अंधेरे में रीवा-मऊगंज: बिजली संकट से त्रस्त जनता, बार-बार कटौती पर उठे सवाल

अंधेरे में रीवा-मऊगंज: बिजली संकट से त्रस्त जनता, बार-बार कटौती पर उठे सवाल

रीवा/मऊगंज - रीवा और मऊगंज जिले में लगातार हो रही अघोषित बिजली कटौती ने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। शहरों से लेकर ग्रामीण अंचलों तक उपभोक्ता घंटों बिजली गुल रहने की समस्या से जूझ रहे हैं। सबसे अधिक परेशानी किसानों, विद्यार्थियों, छोटे व्यापारियों और मरीजों को उठानी पड़ रही है। क्षेत्र के कई गांवों में दिनभर में कई बार बिजली बाधित होने की शिकायतें सामने आ रही हैं, जिससे लोगों में बिजली विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर नाराजगी बढ़ती जा रही है।

ग्रामीणों का कहना है कि कई इलाकों में 24 घंटे के दौरान 10 से 15 बार बिजली ट्रिप होना सामान्य बात हो गई है। कई बार घंटों तक आपूर्ति बाधित रहती है, लेकिन उपभोक्ताओं को इसकी पूर्व सूचना नहीं दी जाती। शिकायत करने पर अधिकारियों से संपर्क नहीं हो पाता या समस्या के समाधान में काफी समय लग जाता है। बरसात शुरू होते ही बिजली व्यवस्था और अधिक प्रभावित हो जाती है तथा मामूली फॉल्ट के कारण भी लंबे समय तक आपूर्ति बंद रहती है।

रीवा और मऊगंज जिले के गढ़, कटरा, नईगढ़ी, लालगांव, मऊगंज, मनगवां, गंगेव, हनुमना, देवतालाब, शाहपुर, सेमरिया सहित कई क्षेत्रों से लगातार बिजली आपूर्ति बाधित होने की शिकायतें मिल रही हैं। कई स्थानों पर ट्रांसफार्मर खराब होने के बाद उन्हें बदलने में भी काफी समय लगने की बात स्थानीय लोग कहते हैं। फॉल्ट सुधार के लिए भी लोगों को लंबे इंतजार का सामना करना पड़ता है।

बिजली संकट का सबसे अधिक असर किसानों पर पड़ रहा है। धान सहित खरीफ फसलों के लिए यह समय सिंचाई की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है, लेकिन अनियमित बिजली आपूर्ति के कारण कई किसानों के ट्यूबवेल समय पर नहीं चल पा रहे हैं। मजबूरी में कई किसानों को डीजल इंजन के सहारे सिंचाई करनी पड़ रही है, जिससे उनकी लागत बढ़ रही है। किसानों का कहना है कि यदि समय पर बिजली नहीं मिली तो फसलों के उत्पादन पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

बार-बार बिजली कटौती का असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर भी पड़ रहा है। प्रतियोगी परीक्षाओं और अन्य शैक्षणिक तैयारियों में लगे छात्र-छात्राओं को रात के समय अध्ययन करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं छोटे व्यापारियों का कहना है कि बिजली बाधित रहने से उनका कारोबार प्रभावित हो रहा है। स्वास्थ्य केंद्रों और छोटे अस्पतालों में भी आवश्यक उपकरणों के संचालन में परेशानी आने की शिकायतें सामने आई हैं।

बरसात के मौसम में जर्जर बिजली लाइनें और पुराने पोल भी चिंता का विषय बने हुए हैं। कई स्थानों पर तार नीचे लटके होने तथा खंभों की स्थिति खराब होने की बात ग्रामीणों ने उठाई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि समय रहते इनका रखरखाव नहीं किया गया तो दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहेगी। उन्होंने विभाग से पुराने तारों और क्षतिग्रस्त ट्रांसफार्मरों को प्राथमिकता के आधार पर बदलने की मांग की है।

क्षेत्र के नागरिकों ने यह भी मांग की है कि बिजली कटौती की स्थिति में उपभोक्ताओं को पूर्व सूचना उपलब्ध कराई जाए तथा प्रत्येक वितरण केंद्र पर पर्याप्त तकनीकी स्टाफ और फॉल्ट सुधार दल तैनात किए जाएं, ताकि शिकायतों का त्वरित निराकरण हो सके। साथ ही विद्युत व्यवस्था की नियमित निगरानी कर अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही भी तय की जाए।

स्थानीय लोगों का कहना है कि बिजली आज हर नागरिक की बुनियादी आवश्यकता बन चुकी है। ऐसे में निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करना विभाग की जिम्मेदारी है। नागरिकों ने प्रदेश सरकार, ऊर्जा विभाग, रीवा संभाग के प्रशासन तथा दोनों जिलों के अधिकारियों से मांग की है कि बिजली व्यवस्था की समीक्षा कर अघोषित कटौती पर रोक लगाने, जर्जर लाइनें बदलने और उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए ठोस एवं प्रभावी कदम उठाए जाएं।

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