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| नंबर प्लेट पर 'पद' का प्रदर्शन, सड़कों पर नियमों की अनदेखी! रीवा–मऊगंज में परिवहन व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल |
रीवा - रीवा संभाग के नवगठित मऊगंज जिले सहित पूरे क्षेत्र में परिवहन नियमों के पालन को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक बड़ी संख्या में ऐसे वाहन सड़कों पर दौड़ रहे हैं, जिनकी नंबर प्लेटों पर निर्धारित पंजीयन संख्या के साथ विभिन्न कर्मचारी संगठनों, सामाजिक संस्थाओं एवं अन्य समूहों के पदनाम—जैसे अध्यक्ष, महामंत्री, संयोजक, संरक्षक आदि—अंकित दिखाई देते हैं। नागरिकों का कहना है कि वाहन पहचान का माध्यम होने के बजाय कई जगह प्रभाव और वर्चस्व के प्रदर्शन का साधन बनते जा रहे हैं।
जनचर्चा का विषय यह भी है कि अनेक चारपहिया वाहनों पर बिना वैधानिक अनुमति के लाल अथवा अन्य प्रकार की चेतावनी लाइटें, झंडे और वाहन के मूल स्वरूप में परिवर्तन खुलेआम देखने को मिल रहे हैं। विशेषकर रात्रिकाल में ऐसे वाहनों की आवाजाही को लेकर लोगों ने प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है।
हाल के दिनों में रीवा संभाग के मैहर सहित अन्य जिलों में परिवहन नियमों के उल्लंघन पर हुई कार्रवाई ने यह संकेत दिया है कि नियमों के पालन को लेकर अभी भी व्यापक स्तर पर अभियान चलाने की आवश्यकता है। नागरिकों का कहना है कि यदि नियमित जांच और प्रभावी निगरानी हो तो सड़क सुरक्षा व्यवस्था और अधिक मजबूत हो सकती है।
इधर शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में टेंपो एवं अन्य व्यावसायिक वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई स्थानों पर क्षमता से अधिक सवारियां बैठाने, अनुभवहीन चालकों और यातायात नियमों की अनदेखी के कारण दुर्घटनाओं में लगातार वृद्धि हो रही है। सड़क हादसों में हर वर्ष अनेक परिवार अपने प्रियजनों को खो रहे हैं, जिससे लोगों में चिंता बढ़ती जा रही है।
यातायात विशेषज्ञों का मानना है कि केवल ड्राइविंग लाइसेंस जारी करना पर्याप्त नहीं है। वाहन चालकों का नियमित प्रशिक्षण, फिटनेस परीक्षण, यातायात नियमों के प्रति जागरूकता और प्रभावी प्रवर्तन भी उतना ही आवश्यक है। सड़क सुरक्षा तभी मजबूत होगी जब कानून का पालन बिना किसी भेदभाव के सभी पर समान रूप से लागू किया जाएगा।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि परिवहन विभाग को नंबर प्लेटों पर अनधिकृत लेखन, अवैध लाल बत्तियों, झंडों तथा वाहनों के अवैध मॉडिफिकेशन के विरुद्ध विशेष अभियान चलाना चाहिए। साथ ही सड़क पर चलने वाले प्रत्येक वाहन की वैधता, फिटनेस और चालक की योग्यता की नियमित जांच सुनिश्चित की जानी चाहिए।
चर्चाओं के दौरान कुछ लोगों ने यह भी कहा कि परिवहन विभाग के साथ-साथ आबकारी, स्वास्थ्य, खनिज और वन विभाग जैसे अन्य विभागों को भी अपने-अपने दायित्वों का प्रभावी ढंग से निर्वहन करना चाहिए। उनका मानना है कि प्रशासनिक जवाबदेही और पारदर्शिता से ही कानून व्यवस्था में जनता का विश्वास और मजबूत होगा।
क्षेत्र के नागरिकों ने राज्य सरकार से मांग की है कि सड़क सुरक्षा, परिवहन व्यवस्था और नियमों के समान अनुपालन को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए व्यापक अभियान चलाया जाए, ताकि दुर्घटनाओं पर अंकुश लगे और कानून का सम्मान सुनिश्चित हो सके।
