पर नाबालिग बच्चों से सामान ढोने अथवा अन्य छोटे-मोटे काम कराए जाने की शिकायतें चर्चा में हैं। यदि जांच में यह बात सही पाई जाती है कि नशीले पदार्थों की तस्करी या वितरण से जुड़े लोगों द्वारा नाबालिगों का इस्तेमाल किया जा रहा है, तो यह मामला केवल नशे के कारोबार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बाल संरक्षण से जुड़े गंभीर कानूनी प्रावधान भी लागू हो सकते हैं।
कार्रवाई से बचने की कोशिश या पुलिस की आंखों में धूल?
बताया जा रहा है कि नशे के कारोबार से जुड़े लोगों के बीच यह धारणा बन रही है कि नाबालिगों को सामने रखने से वे सीधे पुलिस की कार्रवाई से बच सकते हैं। हालांकि, यह सोच कितनी गलत है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि किसी भी मामले की निष्पक्ष और गहन जांच होने पर पुलिस सामान की सप्लाई, उसके स्रोत, भुगतान, मोबाइल संपर्क, वाहन और पीछे काम करने वाले लोगों तक पहुंच सकती है।
यदि किसी नाबालिग का इस्तेमाल नशीले पदार्थों की सप्लाई या किसी अवैध गतिविधि में किया जा रहा है, तो उसके पीछे कौन है, उसे किसने काम पर लगाया, सामान किसका था और उसे कहां पहुंचाया जाना था—इन सभी बिंदुओं की जांच से पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सकता है।
गढ़ सहित कई क्षेत्रों में गतिविधियों की चर्चा
रीवा जिले के गढ़, लोरी, कटरा, घुमा, लालगांव सहित अन्य क्षेत्रों में नशे के अवैध कारोबार को लेकर समय-समय पर शिकायतें और चर्चाएं सामने आती रही हैं। हालांकि इन स्थानों पर वर्तमान में नाबालिगों के माध्यम से नशीले पदार्थों का कारोबार कराया जा रहा है या नहीं, यह जांच का विषय है। इसलिए पुलिस को शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जमीनी स्तर पर सत्यापन करने की आवश्यकता है।
बीट व्यवस्था और खुफिया तंत्र की भूमिका अहम
नशे के कारोबार पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए केवल कभी-कभार बड़ी कार्रवाई पर्याप्त नहीं होगी। इसके लिए बीट प्रभारी, थाना पुलिस और खुफिया तंत्र को लगातार सक्रिय रहना होगा। यदि किसी क्षेत्र में लंबे समय से नशे का कारोबार संचालित होने की शिकायतें मिल रही हैं, तो वहां की पुलिसिंग और निगरानी व्यवस्था की भी समीक्षा की जानी चाहिए। सवाल यह भी है कि यदि किसी क्षेत्र में नशे का कारोबार खुले तौर पर या लगातार शिकायतों के बावजूद संचालित होने की बात सामने आती है, तो स्थानीय स्तर पर इसकी सूचना संबंधित अधिकारियों तक क्यों नहीं पहुंचती? क्या पुलिस की गश्त और मुखबिर तंत्र पर्याप्त रूप से सक्रिय है? क्या बीट स्तर पर नियमित समीक्षा हो रही है?
नाबालिगों का इस्तेमाल हुआ तो जिम्मेदारी तय होना जरूरी
नशे के कारोबार में बच्चों का इस्तेमाल किसी भी स्थिति में गंभीर विषय है। बच्चे अपराध के लिए इस्तेमाल होने वाले साधन नहीं, बल्कि संरक्षण के हकदार हैं। यदि जांच में यह प्रमाणित होता है कि किसी नशा कारोबारी ने पुलिस कार्रवाई से बचने के लिए नाबालिग को अपने नेटवर्क में इस्तेमाल किया, तो ऐसे व्यक्ति के खिलाफ उपलब्ध कानून के तहत कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही नाबालिग की पहचान और हितों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करना पुलिस एवं संबंधित बाल संरक्षण तंत्र की जिम्मेदारी होगी।
वरिष्ठ अधिकारियों से सघन जांच की मांग
रीवा-मऊगंज में नशे के खिलाफ चल रही कार्रवाई को प्रभावी बनाने के लिए अब केवल नशीले पदार्थों की बरामदगी तक सीमित रहने के बजाय पूरे नेटवर्क की जांच जरूरी है। नशे का स्रोत कौन है, माल कहां से आता है, किन लोगों तक पहुंचता है और उसके वितरण में कौन-कौन शामिल हैं—इन सभी कड़ियों को जोड़कर कार्रवाई किए जाने की जरूरत है।
यदि नाबालिगों को माध्यम बनाकर कानून से बचने की कोशिश की जा रही है, तो यह पुलिस के लिए भी एक नई चुनौती है। ऐसे मामलों में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों द्वारा संबंधित क्षेत्रों की विशेष निगरानी, संदिग्ध गतिविधियों की जांच और आवश्यकता पड़ने पर बीट स्तर के पुलिसकर्मियों की जवाबदेही तय करना आवश्यक होगा।
नशे के खिलाफ सरकार की मुहिम तभी पूरी तरह सफल मानी जाएगी, जब नशे के बड़े नेटवर्क के साथ-साथ उन तरीकों पर भी शिकंजा कसे जो कार्रवाई से बचने के लिए अपनाए जा रहे हैं। अब देखना यह है कि पुलिस इन शिकायतों की तह तक पहुंचकर वास्तविक तस्वीर सामने लाती है या नशे के कारोबारी हर बार नई तरकीब निकालकर कार्रवाई से बचते रहते हैं।
