किसानों के साथ सरकार कर रही अत्याचार, खाद वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता लाए सरकार - कांग्रेस नेता नृपेन्द्र सिंह पिन्टू

किसानों के साथ सरकार कर रही अत्याचार, खाद वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता लाए सरकार - कांग्रेस नेता निरूपण सिंह पिंटू

रीवा/मऊगंज। किसान कांग्रेस रीवा के पूर्व जिला अध्यक्ष एवं कांग्रेस कमेटी मऊगंज के जिला उपाध्यक्ष नृपेन्द्र सिंह पिन्टू ने प्रदेश की भाजपा सरकार पर किसानों के साथ अन्याय और खाद वितरण व्यवस्था में भेदभावपूर्ण नीति अपनाने का गंभीर आरोप लगाया है। जारी प्रेस विज्ञप्ति में उन्होंने कहा कि सरकार किसानों को राहत देने के नाम पर सब्सिडी और टोकन सिस्टम का प्रचार कर रही है, जबकि वास्तविकता यह है कि किसान खाद की उपलब्धता और बढ़ती कीमतों से परेशान हैं। नृपेन्द्र सिंह पिन्टू ने कहा कि वे रीवा और नवीन जिला मऊगंज सहित प्रदेश एवं देश के किसानों की उस पीड़ा को सामने रख रहे हैं, जो आज गांव-गांव में चर्चा का विषय बनी हुई है। सरकार लगातार किसानों को दी जाने वाली सब्सिडी का प्रचार कर रही है, लेकिन खाद की उपलब्धता और उसकी वास्तविक कीमतों के बीच बड़ा अंतर किसानों के सामने संकट पैदा कर रहा है। उन्होंने कहा कि पूर्व में भी विभिन्न सरकारें किसानों को उर्वरकों, डीजल, पेट्रोल सहित अन्य आवश्यक वस्तुओं पर सब्सिडी देती रही हैं, लेकिन किसानों को अपनी आवश्यकता और गुणवत्ता के अनुसार खाद चुनने की स्वतंत्रता रहती थी। वर्तमान व्यवस्था में किसानों को टोकन सिस्टम के माध्यम से सीमित विकल्प उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

उन्होंने उर्वरकों की कीमतों और सब्सिडी का उल्लेख करते हुए बताया कि इफको कंपनी के यूरिया खाद का कंपनी मूल्य ₹1,451.76 प्रति बोरी है, जबकि किसानों को यह ₹266.50 में उपलब्ध कराया जाता है, जिस पर सरकार द्वारा ₹1,185.28 की सब्सिडी दी जा रही है। इसी प्रकार एचयूआरएल कंपनी के यूरिया का कंपनी मूल्य ₹2,175.45 प्रति बोरी है, जिस पर ₹1,908.95 की सब्सिडी के बाद किसानों को यह ₹266.50 में मिलता है। वहीं डीएपी (18:46) खाद का कंपनी मूल्य ₹2,739.95 प्रति बोरी है, जिसे किसानों को ₹1,350 में उपलब्ध कराया जा रहा है तथा इस पर ₹1,389.95 की सब्सिडी दी जा रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने केवल यूरिया और डीएपी (18:46) की कीमतों को यथावत रखा है, जबकि अन्य उर्वरकों की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। रीवा और मऊगंज जिले की सहकारी समितियों में डीएपी खाद की आपूर्ति अप्रत्यक्ष रूप से कम कर दी गई है, जिसके कारण किसानों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप खाद उपलब्ध नहीं हो पा रही है। इसके स्थान पर ऐसी कंपनियों के उर्वरकों की आपूर्ति की जा रही है, जिन पर सब्सिडी कम है और किसानों को अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है।

नृपेन्द्र सिंह पिन्टू ने कहा कि किसान मजबूरी में वही खाद खरीदने को विवश हैं, जो समितियों में उपलब्ध कराई जा रही है। सरकार टोकन सिस्टम के माध्यम से किसानों को दी जा रही छूट का प्रचार कर अपनी वाहवाही लूटने का प्रयास कर रही है, जबकि वास्तविक स्थिति यह है कि किसानों की पसंद और आवश्यकता के अनुरूप उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं की जा रही है।

उन्होंने मांग की कि सरकार सार्वजनिक रूप से यह जानकारी जारी करे कि रीवा और मऊगंज जिले की सहकारी समितियों में जून और जुलाई माह के दौरान डीएपी खाद की कुल कितनी आपूर्ति की गई है, पूर्व वर्षों में इसकी कितनी खपत होती थी और वर्तमान में इसकी उपलब्धता में कमी क्यों आई है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि किसानों को पर्याप्त मात्रा में डीएपी खाद उपलब्ध नहीं कराए जाने के लिए किस अधिकारी अथवा विभाग की जवाबदेही तय की जाएगी।

किसान कांग्रेस नेता ने कहा कि किसानों के हितों की रक्षा के लिए कांग्रेस हमेशा उनके साथ खड़ी है। उन्होंने सभी विपक्षी दलों, किसान संगठनों एवं किसानों से अपील करते हुए कहा कि वे खाद वितरण व्यवस्था और सब्सिडी से जुड़े तथ्यों को समझें तथा किसानों के अधिकारों और उनकी आवश्यकताओं के लिए एकजुट होकर आवाज उठाएं। उनके अनुसार, किसानों को उनकी जरूरत के अनुरूप उचित मूल्य पर गुणवत्तापूर्ण उर्वरक उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही किसानों के साथ अत्याचार के समान है।




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