मऊगंज में नशे के कारोबार को लेकर प्रभारी मंत्री से शिकायत, पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल

मऊगंज में नशे के कारोबार को लेकर प्रभारी मंत्री से शिकायत, पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल

मऊगंज - जिले में कथित रूप से बढ़ते अवैध शराब कारोबार और नशीले पदार्थों की बिक्री को लेकर एक बार फिर पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हुए हैं। समाजसेवी संतोष तिवारी ने इस संबंध में प्रदेश के प्रभारी मंत्री लखन पटेल से शिकायत करते हुए जिले में नशे के कारोबार पर प्रभावी अंकुश लगाने की मांग की है। तिवारी ने पुलिस अधीक्षक सुरेंद्र कुमार जैन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

संतोष तिवारी ने प्रभारी मंत्री को दिए शिकायती पत्र में आरोप लगाया कि मऊगंज जिले के कई ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में अवैध शराब सहित अन्य नशीले पदार्थों का कारोबार कथित तौर पर बढ़ रहा है। उनका कहना है कि नशे के बढ़ते कारोबार का असर युवाओं के साथ-साथ कानून-व्यवस्था पर भी पड़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि नशे से जुड़े कारोबार के कारण चोरी, लूट और अन्य आपराधिक गतिविधियों में भी वृद्धि की आशंका है।

'कार्रवाई के नाम पर सिर्फ दिखावा' का आरोप

पत्रकारों से चर्चा के दौरान तिवारी ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि जिले में अवैध शराब और नशीले पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई केवल औपचारिकता बनकर रह गई है। उनका कहना है कि कई स्थानों पर कथित रूप से अवैध शराब की बिक्री खुलेआम हो रही है, लेकिन इसके बावजूद प्रभावी कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जब ग्रामीण या अन्य लोग नशे के कारोबार से संबंधित शिकायत करते हैं तो कई मामलों में शिकायतकर्ताओं की पहचान संबंधित लोगों तक पहुंच जाने की आशंका रहती है। इसके चलते लोग पुलिस के सामने शिकायत करने से भी बचते हैं। तिवारी ने शिकायतकर्ताओं की सुरक्षा और उनकी पहचान गोपनीय रखने की व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है।

पूर्व एसपी के कार्यकाल का भी किया उल्लेख

संतोष तिवारी ने जिले के पूर्व पुलिस अधीक्षक दिलीप सोनी के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौरान पुलिस की कार्रवाई से भयमुक्त वातावरण और कानून-व्यवस्था को लेकर बेहतर स्थिति दिखाई देती थी। उनका आरोप है कि वर्तमान समय में नशे के कारोबार को लेकर स्थिति चिंताजनक होती जा रही है। तिवारी ने दावा किया कि वर्तमान पुलिस अधीक्षक के कार्यकाल में थाना स्तर पर प्रभावी निगरानी नहीं होने के कारण कथित रूप से नशे का कारोबार बढ़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ नशे के कारोबारियों और शराब ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने की शिकायतें सामने आती रही हैं।

पुलिस और कारोबारियों की कथित सांठगांठ की जांच की मांग

शिकायतकर्ता ने कुछ मामलों में वाहनों को पकड़ने और बाद में छोड़ दिए जाने का भी आरोप लगाया। उन्होंने मांग की कि जिले में नशे और अवैध शराब से संबंधित मामलों में अब तक हुई कार्रवाई की निष्पक्ष समीक्षा कराई जाए। साथ ही यह भी जांच हो कि कहीं किसी स्तर पर पुलिस और कथित नशा कारोबारियों के बीच सांठगांठ तो नहीं है।तिवारी ने प्रभारी मंत्री से जिले के संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी, अवैध शराब के अड्डों पर नियमित कार्रवाई तथा नशीले पदार्थों की बिक्री करने वालों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की।

'नए एसपी को समझाइए, जिले को नशे से बचाइए'

तिवारी ने पत्रकारों से चर्चा के दौरान प्रभारी मंत्री से अपील करते हुए कहा कि “नए एसपी साहब को थोड़ा समझाइए, जिले को नशे में डूबने से बचाइए।” उन्होंने कहा कि यदि समय रहते नशे के कारोबार पर रोक नहीं लगाई गई तो इसका सबसे अधिक असर युवाओं और उनके परिवारों पर पड़ेगा। उनका कहना है कि नशे की समस्या केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं है, बल्कि यह सामाजिक और पारिवारिक समस्या भी है। इसलिए पुलिस कार्रवाई के साथ-साथ जनजागरूकता और नशामुक्ति अभियान को भी प्रभावी तरीके से चलाया जाना चाहिए।

प्रभारी मंत्री ने कार्रवाई का दिया आश्वासन

संतोष तिवारी के मुताबिक, प्रभारी मंत्री लखन पटेल ने उनकी शिकायत को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया है। अब देखना होगा कि शिकायत के बाद प्रशासन और पुलिस स्तर पर किस तरह की कार्रवाई सामने आती है। फिलहाल इस पूरे मामले में लगाए गए आरोप शिकायतकर्ता के बयान पर आधारित हैं और उनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस अथवा संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आने के बाद ही स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी। इसके बावजूद शिकायत ने मऊगंज में नशे के कारोबार और पुलिस की निगरानी व्यवस्था को लेकर एक महत्वपूर्ण बहस जरूर खड़ी कर दी है।



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