रीवा–मऊगंज फोरलेन बना 'दुर्घटनाओं का कॉरिडोर'? सर्विस रोड, अवैध कट और सुरक्षा खामियों पर उठे बड़े सवाल

रीवा–मऊगंज फोरलेन बना 'दुर्घटनाओं का कॉरिडोर'? सर्विस रोड, अवैध कट और सुरक्षा खामियों पर उठे बड़े सवाल

रीवा - रीवा और नवगठित मऊगंज जिले से होकर गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग  (एनएच-30 एवं एनएच-135) पर सड़क सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। क्षेत्र के नागरिकों, सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि फोरलेन बनने के वर्षों बाद भी कई स्थानों पर सर्विस रोड का निर्माण अधूरा है, जबकि अनेक स्थानों पर डिवाइडरों में बनाए गए कट, अपर्याप्त संकेतक और अन्य तकनीकी कमियां लगातार सड़क दुर्घटनाओं का कारण बन रही हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इन राष्ट्रीय राजमार्गों से जुड़े कई गांव ऐसे हैं, जहां सड़क दुर्घटनाओं में किसी न किसी परिवार ने अपना प्रियजन खोया है। आए दिन होने वाली दुर्घटनाओं ने लोगों में भय और असुरक्षा का माहौल पैदा कर दिया है। उनका कहना है कि सड़क सुरक्षा केवल दुर्घटना के बाद राहत और मुआवजे तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए स्थायी उपाय किए जाने चाहिए।

क्षेत्र के नागरिक बताते हैं कि पूर्व में तत्कालीन कलेक्टर प्रतिभा पाल ने सड़क सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता दिखाते हुए अवैध डिवाइडर कट बंद करने, सर्विस रोड को व्यवस्थित करने तथा सड़क पर उभरी खतरनाक सतहों और अन्य कमियों को दूर करने के निर्देश दिए थे। हालांकि स्थानीय लोगों का आरोप है कि अनेक स्थानों पर आज भी अपेक्षित सुधार दिखाई नहीं देते और कई समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं।

जनचर्चा का विषय यह भी है कि कई स्थानों पर होटल, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों अथवा अन्य सुविधाओं के लिए डिवाइडरों में कट बना दिए गए हैं। लोगों का कहना है कि यदि ऐसे कट वैधानिक अनुमति के बिना बनाए गए हैं तो उनकी जांच कर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए, वहीं यदि अनुमति से बनाए गए हैं तो वहां पर्याप्त चेतावनी संकेत, रिफ्लेक्टर और सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

राहगीरों का कहना है कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर सड़क किनारे मृत पशुओं का लंबे समय तक पड़े रहना भी दुर्घटनाओं का कारण बनता है। उनका आरोप है कि समय पर इन्हें हटाने की व्यवस्था कई बार प्रभावी नहीं दिखाई देती, जिससे विशेषकर रात्रि के समय वाहन चालकों को भारी जोखिम उठाना पड़ता है।

लोगों का कहना है कि टोल टैक्स वसूली के साथ-साथ सड़क की गुणवत्ता, सुरक्षा मानकों का पालन, सर्विस रोड का रखरखाव, उचित संकेतक, प्रकाश व्यवस्था और दुर्घटना संभावित स्थलों का सुधार भी समान रूप से सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि यदि सड़क सुरक्षा के मूलभूत मानकों का पूरी तरह पालन हो तो अनेक दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है।

सड़क दुर्घटनाओं के बाद अक्सर पुलिस प्रकरण दर्ज होते हैं, जांच होती है और पीड़ित परिवारों को मुआवजा भी दिया जाता है। लेकिन स्थानीय नागरिकों का कहना है कि दुर्घटनाओं के मूल कारणों का स्थायी समाधान और जिम्मेदारियों का निर्धारण उतनी गंभीरता से नहीं हो पाता, जितनी आवश्यकता है। उनका मानना है कि यदि प्रत्येक बड़ी दुर्घटना के बाद सड़क इंजीनियरिंग, संकेत व्यवस्था और रखरखाव की स्वतंत्र तकनीकी समीक्षा हो तथा संबंधित कमियों के लिए जवाबदेही तय की जाए, तो भविष्य में ऐसी घटनाओं में कमी लाई जा सकती है।

विंध्य वसुंधरा समय-समय पर सड़क सुरक्षा और राष्ट्रीय राजमार्गों की कमियों की ओर प्रशासन का ध्यान आकर्षित करता रहा है। अब क्षेत्र के नागरिकों की मांग है कि राज्य सरकार, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, जिला प्रशासन और संबंधित एजेंसियां संयुक्त रूप से पूरे मार्ग का सुरक्षा ऑडिट कराएं, अवैध कट बंद करें, सर्विस रोड का निर्माण शीघ्र पूरा करें, आवश्यक संकेतक और सुरक्षा उपकरण लगाएं तथा दुर्घटना संभावित स्थानों पर तत्काल सुधारात्मक कार्य करें।

लोगों का मानना है कि सड़क केवल आवागमन का माध्यम नहीं, बल्कि हजारों परिवारों की जीवनरेखा है। यदि समय रहते आवश्यक सुधार और जवाबदेही सुनिश्चित की जाती है, तो अनेक अनमोल जिंदगियों को बचाया जा सकता है।

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