शासकीय भवन निर्माण में रेत की खपत पर सवाल, वैधता से लेकर गुणवत्ता तक जांच की मांग

शासकीय भवन निर्माण में रेत की खपत पर सवाल, वैधता से लेकर गुणवत्ता तक जांच की मांग

जैतपुर/शहडोल - जैतपुर क्षेत्र में करोड़ों रुपए की लागत से बन रहे एक शासकीय भवन के निर्माण में इस्तेमाल हो रही रेत को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। स्थानीय स्तर पर दावा किया जा रहा है कि निर्माण कार्य में अब तक अनुमानित 50 हाईवा से अधिक रेत लग चुकी है। हालांकि इस रेत की वैधता को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। यही वजह है कि निर्माण स्थल पर पहुंच रही रेत के स्रोत और उससे जुड़े दस्तावेजों की जांच की मांग उठ रही है।

स्थानीय लोगों का सवाल है कि यदि इतनी बड़ी मात्रा में रेत का उपयोग निर्माण कार्य में हो रहा है तो इसके लिए रेत की आपूर्ति किस माध्यम से की जा रही है और क्या इसके लिए आवश्यक वैधानिक प्रक्रिया पूरी की गई है? बिना स्पष्ट जानकारी के बड़े पैमाने पर रेत की उपलब्धता और उसके बाद शासकीय भवन में उपयोग होने से मामले को लेकर संदेह गहरा रहा है।

ग्रामीणों का आरोप है कि यदि निर्माण में इस्तेमाल की जा रही रेत की वैधता की जांच नहीं हुई तो क्षेत्र में सक्रिय कथित अवैध रेत कारोबार को भी इससे फायदा पहुंच सकता है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

गुणवत्ता पर भी उठे सवाल

स्थानीय लोगों ने केवल रेत की वैधता ही नहीं, बल्कि भवन निर्माण में इस्तेमाल हो रही सामग्री की गुणवत्ता की भी जांच की मांग की है। उनका कहना है कि करोड़ों रुपए की लागत से बन रहे भवन में निर्माण सामग्री निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप इस्तेमाल हो रही है या नहीं, इसकी तकनीकी जांच आवश्यक है। बताया जा रहा है कि निर्माण कार्य राज्य शिक्षा केंद्र की मद से कराया जा रहा है। जानकारी के अनुसार इसका ठेका विनोद नामक ठेकेदार के पास है, जबकि निर्माण कार्य की देखरेख शहडोल के पीआईयू विभाग द्वारा किए जाने की बात सामने आ रही है।

अब मांग उठ रही है कि संबंधित विभाग निर्माण स्थल पर पहुंच रही रेत की मात्रा, रॉयल्टी, परिवहन दस्तावेज, आपूर्ति स्रोत और निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की जांच करे। यदि जांच में अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदारों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए। फिलहाल मामला आरोपों और सवालों के घेरे में है। निष्पक्ष जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि निर्माण में इस्तेमाल हो रही रेत वैध स्रोत से लाई गई है या नहीं और भवन निर्माण में गुणवत्ता मानकों का पालन किया जा रहा है या नहीं।

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