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| संजय गांधी अस्पताल या 'पार्किंग वीरों' का अखाड़ा? पर्ची कटने से पहले नसीब हो रहा अभद्र व्यवहार, डिप्टी सीएम के प्रयासों पर फिर रहा पानी |
रीवा - विंध्य क्षेत्र के सबसे बड़े शासकीय चिकित्सा संस्थान संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय एवं सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में मरीजों और उनके परिजनों को स्वास्थ्य सुविधाएं मिलने से पहले पार्किंग व्यवस्था की अव्यवस्थाओं और कर्मचारियों के कथित अभद्र व्यवहार का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल परिसर में संचालित पार्किंग व्यवस्था को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच और सुधार की आवश्यकता महसूस की जा रही है। यह अस्पताल केवल रीवा जिले का ही नहीं, बल्कि पूरे विंध्य क्षेत्र और मध्य प्रदेश के हजारों मरीजों की उम्मीदों का केंद्र है। यहां प्रतिदिन दूर-दराज के गांवों और शहरों से मरीज जीवन बचाने की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं। ऐसे संवेदनशील स्थान पर यदि पार्किंग व्यवस्था पारदर्शी न हो और आगंतुकों को स्पष्ट जानकारी न मिले, तो यह चिंता का विषय है।
अस्पताल पहुंचने वाले लोगों का कहना है कि पार्किंग शुल्क वसूली के नियमों को लेकर पर्याप्त और स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है। यदि किसी वर्ग को शुल्क में छूट या विशेष सुविधा प्रदान की गई है, तो उसके लिए अलग पार्किंग स्थल कहां है, इसका कोई स्पष्ट और प्रमुख सूचना बोर्ड दिखाई नहीं देता। ऐसे में लोगों को मौके पर कर्मचारियों के बताए अनुसार व्यवस्था समझनी पड़ती है, जिससे भ्रम और विवाद की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।
सबसे गंभीर सवाल पार्किंग कर्मचारियों की पहचान और जवाबदेही को लेकर है। पार्किंग स्थल पर 24 घंटे कर्मचारियों की ड्यूटी रहती है, लेकिन अधिकांश मामलों में उनके नाम, पहचान अथवा ड्यूटी संबंधी जानकारी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित नहीं होती। यदि किसी कर्मचारी के व्यवहार को लेकर शिकायत हो जाए तो आम नागरिक आखिर शिकायत किसके खिलाफ दर्ज कराए?
मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि अस्पताल कोई पर्यटन स्थल नहीं है। यहां कोई व्यक्ति घूमने-फिरने नहीं आता, बल्कि जीवन और मृत्यु के संघर्ष के बीच अपने मरीज को बचाने की उम्मीद लेकर पहुंचता है। ऐसी परिस्थितियों में यदि पार्किंग स्थल पर उनसे असम्मानजनक व्यवहार किया जाता है या नियमों की स्पष्ट जानकारी नहीं दी जाती, तो यह व्यवस्था की संवेदनशीलता पर प्रश्न खड़े करता है।
यदि पार्किंग शुल्क निर्धारित है तो सभी से निर्धारित नियमों के अनुसार शुल्क लिया जाए और प्रत्येक भुगतान पर अनिवार्य रूप से रसीद उपलब्ध कराई जाए। यदि पत्रकारों, पुलिसकर्मियों अथवा अन्य अधिकृत श्रेणियों के व्यक्तियों के लिए विशेष प्रावधान हैं, तो उन्हें सूचना पट्ट पर स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किया जाना चाहिए। नियम सभी के लिए समान और सार्वजनिक होने चाहिए, न कि मौके पर मौखिक रूप से बताए जाने वाले।
प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री श्री राजेंद्र शुक्ल प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। करोड़ों रुपये की लागत से अस्पतालों में सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। ऐसे में यदि अस्पताल परिसर में पार्किंग व्यवस्था को लेकर शिकायतें सामने आती हैं, तो यह उन प्रयासों पर भी सवाल खड़े करती हैं, जिन्हें जनता की सुविधा के लिए लागू किया गया है।
उठ रही हैं ये प्रमुख मांगें—
- पार्किंग शुल्क और छूट संबंधी नियमों का बड़ा और स्पष्ट सूचना बोर्ड लगाया जाए।
- यदि अलग-अलग श्रेणियों के लिए अलग पार्किंग व्यवस्था है तो उसका स्पष्ट संकेतक लगाया जाए।
- पार्किंग कर्मचारियों के लिए यूनिफॉर्म और नेम प्लेट अनिवार्य की जाए।
- प्रत्येक कर्मचारी की ड्यूटी सूची सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित की जाए।
- प्रत्येक शुल्क वसूली पर अनिवार्य रूप से रसीद प्रदान की जाए।
- पार्किंग संचालन की नियमित निगरानी के लिए अस्पताल प्रबंधन द्वारा शिकायत निवारण व्यवस्था बनाई जाए।
- पार्किंग संचालन का समय-समय पर प्रशासनिक निरीक्षण कराया जाए।
यह समाचार किसी व्यक्ति विशेष के विरुद्ध नहीं, बल्कि अस्पताल परिसर में संचालित पार्किंग व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और जनहितैषी बनाने की मांग को लेकर प्रकाशित किया जा रहा है। मरीजों और उनके परिजनों को सम्मानजनक व्यवहार और स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराना प्रशासन और ठेकेदार दोनों की जिम्मेदारी है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन, अस्पताल प्रबंधन और संबंधित विभाग इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर क्या कदम उठाते हैं। क्योंकि अस्पताल की चौखट पर आने वाला हर व्यक्ति सबसे पहले सम्मान और संवेदनशील व्यवहार का हकदार है।
