बुढ़ापे की लाठी से पढ़ाई के लोन तक': देवरी सेगरान में लगे 'अनोखे बैंक मेले' ने खोली सरकारी योजनाओं की पोल

बुढ़ापे की लाठी से पढ़ाई के लोन तक': देवरी सेगरान में लगे 'अनोखे बैंक मेले' ने खोली सरकारी योजनाओं की पोल

रीवा/देवरी सेगरान - "यदि आपके पास पैसा नहीं है, फिर भी बच्चे को बड़ा अफसर बनाना चाहते हैं, तो बैंक आपकी मदद करेगा। अगर बुढ़ापे में किसी के आगे हाथ नहीं फैलाना चाहते, तो आज ही ₹210 की बचत शुरू करें।" कुछ इसी तरह के सीधी और दिल को छू जाने वाली मिसालों के साथ ग्राम पंचायत देवरी सेगरान के आंगनबाड़ी केंद्र क्रमांक-1 में आयोजित वित्तीय साक्षरता सामुदायिक प्रशिक्षण शिविर संपन्न हुआ।

कार्यक्रम का आयोजन ग्राम पंचायत के रोजगार सहायक देव रंजन शर्मा द्वारा किया गया, जिसकी अध्यक्षता सरपंच डी.के. तिवारी ने की। वहीं मुख्य अतिथि के रूप में 'आरोह फाउंडेशन' के असिस्टेंट काउंसलर (वित्तीय साक्षरता) संतोष कुमार मिश्र और विशिष्ट अतिथि के रूप में वरिष्ठ नागरिक व पत्रकार दीपक तिवारी मंच पर मौजूद रहे।

3 बड़े 'जादुई' बैंक फॉर्मूले, जो बदल सकते हैं गांव की तस्वीर:

मुख्य अतिथि संतोष मिश्र ने ग्रामीणों को बिना किसी घुमावदार भाषा के सीधी बैंकिंग योजनाओं की गणित समझाई:

  1. ₹20 में 2 लाख का सुरक्षा कवच (PM-SBY): 18 से 70 वर्ष का कोई भी व्यक्ति साल में मात्र 20 रुपये देकर 2 लाख रुपये का दुर्घटना बीमा करा सकता है।

  2. रोज का 1 रुपया और 2 लाख की लाइफ गांरटी (PM-JJBY): 18 से 50 वर्ष के लोगों के लिए 436 रुपये सालाना में सामान्य मृत्यु पर भी परिवार को 2 लाख रुपये की आर्थिक मदद मिलने का प्रावधान है।

  3. बुढ़ापे का पक्का सहारा- अटल पेंशन योजना (APY): 18 वर्ष की उम्र में अगर कोई हर महीने ₹210 जमा करता है, तो 60 वर्ष की आयु के बाद उसे ₹5,000 प्रति माह (₹60,000 सालाना) पेंशन मिलेगी। यही नहीं, पति-पत्नी दोनों के न रहने पर बच्चों को 8.50 लाख रुपये कीमुश्त नकद राशि बैंक द्वारा सौंपी जाएगी।

बिना गारंटी 4 लाख का एजुकेशन लोन और फसल बीमा का ज्ञान

श्री मिश्र ने मेधावी छात्रों के अभिभावकों को खुशखबरी देते हुए बताया कि जिन छात्र-छात्राओं का 12वीं में 85% से अधिक अंक है और परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर है, उन्हें बिना किसी गारंटी के 4 लाख रुपये तक का एजुकेशन लोन मिलता है। इसके साथ ही उन्होंने किसानों से अपनी फसलों का 'फसल बीमा' कराने की अपील की ताकि प्राकृतिक आपदा के नुकसान से बचा जा सके।

डीबीटी और केवाईसी का 'पेच':

उन्होंने साफ कहा कि "सरकार का हर पैसा अब सीधे खाते में आता है, लेकिन अगर आपकी KYC, DBT, नॉमिनी या मोबाइल नंबर लिंक नहीं है, तो पात्र होते हुए भी आपका पैसा अटक जाएगा। इसलिए तुरंत बैंक जाकर इन सेवाओं को अप-टू-डेट कराएं, जिसके लिए बैंक कोई अतिरिक्त चार्ज नहीं लेता।"

साइबर ठगों से बचने का '1930' वाला ब्रह्मास्त्र

कार्यक्रम के दौरान साइबर अपराधों से बचाव का पाठ भी पढ़ाया गया। मुख्य अतिथि ने सचेत किया कि कोई भी बैंक कर्मचारी फोन पर OTP या गोपनीय जानकारी नहीं मांगता। यदि धोखे से खाते से पैसे कट जाएं, तो घबराने के बजाय तुरंत '1930' हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करें, जिससे पुलिस और बैंक मिलकर उस कटे हुए पैसे वाले खाते को होल्ड कर देते हैं और राशि सुरक्षित बच जाती है।

सरपंच बोले- "ऐसी जानकारियां पहली बार पता चलीं"

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे ग्राम पंचायत के सरपंच डी.के. तिवारी ने कहा कि गांव के लोगों को कई योजनाओं की जानकारी ही नहीं होती थी, जिससे वे लाभ से वंचित रह जाते थे। उन्होंने सभी हितग्राहियों से तुरंत बैंक जाकर इन योजनाओं का लाभ उठाने की अपील की।

कार्यक्रम के अंत में रोजगार सहायक देव रंजन शर्मा ने सभी अतिथियों, जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों का आभार व्यक्त किया।

कार्यक्रम में इनकी रही गरिमामयी मौजूदगी:

  • पंचायत व विभागीय अमला: रोजगार सहायक देव रंजन शर्मा, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ममता त्रिपाठी, सदा मीरा शर्मा, अंजू तिवारी, आशा कार्यकर्ता रीता पटेल, ममता साकेत, रानी साकेत, सहायिका रेखा तिवारी, राजकली साकेत, शुभा पटेल।

  • उपस्थित ग्रामीण व हितग्राही: भगवानी आदिवासी, सुनीता साकेत, रानी साकेत, रानी कोल, शकुंतला साकेत, लक्ष्मीनिया साकेत, देववती साकेत, निशा साकेत, प्रीति साकेत सहित भारी संख्या में ग्रामीण महिलाएं एवं पुरुष उपस्थित रहे।

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