रीवा संभाग में समर्थन मूल्य पर खरीदे गए गेहूं के कथित गबन का मामला गरमाया, कांग्रेस ने उच्चस्तरीय जांच की उठाई मांग

रीवा संभाग में समर्थन मूल्य पर खरीदे गए गेहूं के कथित गबन का मामला गरमाया, कांग्रेस ने उच्चस्तरीय जांच की उठाई मांग

रीवा - मध्यप्रदेश के रीवा संभाग में समर्थन मूल्य पर खरीदे गए गेहूं के कथित गबन को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस नेता कुंवर सिंह एवं विनोद शर्मा ने रीवा संभागायुक्त को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने तथा दोषियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की है। साथ ही आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) से भी स्वतंत्र जांच कराने की मांग रखी गई है। ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2026 की समर्थन मूल्य गेहूं खरीदी के दौरान रीवा जिले के 308 टन तथा सतना जिले के 551 टन, कुल 859 टन गेहूं खरीदी केंद्रों से वेयरहाउस तक पहुंचने से पहले ही गायब हो गया। कांग्रेस नेताओं के अनुसार इस गेहूं की अनुमानित कीमत लगभग 2 करोड़ 28 लाख रुपये है।

दैनिक आज तक 24 समाचार ने पहले ही उठाया था मुद्दा कि धान गेहू में गुण बक्कता बिहीन और काल्पनिक कृषको के नाम खरीद कर गोदामों में भादारित की गई रीवा संभाग में गोदाम सत्ताबिपक्ष ब्युरोकेट के भंडार गृह होने के कारन जांच काल्पनिक होते है या इनके स्वाम वेयर हाउस है या इनके सगी संबधी के उल्लेखनीय है कि दैनिक आज तक 24 समाचार  ने पूर्व में भी समर्थन मूल्य पर गेहूं एवं धान खरीदी में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार संबंधी शिकायतों को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। समाचार पत्र ने अपने प्रकाशनों में खरीदी प्रक्रिया, परिवहन, भंडारण तथा किसानों के भुगतान से जुड़े विभिन्न प्रश्न उठाए थे। हालांकि, उस समय इन शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई या व्यापक जांच सामने नहीं आई। अब कांग्रेस नेताओं द्वारा प्रस्तुत ज्ञापन में रीवा संभाग में गेहूं की कथित हेराफेरी का मुद्दा उठाए जाने के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है।

रिकॉर्ड के मिलान से खुल सकते हैं कई राज

समाचार पत्र का मानना है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच के दौरान केवल खरीदी केंद्रों और वेयरहाउस के स्टॉक का ही नहीं, बल्कि ऑनलाइन खरीदी रिकॉर्ड, किसानों के नाम पर दर्ज बिक्री, परिवहन अभिलेख, भुगतान विवरण तथा गोदाम में वास्तविक भंडारण का भी विस्तृत मिलान किया जाना चाहिए। यदि जांच एजेंसियां यह सत्यापित करें कि किन किसानों के नाम पर कितनी मात्रा में गेहूं की खरीदी दर्ज हुई, किस खाते में भुगतान गया, भुगतान के बाद राशि कितने समय में निकाली गई तथा संबंधित गेहूं वास्तव में गोदाम तक पहुंचा या नहीं, तो कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।

फर्जी खरीदी की भी जांच की मांग

ज्ञापन में लगाए गए आरोपों और पूर्व में सामने आई शिकायतों को देखते हुए यह आशंका भी व्यक्त की जा रही है कि यदि कहीं किसानों के नाम पर काल्पनिक या फर्जी खरीदी दर्ज कर भुगतान किया गया हो, तो उसकी भी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। हालांकि इस संबंध में फिलहाल कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, इसलिए यह जांच का विषय है।

किसानों के हितों पर उठे सवाल

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि किसानों ने शासन की समर्थन मूल्य योजना के तहत अपना गेहूं खरीदी केंद्रों पर बेचा, लेकिन कई मामलों में वह गेहूं निर्धारित वेयरहाउस तक नहीं पहुंचा। उनका आरोप है कि यदि खरीदा गया अनाज रिकॉर्ड में दर्ज है तो फिर वह रास्ते में कहां और कैसे गायब हो गया, इसकी जवाबदेही तय होना चाहिए।

100 करोड़ रुपये से अधिक के घोटाले की आशंका

कांग्रेस नेता कुंवर सिंह ने दावा किया कि यदि पूरे रीवा संभाग की विस्तृत जांच कराई जाए तो केवल 859 टन गेहूं का मामला ही नहीं, बल्कि 100 करोड़ रुपये से अधिक के कथित गेहूं घोटाले का खुलासा हो सकता है। हालांकि, यह दावा कांग्रेस नेताओं का आरोप है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

ईओडब्ल्यू जांच की मांग

ज्ञापन में मांग की गई है कि पूरे प्रकरण की जांच आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) अथवा किसी अन्य स्वतंत्र एवं सक्षम एजेंसी से कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि खरीदा गया गेहूं कहां गायब हुआ और यदि किसी स्तर पर भ्रष्टाचार हुआ है तो दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

जांच के बाद ही होगी स्थिति स्पष्ट

फिलहाल यह मामला आरोपों और शिकायतों के स्तर पर है। संबंधित विभाग या राज्य सरकार की ओर से इन आरोपों पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में पूरे प्रकरण की वास्तविक स्थिति निष्पक्ष जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। यदि खरीदी, परिवहन, भुगतान और भंडारण से जुड़े सभी अभिलेखों का वैज्ञानिक एवं डिजिटल ऑडिट कराया जाता है, तो पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सकती है। वहीं आरोप असत्य पाए जाने पर संबंधित पक्षों के विरुद्ध भी विधिसम्मत कार्रवाई की जा सकती है।

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