84 कोस कांवड़ यात्रा का भव्य समापन, हाटेश्वरनाथ में उमड़ा आस्था का सैलाब

84 कोस कांवड़ यात्रा का भव्य समापन, हाटेश्वरनाथ में उमड़ा आस्था का सैलाब

मऊगंज। सावन के प्रथम सोमवार को देवतालाब मंदिर से शुरू हुई पूर्व विधायक सुखेंद्र सिंह ‘बन्ना’ के नेतृत्व वाली 84 कोस कांवड़ यात्रा का सावन के अंतिम सोमवार को हनुमना क्षेत्र के प्रसिद्ध हाटेश्वरनाथ महादेव मंदिर में भव्य और धार्मिक वातावरण के बीच समापन हुआ। अमिलेश्वर नाथ महादेव मंदिर, उत्तर प्रदेश सीमा से यात्रा आगे बढ़ते हुए हाटेश्वरनाथ मंदिर पहुंची, जहां हजारों श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का जलाभिषेक कर यात्रा का समापन किया।यात्रा के अंतिम पड़ाव तक पहुंचते-पहुंचते श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। डीजे और बैंड पर बज रहे भजनों के बीच कांवड़िए और श्रद्धालु नाचते-गाते नजर आए। पूरे मार्ग में ‘हर-हर महादेव’ और ‘बोल बम’ के जयघोष गूंजते रहे।

दलगत राजनीति से ऊपर दिखी आस्था

यात्रा की खास बात यह रही कि इसमें विभिन्न राजनीतिक विचारधाराओं से जुड़े स्थानीय जनप्रतिनिधि और नागरिक भी शामिल हुए। भाजपा की पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष पूनम गुप्ता तथा नगर परिषद अध्यक्ष सोनू आशुतोष गुप्ता भी यात्रा में साथ चलते नजर आए। सोनू आशुतोष गुप्ता ने अपने निवास के सामने सुखेंद्र सिंह ‘बन्ना’ का माल्यार्पण कर स्वागत किया। सांसद प्रतिनिधि रहे राजेश गुप्ता ने भी पुष्पवर्षा और माल्यार्पण कर यात्रा का स्वागत किया। हनुमना नगर में कई स्थानों पर श्रद्धालुओं और कांवड़ियों के लिए चाय, बिस्किट, शरबत और पानी की व्यवस्था की गई।

गांव-गांव हुआ स्वागत

कांवड़ यात्रा मिसिरगवां, बरौंही, तिलिया खूंटा, लासा, हाटा सहित विभिन्न गांवों से गुजरी। रास्ते में जगह-जगह लोगों ने पुष्पवर्षा कर कांवड़ियों का स्वागत किया। कई स्थानों पर शरबत और पानी के फव्वारों की व्यवस्था भी की गई।जैसे ही यात्रा हाटेश्वरनाथ मंदिर परिसर पहुंची, वहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जमा हो गई। भजनों की धुन पर लोग घंटों नाचते-गाते रहे। गांव बोल बम कांवड़िया संघ हनुमना द्वारा आयोजित विशाल भंडारे में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। पूर्व विधायक सुखेंद्र सिंह ‘बन्ना’ स्वयं काफी देर तक श्रद्धालुओं को अपने हाथों से प्रसाद वितरित करते रहे।

84 कोस यात्रा के पीछे क्षेत्र की खुशहाली का संकल्प

मीडिया से चर्चा में सुखेंद्र सिंह ‘बन्ना’ ने कहा कि 84 कोस क्षेत्र में स्थित होने के कारण मऊगंज की सुख-समृद्धि और खुशहाली के लिए उन्होंने इस यात्रा का संकल्प लिया था। उन्होंने कहा कि यात्रा शुरू होते ही क्षेत्र में अच्छी बारिश हुई। हालांकि बारिश के दौरान हुई जनहानि पर उन्होंने दुख व्यक्त करते हुए मृतकों की आत्मा की शांति और उनके परिजनों को दुख सहने की शक्ति देने की प्रार्थना की। उन्होंने कहा कि यात्रा का उद्देश्य क्षेत्र की खुशहाली और भगवान शिव के प्रति आस्था के साथ सामाजिक और धार्मिक एकजुटता को मजबूत करना भी है। यात्रा के दौरान राजनीतिक मुद्दों पर पूछे गए सवालों पर उन्होंने अपने विचार भी रखे और कहा कि भ्रष्टाचार के आरोपों पर निष्पक्ष जांच के लिए जिम्मेदार पद से हटकर जांच का रास्ता साफ होना चाहिए। उन्होंने पूर्व के राजनीतिक घटनाक्रमों का उल्लेख करते हुए अपनी बात रखी।

युवाओं और व्यापारियों ने भी लिया हिस्सा

एनएसयूआई जिला अध्यक्ष नीलेश गुप्ता ‘बच्चा भैया’ के नेतृत्व में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने यात्रा में भाग लिया। युवाओं की भागीदारी ने यात्रा को और भव्य बना दिया। पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष शैलजा गुप्ता ने कहा कि यात्रा में उमड़ा जनसैलाब मऊगंज की धार्मिक आस्था को दर्शाता है। वहीं व्यापार मंडल अध्यक्ष मनीष गुप्ता के नेतृत्व में बड़ी संख्या में व्यापारी भी यात्रा में शामिल हुए।

साफ हुआ कुंड, श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी

हाटेश्वरनाथ मंदिर परिसर में स्थित कुंड भी इस बार श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहा। लंबे समय से कुंड में काई, जलकुंभी और कचरा जमा होने के कारण लोग वहां से जल लेने से बचते थे। स्थानीय स्तर पर लंबे समय से उठ रही मांग के बाद इस बार कुंड की व्यापक सफाई की गई। साफ और निर्मल पानी देखकर श्रद्धालु उत्साहित नजर आए। कई लोगों ने कुंड में स्नान कर अपनी थकान मिटाई और धार्मिक आस्था के साथ डुबकी लगाई।

पुलिस ने संभाली सुरक्षा व्यवस्था

बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी को देखते हुए पुलिस ने भी सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए। हनुमना थाना प्रभारी राजेश पटेल और उपनिरीक्षक ऋषि द्विवेदी के मार्गदर्शन में पुलिस बल तैनात रहा। पुलिस लाइन मऊगंज से अतिरिक्त बल भी भेजा गया था। यात्रा मार्ग और मंदिर परिसर में पुलिसकर्मियों ने भीड़ और यातायात व्यवस्था संभाली। 84 कोस कांवड़ यात्रा के समापन के साथ पूरा क्षेत्र शिवमय नजर आया। श्रद्धालुओं के जयघोष, भजनों की धुन और जगह-जगह हुए स्वागत ने यात्रा को धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक सहभागिता का भी स्वरूप दिया।

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