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| नशे पर प्रहार सराहनीय, अब पूरे नेटवर्क और संरक्षण देने वालों पर भी हो कार्रवाई |
रीवा - रीवा संभाग में पिछले कुछ वर्षो से आई.जी. पुलिस संभाग रीवा गौरव राजपूत पदस्थापना के दौरान से नशीले पदार्थों के विरुद्ध जिस प्रकार पुलिस ने लगातार बड़ी कार्रवाई की है, वह निश्चित रूप से कानून-व्यवस्था और समाज की सुरक्षा की दिशा में एक सकारात्मक संकेत है। संभागीय पुलिस अधिकारियों, पुलिस अधीक्षकों तथा जिला एवं थाना स्तर के अधिकारियों की सक्रियता से नशीले कफ सिरप, अवैध शराब और अन्य मादक पदार्थों के कारोबार पर लगातार प्रहार किया जा रहा है। इससे विशेष रूप से युवाओं, मध्यमवर्गीय परिवारों और ग्रामीण समाज में राहत और विश्वास का वातावरण बना है।
देश के गृहमंत्री अमित साह भारत सरकार द्वारा पुरे भारत में नशा को समाप्त करने का अभियान चलाया है उसी तार तम्य में प्रदेश के मुख्या मंत्री डॉ मोहन यादव प्रदेश में सक्रियता से नशा चाहे जिस प्रकार से हो नष्ट और बंद करने का बहियाँ चलाया है 2026 जुलाई में जिस तरह से तबाद तोड़ जिले के कार्यवाही हो रही है काबिले तारीफ है समस्त थाना प्रभारी चौकी प्रभारी आई जी, एस.पी., अन्य अधिकारी की कार्यवाही का ही परिणाम है की हाल के दिनों में सोहागी थाना क्षेत्र में बड़ी मात्रा में नशीले कफ सिरप की खेप की जब्ती, मऊगंज जिले में अवैध शराब एवं अन्य नशीले पदार्थों के विरुद्ध अभियान तथा रीवा-मऊगंज सहित विभिन्न जिलों में लगातार हो रही कार्रवाई इस बात का संकेत देती है कि यदि इच्छाशक्ति हो तो संगठित अपराध पर प्रभावी नियंत्रण संभव है।
इन कार्रवाइयों ने एक और गंभीर तथ्य उजागर किया है कि रीवा संभाग लंबे समय से नशे के कारोबार का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनता जा रहा था। यह स्थिति केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक चिंता का भी विषय है।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल अभी भी बाकी है
कार्रवाई केवल नशे की खेप पकड़ने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि इतने बड़े स्तर पर नशे का कारोबार आखिर वर्षों तक चलता कैसे रहा?
किसी भी जिले में बड़ी मात्रा में मेडिकल नशा, अवैध शराब अथवा अन्य प्रतिबंधित पदार्थों का व्यापार बिना स्थानीय स्तर पर जानकारी के लंबे समय तक संचालित होना कठिन माना जाता है। ऐसे में आवश्यक है कि जांच केवल तस्करों तक सीमित न रहे, बल्कि पूरे सप्लाई नेटवर्क, वित्तीय लेन-देन, परिवहन श्रृंखला तथा यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका सामने आती है तो उसकी भी निष्पक्ष जांच हो।
यदि जांच में किसी पुलिसकर्मी, औषधि विभाग के अधिकारी, परिवहन श्रृंखला से जुड़े व्यक्ति अथवा किसी अन्य सरकारी कर्मचारी की संलिप्तता प्रमाणित होती है, तो उनके विरुद्ध भी कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। हालांकि, बिना जांच किसी व्यक्ति या अधिकारी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
नेटवर्क की जड़ तक पहुंचना होगा
विशेषज्ञों का मानना है कि नशे का कारोबार केवल छोटे तस्करों के भरोसे नहीं चलता। इसके पीछे सप्लाई चेन, वित्तीय नेटवर्क, अंतरराज्यीय संपर्क और संगठित गिरोह सक्रिय रहते हैं। इसलिए केवल खेप पकड़ना पर्याप्त नहीं होगा। आवश्यकता इस बात की है कि यह पता लगाया जाए कि नशीले पदार्थ कहां से आ रहे हैं, किन मार्गों से रीवा संभाग तक पहुंचते हैं और इनके पीछे कौन-कौन लोग सक्रिय हैं।
यदि इस नेटवर्क की आर्थिक जांच, कॉल रिकॉर्ड, बैंकिंग लेन-देन और अंतरराज्यीय संपर्कों की भी पड़ताल की जाए तो पूरे गिरोह का पर्दाफाश संभव है।
ईमानदार अधिकारियों का मनोबल बढ़ाना भी जरूरी
रीवा संभाग में हाल की कार्रवाई यह भी दर्शाती है कि बड़ी संख्या में पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारी पूरी ईमानदारी और निष्ठा से अपना दायित्व निभा रहे हैं। ऐसे अधिकारियों का मनोबल बढ़ाना भी उतना ही आवश्यक है जितना कि भ्रष्ट तत्वों पर कार्रवाई करना।
जनभागीदारी से ही सफल होगा अभियान
नशे के विरुद्ध लड़ाई केवल पुलिस की नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है। यदि नागरिक, जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठन और प्रशासन मिलकर कार्य करें तथा सूचना देने वालों की पहचान सुरक्षित रखी जाए, तो रीवा संभाग को नशा मुक्त बनाने का लक्ष्य तेजी से हासिल किया जा सकता है।
रीवा संभाग में शुरू हुआ यह अभियान तभी पूर्ण सफलता प्राप्त करेगा, जब कार्रवाई केवल छोटी मछलियों तक सीमित न रहकर पूरे नेटवर्क, उसके वित्तीय तंत्र और यदि जांच में संरक्षण देने वाले किसी भी व्यक्ति की भूमिका सामने आए तो उसके विरुद्ध भी बिना किसी भेदभाव के कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। तभी यह अभियान समाज में स्थायी परिवर्तन का आधार बन सकेगा। रीवा संभाग में नशे के सबंध में प्रदेश के उपमुख्या मंत्री रीवा विधयाक राजेंद्र शुक्ल उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के साथ भी बैठक कर चुके है इसके बाद भी उत्तर प्रदेश के माध्य प्रदेश के लगे सीमा से जिले में की जा रही है दैनिक आज तक 24कई बार प्रशासन का ध्यान समाचार के माध्यम से केन्द्रित करा चूका है।
