| मऊगंज में शराब माफिया का बोलबाला: सीतापुर बना अवैध दारू का हब, ओवररेटिंग से ग्रामीणों में आक्रोश |
मऊगंज/सीतापुर - जिले के सीतापुर गांव में इन दिनों शराब माफियाओं की मनमानी और प्रशासनिक उदासीनता ने हालात बिगाड़ दिए हैं। गांव में संचालित कंपोजिट मदिरा दुकान पर खुलेआम ओवररेटिंग का खेल चल रहा है, जिससे ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।
स्थानीय सूत्रों और ग्रामीणों के आरोपों के अनुसार, ₹199 प्रिंट रेट (MRP) वाली बीयर को ₹250 में बेचा जा रहा है। विरोध करने पर ग्राहकों को दबाव और रसूख का डर दिखाया जाता है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि प्रति बोतल वसूले जा रहे अतिरिक्त ₹51 आखिर किसकी जेब में जा रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि मामला सिर्फ ओवररेटिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि गांव और आसपास के क्षेत्रों में अवैध शराब बिक्री का जाल भी तेजी से फैल चुका है। छोटे-छोटे मोहल्लों और गांवों में पैकारी के जरिए खुलेआम शराब बेची जा रही है, जिससे युवाओं पर इसका नकारात्मक असर पड़ रहा है। सबसे गंभीर आरोप आबकारी विभाग पर लग रहे हैं। ग्रामीणों का दावा है कि विभाग की जानकारी में सब कुछ होने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही। “महीने की सेटिंग” के चलते पूरे मामले पर आंखें मूंदे रखने की बात कही जा रही है।
प्रशासन पर उठे बड़े सवाल:
(1)क्या आबकारी विभाग की भूमिका संदिग्ध है?
(2)क्या नियम सिर्फ कागजों तक सीमित रह गए हैं?
(3)अवैध बिक्री पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?
सीतापुर के जागरूक नागरिकों ने अब सीधे मऊगंज कलेक्टर से हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने दुकानों की जांच, डिजिटल भुगतान के रिकॉर्ड की जांच और दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग उठाई है।
ग्रामीणों की मांग:
(1)मदिरा दुकानों की तत्काल जांच
(2)ओवररेटिंग पर सख्त कार्रवाई
(3)अवैध पैकारी पर रोक
(4)भ्रष्ट अधिकारियों का निलंबन,
गांव में बढ़ती अव्यवस्थाओं और प्रशासन की चुप्पी ने हालात को गंभीर बना दिया है। अब देखना होगा कि जिम्मेदार अधिकारी कब जागते हैं और सीतापुर को इस अवैध कारोबार से कब मुक्ति मिलती है।