रीवा-सीधी हाईवे बना हादसे का गवाह, 5 मौतों के बाद प्रशासन की तैयारियों पर उठे सवाल

रीवा-सीधी हाईवे बना हादसे का गवाह, 5 मौतों के बाद प्रशासन की तैयारियों पर उठे सवाल

रीवा। रीवा-सीधी राष्ट्रीय राजमार्ग पर बुधवार शाम करीब 4 बजे बदवार बस स्टैंड के पास हुए भीषण सड़क हादसे ने पूरे विंध्य को झकझोर दिया। सीधी की ओर जा रही यात्री बस को सामने से आ रहे तेज रफ्तार ट्रक ने टक्कर मार दी। टक्कर के बाद बस अनियंत्रित होकर सड़क किनारे गहरी खाई में जा गिरी। हादसे में पांच लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि दो दर्जन से अधिक यात्री घायल बताए गए हैं। घायलों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। गंभीर रूप से घायलों का उपचार रीवा के संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय में किया जा रहा है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार बस बुधवार दोपहर करीब 3 बजे रीवा बस स्टैंड से सीधी जिले के बघोर के लिए रवाना हुई थी। बदवार के पास पहुंचते ही सीधी से रीवा की ओर आ रहे ट्रक ने बस को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि बस सड़क से नीचे गहरी खाई में जा गिरी। बस के भीतर यात्रियों में चीख-पुकार मच गई।

स्थानीय लोगों ने संभाला मोर्चा

हादसे के बाद आसपास मौजूद स्थानीय लोग तत्काल मौके पर पहुंचे। बस के अंदर फंसे यात्रियों को बाहर निकालने का प्रयास शुरू किया गया। स्थानीय लोगों ने कई घायलों को बाहर निकालकर प्राथमिक मदद दी और पुलिस को घटना की सूचना दी। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। कलेक्टर रीवा नरेन्द्र सूर्यवंशी, पुलिस अधीक्षक डॉ. गुरकरण सिंह सहित प्रशासन और पुलिस के अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। इसके बाद घायलों को उपचार के लिए संजय गांधी अस्पताल भेजा गया। रीवा अपर कलेक्टर अनुराग तिवारी अस्पताल पहुंचकर उपचार व्यवस्था की निगरानी में जुटे रहे। रीवा सांसद और विधायक के भी घटनास्थल पर पहुंचने की जानकारी है।

एक घंटे बाद एंबुलेंस पहुंचने का दावा

हादसे को लेकर स्थानीय लोगों ने राहत और बचाव व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, एंबुलेंस और पुलिस के घटनास्थल पर पहुंचने में कथित रूप से काफी समय लगा। स्थानीय लोगों का दावा है कि करीब एक घंटे तक उन्होंने अपने स्तर पर राहत एवं बचाव कार्य किया और बस में फंसे लोगों को बाहर निकालने में मदद की। हालांकि घटनास्थल पर प्रशासनिक अमले की वास्तविक प्रतिक्रिया समय और राहत व्यवस्था को लेकर आधिकारिक तौर पर विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है। हादसे के बाद मौके पर भीड़ जमा हो गई थी। ऐसे में राहत कार्य के दौरान कुछ लोगों के वीडियो बनाने में व्यस्त रहने की बात भी सामने आई है।

घायलों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल

हादसे में घायल यात्रियों में सुजीत कुमार गुप्ता, अनिल साकेत, मनबसुआ, सबीना बेगम, रामपाल पटेल, बृजेन्द्र कुमार पटेल, मोहम्मद अंसारी, शिवानी पटेल, मोहम्मद इरशाद रजा अंसारी, मोहम्मद इब्राहिम, संतु पटेल, श्यामबाबू, पुनीत शुक्ला, गीता पटेल, 12 वर्षीय धीरज, सुलोचना विश्वकर्मा, रामदरस विश्वकर्मा, कृष्णाकांत विश्वकर्मा, तीन वर्षीय दिव्या विश्वकर्मा और सुमन कोल सहित अन्य यात्री शामिल बताए गए हैं। कुछ घायलों को आईसीयू में रखा गया है। मृतकों में राजमणि कोल निवासी इटार पहाड़, रीवा और रक्षा सिंह पटेल निवासी पचोखर, सीधी की पहचान बताई गई है। इसके अलावा तीन मृतकों की पहचान समाचार तैयार किए जाने तक नहीं हो सकी थी।

परिजन सीधी से रीवा के लिए रवाना

हादसे की खबर जैसे ही सीधी जिले में यात्रियों के परिजनों तक पहुंची, परिवारों में हड़कंप मच गया। कई परिजन तत्काल रीवा के संजय गांधी अस्पताल के लिए रवाना हुए। अस्पताल में घायलों के परिजनों की भीड़ जमा होने लगी। प्रशासन द्वारा घायलों के उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित करने के प्रयास किए गए। हादसे के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उपमुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल द्वारा शोक संवेदना व्यक्त किए जाने तथा शासन के प्रावधानों के अनुसार मृतकों के परिजनों और घायलों को सहायता उपलब्ध कराने की घोषणा की गई है।

हर हादसे के बाद मुआवजा, लेकिन जिम्मेदारी कब?

इस हादसे ने एक बार फिर रीवा-सीधी मार्ग की सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ‘दैनिक आज तक 24’ द्वारा पूर्व में भी सड़क की खराब स्थिति, तेज रफ्तार, वाहन चालकों की लापरवाही और यातायात व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को उठाया जाता रहा है। इसके बावजूद सवाल यह है कि हादसे रोकने के लिए स्थायी स्तर पर क्या कदम उठाए गए? राष्ट्रीय राजमार्ग पर निर्धारित गति सीमा और यातायात नियमों के बावजूद यदि भारी वाहन तेज रफ्तार में चलते हैं और अचानक सामने आने वाली परिस्थितियों में नियंत्रण खो देते हैं तो परिणाम ऐसे ही भयावह हो सकते हैं। हालांकि इस हादसे में दुर्घटना का वास्तविक कारण जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।

सवाल सिर्फ हादसे का नहीं, रोकथाम का भी

हर बड़े हादसे के बाद प्रशासन मौके पर पहुंचता है, घायलों के उपचार की व्यवस्था होती है, मृतकों के परिजनों को सहायता की घोषणा होती है और शोक संवेदनाएं व्यक्त की जाती हैं। लेकिन कुछ समय बाद सब कुछ सामान्य हो जाता है। असली सवाल यह है कि क्या हादसे की जिम्मेदारी तय होगी? क्या सड़क की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा होगी? क्या वाहनों की फिटनेस, परमिट, गति और चालकों की क्षमता की जांच होगी? जरूरत केवल हादसे के बाद राहत देने की नहीं, बल्कि हादसा होने से पहले उसे रोकने की व्यवस्था बनाने की है। रीवा-सीधी मार्ग पर नियमित निगरानी, तेज रफ्तार वाहनों पर कार्रवाई, सड़क के खतरनाक हिस्सों की पहचान, यातायात संकेतों की समीक्षा और आपातकालीन सेवाओं की त्वरित उपलब्धता सुनिश्चित करना जरूरी है। क्योंकि सवाल केवल बुधवार के हादसे में गई पांच जिंदगियों का नहीं है। सवाल यह भी है कि अगली दुर्घटना रोकने के लिए प्रशासन अब क्या करेगा—और इस बार क्या किसी की जिम्मेदारी वास्तव में तय होगी?





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