मध्यप्रदेश प्रशासनिक इकाई पुनर्गठन आयोग अध्यक्ष की अध्यक्षता में जिला स्तरीय बैठक आयोजित

मध्यप्रदेश प्रशासनिक इकाई पुनर्गठन आयोग अध्यक्ष की अध्यक्षता में जिला स्तरीय बैठक आयोजित

बडवानी - मध्यप्रदेश प्रशासनिक इकाई पुनर्गठन आयोग के अध्यक्ष श्री एस.एन. मिश्रा की अध्यक्षता में बुधवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में जिला स्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में आयोग के सचिव श्री अक्षय कुमार सिंह, कलेक्टर श्रीमती जयति सिंह, पुलिस अधीक्षक श्री पद्मविलोचन शुक्ल, जिला पंचायत सीईओ सुश्री काजल जावला, अन्य वरिष्ठ अधिकारी सहित समस्त प्रमुख विभागों के जिला अधिकारी उपस्थित रहे। 

बैठक में आयोग के अध्यक्ष श्री मिश्रा ने बताया कि नागरिकों की सुविधा के लिए भौगोलिक परिस्थितियों और जन अपेक्षाओं के आधार पर जनोन्मुखी एवं सुलभ प्रशासन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संभाग, जिला, तहसील और विकासखंड जैसी प्रशासनिक इकाइयों के पुनर्गठन की अनुशंसा के लिए आयोग का गठन किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक इकाइयों के पुनर्गठन और युक्तियुक्तकरण का मुख्य उद्देश्य प्रशासकीय कार्यों की दक्षता को बढ़ाना और आमजन तक शासकीय सेवाओं की पहुंच को आसान बनाना है। प्रशासनिक इकाइयों के पुनर्गठन के लिए आधिकारिक पोर्टल www.mpaurc.mp.gov.in के माध्यम से 31 जुलाई तक अपने सुझाव प्रस्तुत कर सकते हैं। पोर्टल पर प्राप्त होने वाले इन सुझावों पर जिला कलेक्टर विचार करेंगे और अपनी अनुशंसा के साथ इसे आयोग को भेजेंगे। 

आयोग के अध्यक्ष श्री मिश्रा ने निर्देश दिए कि जिला, उपखंड, तहसील, जनपद एवं विकासखंड स्तर पर भी बैठकें आयोजित की जाएं, ताकि प्रशासनिक इकाइयों के पुनर्गठन के संबंध में सम्यक रूप से विचार कर जमीनी सुझाव प्राप्त किए जा सकें। जिले की सभी तहसीलों और अनुविभागों की बैठकों के बाद, कलेक्टर अपने स्तर पर अधीनस्थों से प्राप्त प्रस्तावों के आधार पर एक अंतिम प्रस्ताव तैयार करेंगे और उसे आयोग के पोर्टल पर अपलोड करेंगे। आयोग द्वारा केवल कलेक्टर द्वारा प्रेषित इसी अंतिम प्रस्ताव की समीक्षा की जाएगी और प्राप्त सुझावों के आधार पर पुनर्गठन की अनुशंसा की जाएगी। 

आयोग के सचिव श्री अक्षय कुमार सिंह ने बैठक में प्रशासनिक समन्वय को अधिक तीव्र और प्रभावी बनाने पर बल देते हुए अधिकारियों को निर्देशित किया कि जिले के सभी प्रमुख अधिकारियों का एक व्हाट्सएप ग्रुप तैयार किया जाए। यह डिजिटल प्लेटफॉर्म एक त्वरित संचार माध्यम के रूप में कार्य करेगा, जिसके जरिए रचनात्मक सुझाव, आवश्यक डेटा और महत्वपूर्ण जानकारियां रियल-टाइम में एक-दूसरे के साथ साझा कर सकेंगे, जिससे निर्णय लेने की प्रक्रिया में गति आएगी। 

सचिव श्री सिंह ने कहा कि भविष्य की दूरगामी अपेक्षाओं और आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर जो भी सुझाव दिए जाएं उनके केंद्र बिंदु में जनता और सुगम सेवा प्रदायगी होनी चाहिए। 

आजतक 24 के प्रशासन से सवाल

1. प्रशासनिक इकाइयों के पुनर्गठन के लिए जनता से सुझाव मांगे गए हैं, लेकिन अंतिम प्रस्ताव केवल कलेक्टर के माध्यम से आयोग तक जाएगा। यदि किसी क्षेत्र के लोगों के सुझाव अंतिम प्रस्ताव में शामिल नहीं किए गए, तो उनके पास अपील या आपत्ति दर्ज कराने की क्या व्यवस्था होगी?

2. क्या आयोग ने नए जिले, तहसील या विकासखंड बनाने के लिए कोई स्पष्ट और सार्वजनिक मानदंड (जैसे जनसंख्या, दूरी, भौगोलिक कठिनाई, राजस्व, प्रशासनिक भार आदि) तय किए हैं? यदि हां, तो उन्हें सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया?

3. मध्यप्रदेश में पहले भी कई प्रशासनिक इकाइयों के गठन की मांग वर्षों से लंबित है। यह आयोग अपनी अनुशंसाएं सरकार को कब तक सौंपेगा, और क्या सरकार ने इन्हें लागू करने की कोई निश्चित समय-सीमा तय की है, या यह प्रक्रिया केवल सुझावों तक ही सीमित रहेगी?


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