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| CMHO के आदेश पर BMO का आदेश भारी कैसे? सिरमौर अस्पताल में अधिकारिता को लेकर उठे गंभीर सवाल |
रीवा/सिरमौर - स्वास्थ्य विभाग के सिविल अस्पताल सिरमौर से सामने आए दो शासकीय आदेशों ने अधिकारी की प्रशासनिक सीमा, सक्षम प्राधिकारी की सर्वोच्चता और आदेशों के अनुपालन की व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। मामला किसी कर्मचारी के सामान्य कार्य-वितरण का है या फिर जिला स्तर के सक्षम अधिकारी के आदेश की कार्यगत व्यवस्था में अधीनस्थ स्तर से परिवर्तन का- इसका उत्तर अब विभागीय रिकॉर्ड से ही सामने आना चाहिए। उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार 18 दिसंबर 2025 को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, जिला रीवा के कार्यालय से आदेश क्रमांक 33935 जारी किया गया था। इसमें खंड चिकित्सा अधिकारी, सिविल अस्पताल सिरमौर की अनुशंसा के आधार पर बुद्धसेन साकेत, बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कार्यकर्ता पुरुष को सिविल अस्पताल सिरमौर में समस्त कार्यालयीन एवं लेखा संबंधी कार्य किए जाने हेतु आदेशित किया गया। महत्वपूर्ण बात यह है कि यह आदेश स्वयं CMHO कार्यालय से जारी हुआ था और इसकी प्रतिलिपि क्षेत्रीय संचालक स्वास्थ्य सेवाएं रीवा संभाग, खंड चिकित्सा अधिकारी सिरमौर, लेखा शाखा तथा संबंधित कर्मचारी को भी भेजी गई थी। यहीं से प्रशासनिक कहानी का सबसे महत्वपूर्ण अध्याय शुरू होता है।
अगस्त 2026 में खंड चिकित्सा अधिकारी, सिविल अस्पताल सिरमौर की ओर से एक अन्य आदेश जारी किया गया। इसमें प्रशासनिक हित एवं विभागीय कार्यों के सुचारू संचालन का हवाला देते हुए बुद्धसेन साकेत को स्थापना शाखा का समस्त प्रभार शिवेंद्र कुमार शुक्ला को सौंपने के निर्देश दिए गए। साथ ही बुद्धसेन साकेत को स्थापना शाखा की पंजियां, फाइलें एवं लंबित कार्यों का प्रभार विधिवत हस्तांतरित कर सेक्टर सुपरवाइजर के रूप में पदभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए। अब सवाल यह नहीं है कि कर्मचारी का कार्य बदला जा सकता है या नहीं। सवाल इससे कहीं अधिक गंभीर है- क्या BMO को ऐसा परिवर्तन करने का अधिकार था, जब मूल व्यवस्था से संबंधित आदेश CMHO कार्यालय से जारी हुआ था?
BMO के पक्ष में यह तर्क हो सकता है कि अस्पताल स्तर पर दैनिक प्रशासनिक कार्यों का वितरण करना उनके अधिकार क्षेत्र में आता है। लेकिन यदि अगस्त 2026 का आदेश केवल आंतरिक कार्य- वितरण है, तो विभाग को यह स्पष्ट करना होगा कि 18 दिसंबर 2025 के CMHO आदेश का कौन- सा हिस्सा अभी भी प्रभावशील है और कौन- सा हिस्सा नए आदेश से परिवर्तित हुआ। क्योंकि किसी अधीनस्थ अधिकारी द्वारा जारी आदेश में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि CMHO के पूर्व आदेश को किस सक्षम आदेश से संशोधित किया गया? क्या CMHO से पूर्व अनुमति या अनुमोदन लिया गया? BMO को ऐसा आदेश जारी करने का कौन- सा प्रत्यायोजित अधिकार प्राप्त है? उस प्रत्यायोजन का शासनादेश/विभागीय आदेश कौन-सा है? क्या अगस्त 2026 का आदेश CMHO के आदेश का अनुपूरक है अथवा उसके किसी हिस्से को प्रतिस्थापित करता है? इन सवालों का जवाब दिए बिना आदेश की प्रशासनिक वैधता पर अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी, लेकिन सवाल उठना पूरी तरह स्वाभाविक है।
प्रशासनिक व्यवस्था में मूल सिद्धांत यह है कि अधिकारी अपने अधिकार- क्षेत्र के भीतर ही आदेश जारी करता है। यदि किसी अधीनस्थ अधिकारी को उच्चाधिकारी के आदेश में परिवर्तन करने की शक्ति स्पष्ट रूप से प्रत्यायोजित नहीं है, तो उस शक्ति का स्रोत रिकॉर्ड में होना चाहिए। इसलिए अब स्वास्थ्य विभाग से सीधा सवाल है- क्या BMO के पास CMHO के 18 दिसंबर 2025 के आदेश की कार्यगत व्यवस्था में परिवर्तन करने का लिखित अधिकार था? यदि जवाब हां है तो वह अधिकार किस शासनादेश के तहत है? यदि जवाब नहीं है तो फिर अगस्त 2026 का आदेश किस सक्षम प्राधिकारी की अनुमति से जारी हुआ? और यदि BMO का अगस्त 2026 का आदेश केवल स्थानीय कार्य- वितरण है, तो उसमें CMHO के आदेश से उत्पन्न कार्यभार को बदलने का औचित्य क्या था?
पहले आदेश में CMHO कार्यालय ने बुद्धसेन साकेत को सिविल अस्पताल सिरमौर में समस्त कार्यालयीन एवं लेखा संबंधी कार्य के लिए आदेशित किया। बाद के आदेश में BMO कार्यालय ने बुद्धसेन साकेत से स्थापना शाखा का प्रभार लेकर दूसरे कर्मचारी को सौंपने और बुद्धसेन को सेक्टर सुपरवाइजर का कार्य ग्रहण करने का निर्देश दिया। ऐसे में विभागीय रिकॉर्ड से यह स्पष्ट होना चाहिए कि 18 दिसंबर 2025 के आदेश की प्रशासनिक स्थिति अगस्त 2026 में क्या थी। क्या वह आदेश प्रभावशील था? यदि था, तो उसे बदलने की शक्ति किसके पास थी? यदि वह प्रभावशील नहीं था, तो उसे समाप्त/संशोधित करने वाला आदेश कहां है? यही वह बिंदु है जहां प्रशासनिक जवाबदेही की वास्तविक परीक्षा होगी।
BMO के आदेश को ‘अंतिम सत्य’ मान लेना भी सवालों से परे नहीं, सिर्फ इसलिए कि आदेश BMO कार्यालय से जारी हुआ है, उसे स्वतः CMHO के पूर्व आदेश का संशोधन मान लेना भी उचित नहीं होगा और उसे स्वतः वैध मान लेना भी। लेकिन यदि BMO का आदेश CMHO द्वारा निर्धारित कार्य- व्यवस्था को प्रभावित करता है, तो उसके पीछे सक्षम अधिकार और रिकॉर्डेड अनुमोदन होना प्रशासनिक पारदर्शिता की मूल आवश्यकता है। यही कारण है कि इस मामले में व्यक्तिगत आरोपों से अधिक महत्वपूर्ण है अधिकार का दस्तावेज कहां है?
इस पूरे प्रकरण में क्षेत्रीय संचालक स्वास्थ्य सेवाएं, रीवा संभाग अथवा CMHO कार्यालय द्वारा निम्न अभिलेखों की जांच कराई जाना प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होगा 18.12.2025 के CMHO आदेश क्रमांक 33935 की मूल नस्ती। उस आदेश की नोटशीट एवं सक्षम अधिकारी का अनुमोदन। BMO सिरमौर द्वारा भेजी गई मूल अनुशंसा। अगस्त 2026 के BMO आदेश की मूल नस्ती एवं नोटशीट। BMO को प्राप्त प्रत्यायोजित शक्तियों का आदेश। क्या अगस्त 2026 के आदेश से पहले CMHO से कोई अनुमति/अनुमोदन लिया गया? बुद्धसेन साकेत को वास्तव में किस शाखा का कौन-सा प्रभार दिया गया था? स्थापना शाखा के चार्ज हस्तांतरण का अभिलेख। CMHO के 18 दिसंबर 2025 के आदेश को संशोधित/प्रतिस्थापित करने वाला कोई बाद का आदेश। संबंधित अवधि में बुद्धसेन साकेत की वास्तविक पदस्थापना एवं कार्य-आवंटन का रिकॉर्ड।
अब सवाल- किसका आदेश चलेगा? CMHO का लिखित आदेश या BMO का बाद का कार्य- वितरण आदेश? इसका जवाब किसी अधिकारी की मौखिक व्याख्या से नहीं, बल्कि शासकीय नस्ती और प्रत्यायोजित अधिकार से मिलना चाहिए। यदि BMO को विधिवत अधिकार प्राप्त था तो मामला स्पष्ट है- विभाग उस अधिकार का आधार सामने रखे। यदि BMO का आदेश केवल स्थानीय कार्य- वितरण था तो विभाग बताए कि उससे CMHO के आदेश पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ा। और यदि CMHO के आदेश की कार्यगत व्यवस्था वास्तव में बदली गई है, तो यह बताना आवश्यक होगा कि उस परिवर्तन को सक्षम बनाने वाला आदेश किस अधिकारी ने और किस वैधानिक/प्रशासनिक अधिकार के तहत जारी किया।
यह मामला किसी कर्मचारी के पक्ष या विपक्ष का नहीं है। यह शासकीय आदेश की गरिमा और प्रशासनिक अधिकार- सीमा का प्रश्न है। ऊपर के अधिकारी का आदेश नीचे का अधिकारी बदल सकता है या नहीं- इसका उत्तर व्यक्ति नहीं, नियम देगा। यदि BMO के पास अधिकार था तो अधिकार- पत्र सामने आए। यदि अनुमोदन था तो नस्ती सामने आए। यदि CMHO का आदेश संशोधित हुआ तो संशोधन आदेश सामने आए। क्योंकि शासन व्यवस्था में आदेश केवल कागज नहीं होता- उसके पीछे अधिकार, प्रक्रिया और जवाबदेही होती है। CMHO ने आदेश दिया था तो BMO ने बदला किस अधिकार से? अगर अधिकार था तो आदेश दिखाइए, अगर नहीं था तो फिर यह प्रशासनिक बदलाव किसके निर्देश पर हुआ- सिरमौर के दो आदेशों के बीच छिपा यही सवाल अब स्वास्थ्य विभाग की जवाबदेही का सबसे बड़ा पैमाना है।
